Karnataka News: कर्नाटक में नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद मंत्रिमंडल में असंतोष खुलकर सामने आ गया है। जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर बेंगलुरु शहरी क्षेत्र से जुड़ा विभाग देने के वादे से मुकरने का आरोप लगाया है।
मुख्यमंत्री को भेजा इस्तीफा
मुख्यमंत्री को भेजे अपने इस्तीफा पत्र में रेड्डी ने लिखा कि वह अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकते, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेतृत्व का धन्यवाद देते हुए कहा कि वह विधायक और कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के साथ जुड़े रहेंगे।
Karnataka News: वादाखिलाफी का लगाया आरोप
कोरमंगला स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रेड्डी ने दावा किया कि उन्हें पहले बेंगलुरु विकास विभाग देने की बात कही गई थी। बाद में उन्हें परिवहन विभाग सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के गठन के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया था कि ढाई वर्ष बाद बेंगलुरु शहरी क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग दिया जाएगा।
डीके शिवकुमार और डीके सुरेश पर आरोप
रेड्डी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके भाई डी.के. सुरेश स्वयं उनके घर आए थे और वादा पूरा करने का भरोसा दिया था। लेकिन विभागों के अंतिम आवंटन में उन्हें जल संसाधन विभाग सौंप दिया गया, जिससे वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
Karnataka News: 53 साल पुराना कांग्रेस से नाता
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रेड्डी ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा वर्ष 1973 में छात्र संगठन एनएसयूआई से शुरू हुई थी। पिछले 53 वर्षों में उन्होंने पार्टी के लिए लगातार काम किया है और कई बार विधायक तथा मंत्री रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी किसी मुख्यमंत्री से कोई विशेष विभाग नहीं मांगा।
कार्यकर्ताओं ने मनाने की कोशिश की
इस्तीफे की घोषणा के दौरान कई पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनसे फैसला वापस लेने का अनुरोध किया। बताया गया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद भी उनसे बातचीत कर रहे थे, लेकिन रेड्डी अपने निर्णय पर अड़े रहे और इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी कर दी।
शिवकुमार सरकार के लिए चुनौती
मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे के महज एक दिन बाद सामने आया यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इससे सरकार के भीतर असंतोष और गुटबाजी की चर्चाओं को भी बल मिला है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस नेतृत्व इस संकट को कैसे संभालता है और क्या रामलिंगा रेड्डी को मनाने की कोई कोशिश सफल हो पाती है।
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