Khelo India Winter Games: जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत बर्फ से ढके स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग में चार दिन के खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 की शुरुआत होने जा रही है। यह आयोजन 23 फरवरी से 26 फरवरी तक चलेगा और इसे देश के शीतकालीन खेलों का बड़ा उत्सव माना जा रहा है। इस बार खेलों का उद्घाटन जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल करेंगे। कार्यक्रम की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और सुरक्षा और व्यवस्था पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।

400 खिलाड़ियों का राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व
इस खेल प्रतियोगिता में देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 400 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। सभी प्रतिभागी बर्फ पर होने वाले अलग-अलग खेलों में अपना हुनर दिखाएंगे। आयोजकों के अनुसार इस बार गुलमर्ग में अच्छी बर्फबारी हुई है, जिससे खेलों के आयोजन में मदद मिलेगी और खिलाड़ियों को बेहतर माहौल मिलेगा।
यह प्रतियोगिता शीतकालीन खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है ताकि हिमालयी क्षेत्रों की खेल संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान मिल सके। इस आयोजन के जरिए देश के युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच मिलेगा। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी खेलो इंडिया विंटर गेम्स के सभी संस्करण हिमालयी क्षेत्रों में ही हुए हैं, जिससे इन क्षेत्रों की खेल परंपरा को प्रोत्साहन मिला है।
Khelo India Winter Games: चार मेडल श्रेणियों में होगा रोमांचक मुकाबला
इस बार चार अलग-अलग मेडल श्रेणियों में मुकाबले होंगे। इनमें स्की माउंटेनियरिंग, अल्पाइन स्कीइंग, नॉर्डिक स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग शामिल हैं। सबसे ज्यादा खिलाड़ियों ने अल्पाइन स्कीइंग में पंजीकरण कराया है, जिससे इस इवेंट में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी।
पिछले खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था और आइस स्केटिंग में चार स्वर्ण पदक जीतकर अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया था। इस बार भी राज्य की टीम से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। इसके बाद लद्दाख, महाराष्ट्र और तेलंगाना का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा था।

शीन-ए-शी शान बना खास शीतकालीन प्रतीक
खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 का मैस्कॉट ‘शीन-ए-शी (शान)’ है। यह हिम तेंदुए से प्रेरित है और भारतीय शीतकालीन खेल भावना का प्रतीक माना जाता है। मैस्कॉट फुर्ती, लचीलापन और कठिन परिस्थितियों में खुद को ढालने की क्षमता को दर्शाता है। इसके जरिए हिमालय की समृद्ध सांस्कृतिक और खेल विरासत को देशभर में पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है।
इस आयोजन के दौरान बड़े अधिकारियों द्वारा तैयारियों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है ताकि खेल सफल और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सकें। उम्मीद है कि यह चार दिवसीय खेल उत्सव भारतीय शीतकालीन खेलों के लिए एक नई पहचान बनाएगा और युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा देगा।
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