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दूध पीने के बाद पेट में होती है गड़बड़ी? ये 6 लक्षण हो सकते हैं लैक्टोज इनटॉलरेंस के संकेत

Lactose Intolerance Symptoms:

Lactose Intolerance Symptoms: दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स लेने के बाद बार-बार ब्लोटिंग, गैस, पेट दर्द या दस्त की समस्या होती है तो इसे सामान्य पाचन समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। ये लैक्टोज इनटॉलरेंस के संकेत हो सकते हैं।

Lactose Intolerance Symptoms: क्या है लैक्टोज इनटॉलरेंस-

कई लोगों को दूध, आइसक्रीम, मिल्कशेक और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स खाने या पीने के बाद पाचन संबंधी परेशानियां होने लगती हैं। अक्सर लोग इसे गैस या ज्यादा खाना खाने का असर समझ लेते हैं। हालांकि, अगर एक जैसे लक्षण बार-बार डेयरी प्रोडक्ट्स लेने के बाद दिखाई देते हैं तो इसके पीछे लैक्टोज इनटॉलरेंस हो सकता है। इसमें शरीर दूध में मौजूद लैक्टोज को ठीक तरह से पचा नहीं पाता।

Lactose Intolerance Symptoms: दूध पीने के 2-3 घंटे बाद दिख सकते हैं लक्षण-

डॉ. अक्षय चुघ, इंटरनल मेडिसिन एंड मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स, मेट्रो हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट, नोएडा के अनुसार, लैक्टोज इनटॉलरेंस होने पर दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स लेने के कुछ घंटों के भीतर पाचन संबंधी लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में लक्षणों का समय और उनकी तीव्रता अलग-अलग हो सकती है।

1. दूध पीने के बाद पेट फूलना-

दूध या डेयरी प्रोडक्ट लेने के बाद अगर पेट सामान्य से ज्यादा फूला हुआ महसूस होता है तो इस पर ध्यान देना चाहिए। लैक्टोज ठीक से पच न पाने पर आंतों में गैस बनने से ब्लोटिंग हो सकती है। हालांकि, केवल ब्लोटिंग के आधार पर लैक्टोज इनटॉलरेंस की पुष्टि नहीं की जा सकती, क्योंकि इसके कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।

2. बार-बार गैस बनना-

दूध, आइसक्रीम या मिल्कशेक लेने के बाद अगर बार-बार गैस बनती है और बाकी समय ऐसी परेशानी नहीं होती, तो इस पैटर्न पर ध्यान देना जरूरी है।

3. पेट में गुड़गुड़ाहट-

कुछ लोगों को डेयरी प्रोडक्ट्स लेने के बाद पेट में लगातार गुड़गुड़ाहट या आंतों से आवाजें आने की समस्या हो सकती है। यह आंतों में गैस और पाचन प्रक्रिया में बदलाव से जुड़ी हो सकती है। अगर इसके साथ गैस, ब्लोटिंग या दस्त भी हों तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

4. पेट में दर्द या ऐंठन-

लैक्टोज को पचाने में परेशानी होने पर कुछ लोगों को दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स लेने के बाद पेट में दर्द, मरोड़ या ऐंठन महसूस हो सकती है। इसकी तीव्रता व्यक्ति और लैक्टोज की मात्रा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

5. दस्त लगना-

डेयरी प्रोडक्ट्स लेने के बाद बार-बार दस्त होना भी लैक्टोज इनटॉलरेंस से जुड़ा हो सकता है। अगर किसी खास डेयरी प्रोडक्ट के सेवन के बाद लगातार ऐसी समस्या होती है तो इसके कारण की जांच करवाना जरूरी है।

6. मतली या पेट में भारीपन-

कुछ लोगों को दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स लेने के बाद मतली, पेट भरा-भरा लगना या असहजता महसूस हो सकती है। हालांकि, ये लक्षण दूसरी पाचन संबंधी समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल इन लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी की पहचान नहीं करनी चाहिए।

क्या लक्षण तुरंत दिखाई देते हैं-

जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति में लैक्टोज इनटॉलरेंस के लक्षण एक ही समय पर शुरू हों। कई लोगों में डेयरी प्रोडक्ट लेने के कुछ समय बाद परेशानी शुरू हो सकती है। अगर हर बार दूध पीने के बाद गैस या ब्लोटिंग होती है, तो खाने और लक्षणों के बीच संबंध पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है। इस जानकारी को डॉक्टर के साथ साझा करने से सही कारण समझने में मदद मिल सकती है।

क्या हर डेयरी प्रोडक्ट से होती है परेशानी-

ऐसा जरूरी नहीं है। अलग-अलग डेयरी प्रोडक्ट्स में लैक्टोज की मात्रा अलग हो सकती है और हर व्यक्ति की लैक्टोज सहन करने की क्षमता भी अलग होती है। कुछ लोग कम मात्रा में दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स बिना किसी परेशानी के ले सकते हैं, जबकि अधिक मात्रा में सेवन करने पर उनमें लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के सभी डेयरी प्रोडक्ट्स को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है।

डॉक्टर कैसे करते हैं लैक्टोज इनटॉलरेंस की पहचान-

डॉक्टर सबसे पहले आपके लक्षणों, खान-पान और परेशानी के पैटर्न को समझते हैं। जरूरत पड़ने पर कुछ जांच भी कराई जा सकती हैं। इनमें हाइड्रोजन ब्रीथ टेस्ट प्रमुख जांचों में से एक है। कुछ मामलों में डॉक्टर दूसरी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं की जांच के लिए भी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।

इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से करें संपर्क-

अगर दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स लेने के बाद लगातार पेट दर्द, दस्त, गैस या ब्लोटिंग की समस्या रहती है तो डॉक्टर से सलाह लें। खास तौर पर बिना वजह वजन कम होना, मल में खून आना, लगातार उल्टी, रात में बार-बार दस्त, तेज या लगातार पेट दर्द या लंबे समय तक पाचन संबंधी परेशानी को सिर्फ लैक्टोज इनटॉलरेंस मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

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