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बलिदानी वायुसेना जवान जितेंद्र शर्मा के गांव सालपुर में शोक की लहर, अंतिम विदाई की तैयारियों में जुटे ग्रामीण

जितेंद्र शर्मा

Jitendra Sharma: असम के जोरहाट में शनिवार सुबह हुए विमान हादसे में शहीद हुए भारतीय वायुसेना के सार्जेंट जितेंद्र शर्मा (31) के पैतृक गांव सालपुर में गहरा शोक छाया हुआ है। गांव में मातम का माहौल है और परिजन सहित ग्रामीण अंतिम विदाई की तैयारियों में जुटे हुए हैं। परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है।परिजनों के अनुसार, शहीद जितेंद्र शर्मा का पार्थिव शरीर सोमवार दोपहर गाजियाबाद के हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पहुंचने के बाद सैन्य वाहन से यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए टप्पल, जट्टारी और हजियापुर मार्ग से उनके पैतृक गांव सालपुर लाया जाएगा।

हृदय रोग से पीड़ित मां से छिपाई गई शहादत की खबर

जितेंद्र शर्मा की मां राजेश्वरी देवी लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित हैं। उनकी नाजुक स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए परिवार और ग्रामीणों ने अभी तक उन्हें बेटे की शहादत की जानकारी नहीं दी है। परिजनों का मानना है कि अचानक यह खबर मिलने से उनकी तबीयत और बिगड़ सकती है।गांव के लोगों का कहना है कि पूरे परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय है, लेकिन मां की सेहत को देखते हुए सभी लोग सावधानी बरत रहे हैं।

Jitendra Sharma: अलीगढ़ का बेटा शहीद
वायुसेना हादसा: अलीगढ़ का बेटा शहीद

गांव निवासी राहुल शर्मा ने बताया कि जितेंद्र शर्मा पूरे गांव के लिए गर्व का विषय थे। वह सालपुर के पहले ऐसे युवक थे जिनका चयन भारतीय वायुसेना में हुआ था। उनकी उपलब्धि ने क्षेत्र के कई युवाओं को सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।जितेंद्र ने अपनी शुरुआती पढ़ाई टप्पल क्षेत्र के विद्यालयों से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ में कोचिंग की और भारतीय वायुसेना में चयनित हुए। अपने अनुशासन, मेहनत और व्यवहार के कारण वह गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए थे।

Jitendra Sharma: चार बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटे थे जितेंद्र

परिवार के अनुसार, जितेंद्र शर्मा चार विवाहित बहनों किरण, सुमन, समिता और अजनेश—तथा दो भाइयों रमाकांत और भूपेंद्र में सबसे छोटे थे। उनके पिता कालीचरण उर्फ करुआ शर्मा का करीब 12 वर्ष पहले ब्रेन हेमरेज के कारण निधन हो गया था।परिवार पहले ही पिता को खो चुका था और अब बेटे की शहादत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

जितेंद्र शर्मा
जितेंद्र शर्मा

अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी ग्रामीणों ने खुद संभाली

ग्रामीणों ने बताया कि अंतिम संस्कार की तैयारियों के लिए प्रशासन से सहायता मांगी गई थी, लेकिन समय पर सहयोग नहीं मिल सका। इसके बाद गांव के लोगों ने स्वयं आगे बढ़कर व्यवस्था संभाली।ग्रामीणों ने अपने स्तर पर जेसीबी और ट्रैक्टर की व्यवस्था की। खेत की सफाई, जमीन की तैयारी और अंतिम संस्कार स्थल को व्यवस्थित करने का कार्य खुद कराया, ताकि शहीद को सम्मानजनक विदाई दी जा सके।

ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई वरिष्ठ अधिकारी गांव नहीं पहुंचा। इस कारण लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी गई।ग्रामीणों का कहना है कि इस कठिन समय में प्रशासन को परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन अपेक्षित सहयोग समय पर नहीं मिला।

सांत्वना देने पहुंचे जनप्रतिनिधि

शाम के समय प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह दिलेर गांव पहुंचे और शहीद के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। इसके अलावा कांग्रेस के पूर्व विधायक विवेक बंसल और आलोक गौड़ भी गांव पहुंचे तथा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।खैर के एसडीएम शिशिर कुमार सिंह ने बताया कि शहीद की मां की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए गांव में भीड़ को नियंत्रित रखने का प्रयास किया जा रहा है। एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।उन्होंने बताया कि कोतवाल, तहसीलदार और लेखपाल सहित प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंच चुके हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

सालपुर गांव में जहां एक ओर शोक का माहौल है, वहीं दूसरी ओर लोगों को अपने वीर सपूत की शहादत पर गर्व भी है। ग्रामीणों का कहना है कि जितेंद्र शर्मा ने देश सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है और उनकी वीरता को हमेशा याद रखा जाएगा।