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कच्चा और खराब खाना परोसे जाने से महिलाओं की बिगड़ी तबीयत, खीरी के प्रशिक्षण कार्यक्रम में मचा बवाल

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Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद के संतोष पैलेस में जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र द्वारा आयोजित 10 दिवसीय ‘विश्वकर्मा प्रशिक्षण एवं टूलकिट वितरण कार्यक्रम’ उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब भोजन की खराब गुणवत्ता को लेकर सैकड़ों महिलाओं का धैर्य जवाब दे गया। प्रशिक्षण ले रही 523 महिलाओं ने खाने को बेहद घटिया बताते हुए कार्यक्रम स्थल पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

कच्चे चावल और बेस्वाद सब्जी

प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं का आरोप है कि उन्हें जो भोजन परोसा गया, वह स्वास्थ्य मानकों पर बिल्कुल भी खरा नहीं था। महिलाओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हमें जो चावल दिए गए वे कच्चे थे और सब्जी भी अधपकी थी। यह खाना खाने के बाद कई महिलाओं को पेट दर्द और जी मिचलाने की शिकायत हुई। हम यहाँ हुनर सीखने आए हैं, बीमार होने के लिए नहीं। महिलाओं का कहना है कि एक तरफ सरकार गुणवत्ता और स्वास्थ्य को लेकर सख्त निर्देश देती है, वहीं सरकारी आयोजनों में ही इस तरह की लापरवाही बरती जा रही है।

Lakhimpur Kheri: जिला उद्योग अधिकारी की फटकार

हंगामे की सूचना मिलते ही जिला उद्योग अधिकारी उज्जवल सिंह मौके पर पहुँचे। उन्होंने महिलाओं की शिकायत को सही पाया और कैटरिंग टीम को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि भविष्य में ऐसी कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि दोबारा खाने की गुणवत्ता में कमी मिली, तो कैटरिंग संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Department) की टीम भी हरकत में आई। मौके पर पहुँचे दो फूड इंस्पेक्टरों ने परोसे गए भोजन के सैंपल लिए और उन्हें जांच के लिए भेज दिया है। फूड इंस्पेक्टरों ने कहा कि नियमों के अनुसार जो भी अनियमितता पाई जाएगी, उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मीडिया से बचते दिखे जिम्मेदार

हैरानी की बात यह रही कि जब मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों ने इस पूरे घटनाक्रम और लापरवाही पर अधिकारियों का पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने ‘बाइट’ देने से साफ मना कर दिया। अधिकारियों का कैमरे के सामने न आना कई सवाल खड़े करता है। आखिर जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से क्यों बच रहे हैं? फिलहाल, प्रशासन द्वारा सुधार के आश्वासन के बाद महिलाओं का गुस्सा शांत हुआ है, लेकिन इस घटना ने सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

Report By: Sanjay Kumar

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