Nirmala Sapre news: मध्य प्रदेश की सप्रे विधायक निर्मला सप्रे के एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बावजूद भाजपा के मंचों पर नजर आने वाली निर्मला सप्रे ने कहा कि अगर बीना को जिला बनाया जाए और विकास कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपए दिए जाएं, तो वे उमंग सिंघार के साथ रहने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, “जो बीना को जिला बनाएगा, हम उसके साथ हैं।”
‘कोर्ट तय करेगी मैं किस पार्टी में हूं’
जब मीडिया ने उनसे पूछा कि वे फिलहाल किस पार्टी के साथ हैं, तो उन्होंने कहा कि मामला अदालत में लंबित है और अंतिम फैसला कोर्ट ही करेगी। सप्रे ने कहा, “जनता अपना फैसला दे चुकी है। अब कोर्ट जो तय करेगा, मैं वहीं रहूंगी।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने खुद कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया था, बल्कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनके खिलाफ याचिका लगाई थी।
Nirmala Sapre news: ‘पार्टी में बैठे लोग षड्यंत्र कर रहे’
निर्मला सप्रे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेता नहीं चाहते कि वे सक्रिय विधायक के रूप में काम करें। उन्होंने कहा कि बीना में पिछले कई वर्षों से रुके विकास कार्य अब शुरू हुए हैं, जिससे कुछ लोग परेशान हैं।
Nirmala Sapre news: कांग्रेस का पलटवार
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने निर्मला सप्रे के बयान को “खुली राजनीतिक सौदेबाजी” बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें टिकट देकर विधायक बनाया, लेकिन वे भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होती रहीं। शर्मा ने मांग की कि सप्रे नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें और दोबारा चुनाव लड़ें।
दल-बदल कानून के तहत मामला लंबित
निर्मला सप्रे के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जुलाई 2024 में विधानसभा अध्यक्ष को दल-बदल विरोधी कानून के तहत शिकायत दी थी। मामला फिलहाल हाईकोर्ट और विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित है। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, पार्टी छोड़ने या व्हिप के खिलाफ जाने पर विधायक की सदस्यता रद्द की जा सकती है।
तकनीकी रूप से अब भी कांग्रेस विधायक
हालांकि निर्मला सप्रे भाजपा के कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय रही हैं, लेकिन उन्होंने अब तक न तो कांग्रेस से इस्तीफा दिया है और न ही भाजपा में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा की है। तकनीकी रूप से वे अभी भी कांग्रेस विधायक मानी जा रही हैं।
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