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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्यों होते हैं? जानिए किसके पास है ऐतिहासिक स्मारक की जिम्मेदारी और कौन संभालता है व्यवस्था

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्यों होते हैं? जानिए किसके पास है ऐतिहासिक स्मारक की जिम्मेदारी और कौन संभालता है व्यवस्था

Jantar Mantar Protest: राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर सुर्खियों में है। देशभर से छात्र और विभिन्न संगठन अपनी मांगों को लेकर यहां प्रदर्शन करने पहुंच रहे हैं। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर जंतर-मंतर का मालिक कौन है और जब यहां कोई धरना-प्रदर्शन नहीं होता, तब इसकी देखरेख और व्यवस्थाएं कौन संभालता है। दरअसल, ऐतिहासिक स्मारक और प्रदर्शन स्थल दोनों अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत आते हैं।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण करता है स्मारक का संरक्षण

नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक जंतर-मंतर एक संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक है, जिसका स्वामित्व और संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास है। यह संस्था पूरे वर्ष स्मारक के रखरखाव, संरक्षण और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाती है। परिसर में मौजूद ऐतिहासिक खगोलीय उपकरणों की देखभाल, बागवानी, सफाई और मरम्मत जैसे कार्य नियमित रूप से कराए जाते हैं ताकि इसकी ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित बनी रहे।

Jantar Mantar Protest: स्मारक के भीतर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जंतर-मंतर परिसर के अंदर सुरक्षा व्यवस्था एएसआई की निगरानी में तैनात सुरक्षा कर्मियों द्वारा संभाली जाती है। इनका मुख्य उद्देश्य सदियों पुराने खगोलीय उपकरणों और ऐतिहासिक संरचनाओं को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाना होता है। यह स्मारक आम पर्यटकों के लिए भी खुला रहता है और टिकट लेकर लोग यहां घूमने आ सकते हैं।

Jantar Mantar Protest: विरोध प्रदर्शन स्मारक के बाहर होते हैं

अक्सर यह माना जाता है कि प्रदर्शन जंतर-मंतर के भीतर होते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि धरना-प्रदर्शन जंतर-मंतर रोड पर आयोजित किए जाते हैं, जो संरक्षित स्मारक परिसर से अलग क्षेत्र है। इसलिए ऐतिहासिक स्मारक और प्रदर्शन स्थल का प्रशासन तथा प्रबंधन अलग-अलग विभागों के अधीन आता है।

दिल्ली पुलिस संभालती है कानून-व्यवस्था

जंतर-मंतर रोड और उसके आसपास के इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस, विशेष रूप से नई दिल्ली जिला पुलिस की होती है। प्रदर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और शांति बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। वहीं, सामान्य दिनों में भी पुलिस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर नजर रखती है।जब जंतर-मंतर रोड पर कोई प्रदर्शन नहीं होता, तब इस क्षेत्र की नागरिक सुविधाओं का रखरखाव नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) करती है। सड़क की सफाई, फुटपाथों का रखरखाव, स्ट्रीट लाइट, पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता जैसी सभी मूलभूत सेवाएं एनडीएमसी की जिम्मेदारी होती हैं, ताकि क्षेत्र साफ-सुथरा और व्यवस्थित बना रहे।

Jantar Mantar Protest: 1724 में बनी थी ऐतिहासिक वेधशाला

जंतर-मंतर का निर्माण वर्ष 1724 में जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने एक खगोलीय वेधशाला के रूप में कराया था। यहां स्थापित विशाल खगोलीय यंत्रों की मदद से ग्रह-नक्षत्रों की गतिविधियों और समय का अध्ययन किया जाता था। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1948 में इसे राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक घोषित किया गया और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को सौंप दी गई।आज जंतर-मंतर दोहरी पहचान रखता है। एक ओर यह भारत की समृद्ध वैज्ञानिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है, तो दूसरी ओर जंतर-मंतर रोड लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले लोगों के प्रमुख प्रदर्शन स्थलों में से एक बन चुका है। हालांकि दोनों स्थान एक-दूसरे के बिल्कुल पास हैं, लेकिन इनके प्रबंधन और जिम्मेदारियां अलग-अलग सरकारी संस्थाओं के पास हैं।

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