Home » एक्सप्लनेर » मार्को रूबियो का 6 महीने में दूसरा भारत दौरा: दिल्ली से दूरी, मुंबई-जामनगर पर फोकस, राहुल गांधी ने क्यों उठाए सवाल?

मार्को रूबियो का 6 महीने में दूसरा भारत दौरा: दिल्ली से दूरी, मुंबई-जामनगर पर फोकस, राहुल गांधी ने क्यों उठाए सवाल?

दिल्ली नहीं, मुंबई-जामनगर क्यों जा रहे रूबियो?
दिल्ली नहीं, मुंबई-जामनगर क्यों जा रहे रूबियो?

Marco Rubio India Visit: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो 6 महीने के भीतर दूसरी बार भारत के दौरे पर आ रहे हैं। हालांकि, इस बार वे दिल्ली जाने के बजाय मुंबई और गुजरात के जामनगर का दौरा करेंगे। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी उनसे मुलाकात करने के लिए मुंबई पहुंचेंगे। रूबियो के इस दौरे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए तंज कसा है कि ‘रूबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है।’ ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अमेरिकी विदेश मंत्री मुंबई और जामनगर क्यों जा रहे हैं, जयशंकर के साथ उनकी मुलाकात को लेकर विवाद क्यों हो रहा है और क्या इस दौरे से भारत-अमेरिका के रिश्तों में सुधार आएगा?

Marco Rubio India Visit: 6 महीने में दूसरी बार भारत आ रहे रूबियो

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो 17 से 22 अक्टूबर तक विदेश दौरे पर हैं। अपने दौरे के पहले चरण में वे उज्बेकिस्तान के समरकंद पहुंचे हैं, जहां वे सी5+1 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। इसके बाद वे भारत आएंगे। खबरों के मुताबिक, उनके 19 अक्टूबर को भारत पहुंचने की संभावना है। इस बार रूबियो मुंबई और जामनगर जाएंगे, जबकि 6 महीने पहले 23 से 26 मई तक भारत दौरे के दौरान उन्होंने नई दिल्ली, कोलकाता, जयपुर और आगरा का दौरा किया था। उस समय वे अपनी पत्नी जीनेट के साथ आगरा के ताजमहल भी गए थे।

अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि रूबियो मुंबई में भारतीय अधिकारियों और कारोबारियों के साथ कई बैठकें करेंगे। इन बैठकों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी शामिल होने की उम्मीद है। इसके बाद रूबियो गुजरात के जामनगर जाएंगे, जहां वे रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी के भी मौजूद रहने की संभावना है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, रूबियो और जयशंकर की मुलाकात में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा और तकनीक जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

दिल्ली के बजाय मुंबई क्यों जा रहे हैं रूबियो?

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, मई से पहले मार्को रूबियो कभी भारत नहीं आए थे। इसलिए अपने पहले दौरे के दौरान उन्होंने नई दिल्ली, कोलकाता समेत कई शहरों का दौरा किया था। हालांकि, इस बार उनका दौरा कारोबार पर केंद्रित है। मई में रूबियो भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के समूह क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए थे। उस दौरे का मुख्य उद्देश्य कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करना था, जबकि अक्टूबर के दौरे में ऊर्जा, निवेश और व्यापार पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

Marco Rubio India Visit: रूबियो-जयशंकर की मुलाकात
रूबियो-जयशंकर की मुलाकात

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, रूबियो मुंबई में कारोबारी नेताओं से मुलाकात करेंगे, ताकि दोनों देशों के बीच निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा दिया जा सके। माना जा रहा है कि वे सेमीकंडक्टर और दवा उद्योग से जुड़े कारोबारियों के साथ भी बैठक कर सकते हैं। इसके अलावा, मुंबई स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास में अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें रूबियो शामिल होंगे। इससे पहले 24 मई को नई दिल्ली में भी इस वर्षगांठ से जुड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसमें सर्जियो गोर, मार्को रूबियो और एस. जयशंकर शामिल हुए थे।

Marco Rubio India Visit: जामनगर दौरे के पीछे क्या हैं तीन बड़ी वजहें?

गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की तेल रिफाइनरी स्थित है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में गिना जाता है। यहां प्रतिदिन करीब 14 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस किया जाता है। इस रिफाइनरी में भारी और मुश्किल से प्रोसेस होने वाले कच्चे तेल को भी साफ किया जा सकता है। खबरों के मुताबिक, रूबियो के स्वागत के लिए अंबानी परिवार एक बड़े कार्यक्रम की तैयारी कर रहा है। उनके जामनगर दौरे को अमेरिका की ईंधन जरूरतों, वेनेजुएला से तेल खरीद और रिलायंस के अमेरिकी निवेश से जोड़कर देखा जा रहा है।

अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतें

अमेरिका में डीजल की कीमतें 6 डॉलर प्रति गैलन से ज्यादा हो गई हैं, जो भारतीय मुद्रा में करीब 155 रुपये प्रति लीटर बैठती हैं। इसकी वजह से ट्रक चालकों, किसानों और माल ढुलाई से जुड़े कारोबारियों को परेशानी हो रही है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले देश में डीजल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है। इसी जरूरत के चलते अमेरिका रूस से भी डीजल खरीद रहा है। रिलायंस कम कीमत पर कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर सकती है और अमेरिका को पेट्रोल-डीजल बेच सकती है। इससे अमेरिकी बाजार में ईंधन की कमी से निपटने में मदद मिल सकती है।

Marco Rubio India Visit: वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ाने की कोशिश

जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद से अमेरिकी सरकार विदेशों में वेनेजुएला के तेल की बिक्री कर रही है। रिलायंस इंडस्ट्रीज वेनेजुएला के सबसे बड़े तेल खरीदारों में शामिल है। वैश्विक व्यापार से जुड़ी जानकारी देने वाली कंपनी केप्लर के मुताबिक, सितंबर में भारत ने वेनेजुएला से प्रतिदिन 2.57 लाख बैरल तेल खरीदा था। इसमें से 76 प्रतिशत तेल रिलायंस ने खरीदा था। अमेरिका चाहता है कि रिलायंस वेनेजुएला से तेल की खरीद और बढ़ाए। अमेरिकी प्रशासन कई बार भारत से वेनेजुएला का तेल खरीदने की अपील कर चुका है, हालांकि भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने ऐसा नहीं किया है।

अमेरिका में रिलायंस का 300 अरब डॉलर का निवेश

रिलायंस इंडस्ट्रीज अमेरिका के टेक्सास राज्य में एक नई तेल रिफाइनरी बनाने की योजना पर काम कर रही है। दावा है कि यह पिछले 50 साल में अमेरिका में बनने वाली पहली नई रिफाइनरी होगी। मार्च 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस परियोजना को 300 अरब डॉलर का सौदा बताया था। अमेरिका चाहता है कि यह निवेश जल्द से जल्द आगे बढ़े। ऐसे में रूबियो का जामनगर दौरा दोनों देशों के कारोबारी संबंधों और इस निवेश परियोजना के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

Marco Rubio India Visit: जयशंकर और रूबियो की मुलाकात पर क्यों उठ रहे सवाल?

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर 19 और 20 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद की मेजबानी करेंगे। इसके अलावा, 20 अक्टूबर को वे मार्को रूबियो से भी मुलाकात करेंगे और अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर दो प्रमुख सवाल उठ रहे हैं। पहला, भारत के विदेश मंत्री की बैठकों से जुड़ी जानकारी सबसे पहले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने क्यों सार्वजनिक की? दूसरा, अमेरिकी विदेश मंत्री दिल्ली आने के बजाय मुंबई में भारत के विदेश मंत्री से मुलाकात क्यों कर रहे हैं?

राहुल गांधी और जयराम रमेश ने उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करके इस दौरे पर तंज कसा। उन्होंने लिखा, ‘रूबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। मोदी जी, विदेश मंत्रालय में आपके अधिकारी इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि आखिर क्या हो रहा है।’कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने भी इस मामले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह हैरानी की बात है कि भारत में अमेरिकी राजदूत ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के मुंबई दौरे के बारे में ज्यादा जानकारी दी है। उन्होंने सवाल किया कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की घोषणा विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति के जिम्मे कब से सौंप दी गई?

Marco Rubio India Visit: विदेश मंत्रालय ने क्या जवाब दिया?

इन सवालों पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पिछले एक दशक से विदेशी मेहमानों की मेजबानी दिल्ली के बाहर करने की परंपरा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की मेजबानी की थी। इसके अलावा, उन्होंने अहमदाबाद में जर्मनी के चांसलर फेडरिक मर्ज की मेजबानी की और वाराणसी में मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम से मुलाकात की। रणधीर जायसवाल ने 17 अक्टूबर को आयोजित प्रेस वार्ता में मार्को रूबियो के भारत दौरे से जुड़ी जानकारी भी दी थी।

क्या भारत-अमेरिका के रिश्ते फिर सुधरेंगे?

पिछले कुछ महीनों में भारत और अमेरिका के संबंधों में तनाव देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। इनमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जुड़ा लिंडसे ग्राहम एक्ट और भारतीय आईटी कंपनियों के कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड देने में मिलने वाली छूट खत्म करने का मामला शामिल है। इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल जैसी भारतीय कंपनियों के कर्मचारियों पर भी इस फैसले का असर पड़ सकता है। हालांकि, मार्को रूबियो के भारत दौरे से पहले 16 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मामले पर अस्थायी रोक लगा दी और कहा कि इससे अमेरिका को फायदा होगा।

Marco Rubio India Visit: कारोबार और निवेश पर अमेरिका का जोर

भारतीय थिंक टैंक ‘द इमेजइंडिया इंस्टीट्यूट’ के वरिष्ठ भू-राजनीतिक विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेवा का मानना है कि रूबियो का ध्यान इस बार दिल्ली की पारंपरिक राजनीतिक गतिविधियों के बजाय मुंबई और जामनगर जैसे कारोबारी केंद्रों पर है। उनके मुताबिक, इस दौरे का उद्देश्य बड़े कारोबारी समझौतों को बढ़ावा देना, तेल रिफाइनरी क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करना, निवेश के नए अवसर तलाशना और दोनों देशों के कारोबारियों के बीच संबंध बढ़ाना है।

राजनीतिक टिप्पणीकार प्रताप भानु मेहता का मानना है कि रूबियो का दिल्ली के बजाय मुंबई और जामनगर जाना इस बात का संकेत हो सकता है कि अमेरिका भारत के राजनीतिक केंद्र के मुकाबले उसके कारोबारी केंद्रों से जुड़ने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। हालांकि, उनके मुताबिक, केवल व्यापार और निवेश पर आधारित संबंध दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए कारोबारी सहयोग के साथ राजनीतिक और रणनीतिक मुद्दों पर भी साझेदारी जरूरी होगी।