New Delhi: पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश की निगाहें इस बात पर टिकी हुई थी कि राज्य का मुख्यमंत्री कौन हो सकता है? राजनीतिक पंडितों द्वारा कई नाम उछाले जा रहे थे, लेकिन कोलकाता में भाजपा विधायक दल की बैठक में शुवेंदु अधिकारी के नाम पर अंतिम मुहर लगी तो स्थिति साफ हो गई। खास बात यह है कि खुद केंद्र के पर्यवेक्षक गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नाम का ऐलान किया। शनिवार 9 मई को वे शपथ भी ले लेंगे।
क्यों प्रमुख दावेदार थे ?
राज्य में टीएमसी को कड़ी टक्कर देने के नाते शुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद के लिए स्वाभाविक रूप से सबसे प्रमुख दावेदार थे। वे राज्य में भाजपा के सबसे ऐसे मजबूत नेता हैं जिन्होंने ममता बनर्जी को मोर्चे पर न सिर्फ कड़ी टक्कर दी, बल्कि परास्त भी कर डाला। पहले नंदी ग्रांम में और फिर भवानीपुर में ममता को भारी मतों से हराया। संघर्ष की उनकी इसी क्षमता के कारण राज्य भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा और उन्होंने चुनाव अभियान को गति देकर राज्य में भगवा परचम लहरा दिया।
New Delhi: जन भावनाओं का सम्मान
सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य में भाजपा की जीत में हिंदू वोटों का बहुत बड़ा योगदान है। शुवेंदु हिंदू वोटों को एकजुट करने में आगे रहे। फिर पार्टी के बड़े नेता भी बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ने की बात करते रहे, जिसका जनता में व्यापक असर हुआ। लिहाजा पार्टी ने जन भावनाओं का सम्मान करते हुए उनके नाम पर मोहर लगाई।
New Delhi: अच्छे सेना नायक
शुवेंदु के पक्ष में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि संगठन क्षमता और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने का उन्हें अनुभव है। इस बात का श्रेय उन्हें ही जाता है कि उनकी मेहनत के बूते भाजपा टीएमसी के मजबूत किले को भेद पाने में सफल रही। टीएमसी के आक्रामक रुख का उन्होंने उसे उसी की भाषा में जवाब दिया। वे कठिन क्षणों में भयभीत भी नहीं हुए। चुनाव प्रचार के दौरान उन पर हमले की कोशिश हुई, मगर वे मोर्चे पर डटे रहे।यह एक अच्छे सेना नायक होने का गुण है।
New Delhi: प्रशासनिक अनुभव
शुवेंदु को न केवल संगठन, बल्कि प्रशासनिक अनुभव भी हासिल है, जो एक मुख्यमंत्री के लिए जरूरी शर्त है। वे टीएमसी सरकार में मंत्री रहे। उम्मीद है शुवेंदु जनता और अपनी पार्टी की आकांक्षाओं पर खरे उतरेंगे। उनके नेतृत्व में बंगाल की जनता विकास और खुशहाली की दिशा में आगे बढ़ सकेगी।








