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शुक्रवार को कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर कालभैरव की विशेष पूजा, जानें शुभ-अशुभ समय की जानकारी

मासिक कालाष्टमी और कालभैरव पूजा का महत्व

Kalbhairav Puja: सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। पंचांग के पांच अंग नक्षत्र, वार, तिथि, करण और योग के आधार पर दिन की शुरुआत और शुभ-अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। शुक्रवार, 10 अप्रैल को बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस दिन कालभैरव की उपासनाका खास महत्व होता है, जिसे मासिक कालाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इसे काला अष्टमी भी कहा जाता है, क्योंकि यह प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। इस दिन भक्त पूजा और व्रत करके कालभैरव की विशेष कृपा प्राप्त करते हैं।

मासिक कालाष्टमी और कालभैरव पूजा का महत्व
मासिक कालाष्टमी और कालभैरव पूजा का महत्व

सूर्योदय, सूर्यास्त और तिथि का समय

दृक पंचांग के अनुसार, 10 अप्रैल को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 1 मिनट पर होगा जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 44 मिनट पर होगा। इस दिन अष्टमी तिथि रात 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगी, उसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी, हालांकि पूरे दिन अष्टमी की ही मान्यता होगी। नक्षत्र की स्थिति के अनुसार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र सुबह 11 बजकर 8 मिनट तक रहेगा और इसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र लग जाएगा। योग का प्रभाव शाम 6 बजकर 31 मिनट तक शिव योग रहेगा। करण के समय की बात करें तो बालव सुबह 10 बजकर 21 मिनट तक रहेगा और इसके बाद कौलव रात 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।

मासिक कालाष्टमी और कालभैरव पूजा का महत्व
मासिक कालाष्टमी और कालभैरव पूजा का महत्व

शुक्रवार के शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त की दृष्टि से सुबह का ब्रह्म मुहूर्त 4 बजकर 31 मिनट से 5 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। दोपहर का अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। शाम का गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल सुबह 6 बजकर 8 मिनट से 7 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। ये समय विशेष रूप से पूजा, व्रत और शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है।

Kalbhairav Puja: मासिक कालाष्टमी और कालभैरव पूजा का महत्व
मासिक कालाष्टमी और कालभैरव पूजा का महत्व

Kalbhairav Puja: अशुभ समय

अशुभ समय का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है। राहुकाल सुबह 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से शाम 5 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 7 बजकर 37 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक और दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 25 मिनट तथा दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। आडल योग सुबह 6 बजकर 1 मिनट से 11 बजकर 28 मिनट तक रहेगा और वर्ज्य समय शाम 8 बजकर 12 मिनट से 9 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इन समयों के दौरान महत्वपूर्ण कार्यों या पूजा से परहेज करना शुभ माना जाता है।

इस प्रकार, 10 अप्रैल का दिन कालभैरव की पूजा और व्रत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, साथ ही दिन के शुभ और अशुभ समय का सही ज्ञान रखने से सभी कार्यों में सफलता और शांति प्राप्त होती है।

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