Mathura Holi 2026: ब्रज क्षेत्र में होली उत्सव की शुरुआत फुलेरा दूज के साथ हो चुकी है। फूलों की होली, लठमार होली और लड्डू होली के बीच मथुरा जिले का फालैन गांव अपनी अनोखी होलिका दहन परंपरा के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपरा के तहत पुजारी जलती हुई होलिका की आग पर नंगे पैर चलते हैं। फालैन गांव को ‘प्रह्लाद की नगरी’ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां का होलिका दहन भक्त प्रह्लाद की आस्था और अग्नि परीक्षा की कथा से जुड़ा हुआ है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, तपस्या और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
45 दिन पहले शुरू होती है तैयारी
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, होलिका दहन से लगभग 45 दिन पहले गांव के पुजारी विशेष व्रत और अनुष्ठान शुरू करते हैं। इस दौरान वे ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भूमि पर शयन करते हैं और प्रह्लाद मंदिर में रहकर दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
Mathura Holi 2026: जलती होलिका के बीच से गुजरते हैं पुजारी
होलिका दहन की रात पुजारी पहले प्रह्लाद कुंड में स्नान और पूजा करते हैं। इसके बाद जब होलिका की आग तेज हो जाती है और अंगारे दहकने लगते हैं, तब पुजारी नंगे पैर जलती आग के बीच से गुजरते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस परंपरा को देखने पहुंचते हैं।
Mathura Holi 2026: प्रह्लाद की कथा से जुड़ी परंपरा
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह परंपरा सतयुग से चली आ रही है। पौराणिक कथा के अनुसार होलिका भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी थी, लेकिन प्रह्लाद की भक्ति के कारण वह सुरक्षित रहे और होलिका जल गई। फालैन गांव में इसी घटना की स्मृति में यह अनुष्ठान किया जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि सदियों से चली आ रही इस परंपरा में अब तक कोई पुजारी घायल नहीं हुआ है, जिसे लोग आस्था और विश्वास का चमत्कार मानते हैं।
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