Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार ने दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। महिला पत्रकार का दावा है कि AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेने के दौरान ACP ने उनके सीने पर हाथ मारा और उन्हें धक्का देकर मौके से चले गए। घटना के बाद FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर सैकड़ों पत्रकार पार्लियामेंट्री स्ट्रीट थाने के बाहर धरने पर बैठ गए।
Jantar Mantar Protest: साढ़े 3 घंटे इंतजार के बाद भी FIR दर्ज नहीं होने का दावा
रात करीब 11 बजे कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने महिला पत्रकार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में महिला पत्रकार ने कहा कि वह करीब साढ़े 3 घंटे से थाने के बाहर बैठी हैं, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है। इसके बाद बड़ी संख्या में पत्रकार उनकी शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर थाने के बाहर जमा हो गए।
राहुल गांधी ने अमित शाह से मांगा जवाब
मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगते हुए कहा कि दिल्ली की महिलाएं और छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और सत्याग्रह कर रही हैं। राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए अमित शाह को इस मामले पर जवाब देना चाहिए।

Jantar Mantar Protest: CJP ने पुलिस पर FIR नहीं दर्ज करने का लगाया आरोप
CJP ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न की शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया है। संगठन के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज करने से पहले CCTV फुटेज की जांच की जाएगी।CJP ने सवाल उठाया कि क्या दिल्ली पुलिस गंभीर शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय ACP को बचाने की कोशिश कर रही है। संगठन ने लोगों से रविवार सुबह 11 बजे पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर पहुंचने की अपील भी की।
लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को लगातार दूसरे दिन प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे। प्रदर्शन में AISA के अलावा कई छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग शामिल हुए।प्रदर्शनकारियों ने पटेल चौक से जंतर-मंतर की ओर मार्च किया। उन्हें जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस और पैरामिलिट्री बलों ने बैरिकेड लगाए थे। मौके पर अतिरिक्त जवान भी तैनात किए गए थे। इस दौरान पुलिस ने करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
Jantar Mantar Protest: शुक्रवार को करीब 1,000 लोग हिरासत में लिए गए थे
इससे पहले 2 सितंबर को जंतर-मंतर और उसके आसपास हुए प्रदर्शन के दौरान करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में इनमें से कई लोगों को छोड़ दिया गया।दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन को लेकर कम से कम 3 FIR दर्ज की थीं। इनमें 2 FIR पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने और 1 FIR कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई थी।इन मामलों में आदेश की अवहेलना, सरकारी काम में बाधा डालने और सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित धाराएं लगाई गई थीं। प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। इसके तहत बिना लिखित अनुमति 5 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस निकालने, प्रदर्शन करने और धरना देने पर रोक थी।
Jantar Mantar Protest: SIR को लेकर चुनाव आयोग पर उठ रहे सवाल
जंतर-मंतर पर हो रहा यह प्रदर्शन चुनाव आयोग से जुड़े एक विवाद के बीच हो रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी।रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने कहा था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। SIR की प्रक्रिया को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि किसी भी संस्था में चर्चा के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है। EC ने कहा कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी आधार हासिल है और ये आदेश तय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं।

Jantar Mantar Protest: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में क्या किए गए 6 दावे?
14 बार लिखित आपत्ति: रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इनमें से 4 आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं।
वोटर लिस्ट से जुड़े मामलों पर आपत्ति: दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया से जुड़ी थीं। पश्चिम बंगाल में वोटर डिलीशन से संबंधित अपीलों पर भी सवाल उठाए गए थे।
वोटर डेटाबेस और ऑडिट पर सवाल: संधू और जोशी ने वोटर डेटाबेस तक पहुंच को धीरे-धीरे दिल्ली में केंद्रीकृत किए जाने पर सवाल उठाए थे। विवेक जोशी ने वोटर रिकॉर्ड में होने वाले बदलावों का ऑडिट कराने का सुझाव दिया था, ताकि रिकॉर्ड में बदलाव केवल अधिकृत अधिकारी ही कर सकें।
Form-6 में बदलाव पर आपत्ति: दोनों चुनाव आयुक्तों ने नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किए गए बदलाव पर आपत्ति जताई थी। विवेक जोशी ने कहा था कि चुनाव नियमों में बदलाव किए बिना Form-6 में इस तरह बदलाव नहीं किया जा सकता। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस पर आपत्ति दर्ज की थी।
कुछ कदमों को बताया अनधिकृत और गैरकानूनी: रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्तों ने नए वोटरों से जुड़े कुछ कदमों को “अनधिकृत और गैरकानूनी” बताया था।
गोवा में 97 वोटर अंतिम सूची में शामिल नहीं हो सके: गोवा में 97 ऐसे वोटर थे, जिन्हें इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स ने पात्र माना था। हालांकि, सॉफ्टवेयर में आई समस्या के कारण उनके नाम अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो सके। रिपोर्ट में इस घटना को डेटा सिस्टम के केंद्रीकरण को लेकर उठाई गई चिंताओं के उदाहरण के तौर पर बताया गया।









