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Mayawati Umashankar Singh: भाई तो बहुत बने, लेकिन सब धोखा देकर चले गए…’ उमाशंकर सिंह को याद कर भावुक हुईं मायावती

Mayawati Umashankar Singh: भाई तो बहुत बने, लेकिन सब धोखा देकर चले गए...' उमाशंकर सिंह को याद कर भावुक हुईं मायावती

Mayawati Umashankar Singh: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक उमाशंकर सिंह के निधन से प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर है। बुधवार रात दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया। गुरुवार सुबह उनका पार्थिव शरीर लखनऊ स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां बसपा सुप्रीमो मायावती ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने उमाशंकर सिंह के परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।

अंतिम दर्शन के लिए पहुंचीं मायावती, परिवार को दिया ढांढस

बसपा प्रमुख मायावती गुरुवार सुबह लखनऊ स्थित उमाशंकर सिंह के आवास पहुंचीं। उन्होंने दिवंगत विधायक को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके बेटे सहित परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। शोकाकुल माहौल के बीच मायावती ने परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि यह केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरी बसपा की अपूरणीय क्षति है। इस दौरान बड़ी संख्या में रिश्तेदार, समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता भी वहां मौजूद रहे।

Mayawati Umashankar Singh:’उन्होंने कभी बसपा को धोखा नहीं दिया’

श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत में मायावती ने उमाशंकर सिंह की निष्ठा और समर्पण को याद किया। उन्होंने कहा कि जब से वह बसपा से जुड़े, तब से लेकर अंतिम समय तक पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ पार्टी की सेवा करते रहे। उन्होंने कभी भी परिस्थितियां बदलने पर पार्टी का साथ नहीं छोड़ा।

मायावती ने कहा कि उमाशंकर सिंह ने केवल पार्टी ही नहीं, बल्कि अपने विधानसभा क्षेत्र और समाज के विकास के लिए भी पूरी निष्ठा से काम किया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी के सबसे समर्पित विधायकों में से एक थे और उनके निधन से बसपा को बड़ी क्षति हुई है।

Mayawati Umashankar Singh:’भाई तो बहुत बने, लेकिन सब धोखा देकर चले गए’

उमाशंकर सिंह को याद करते हुए मायावती भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि वह उन्हें अपनी सगी बहन मानते थे और हर साल रक्षा बंधन पर चाहे वह दिल्ली में हों या लखनऊ में, उनसे राखी जरूर बंधवाते थे।मायावती ने कहा, “भाई तो बहुत बने, लेकिन सब धोखा देकर चले गए। पर इन्होंने कभी धोखा नहीं दिया। हर उतार-चढ़ाव में पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहे।” उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब सत्ता परिवर्तन के साथ नेता अक्सर दल बदल लेते हैं, तब भी उमाशंकर सिंह ने कभी अपनी निष्ठा नहीं बदली।

बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाने का दिया भरोसा

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इस कठिन समय में पार्टी पूरी तरह से उमाशंकर सिंह के परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि परिवार की इच्छा होगी तो उनके बेटे को राजनीति में आगे बढ़ने का पूरा अवसर दिया जाएगा और पार्टी में उनके पिता के समान सम्मान और महत्व मिलेगा।मायावती ने कहा कि रसड़ा विधानसभा की जनता भी यही चाहेगी कि उमाशंकर सिंह की राजनीतिक विरासत उनके बेटे आगे बढ़ाएं। उन्होंने आश्वासन दिया कि पार्टी इस दिशा में पूरा सहयोग करेगी।मायावती ने एक भावुक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि एक बार गंभीर बीमारी की स्थिति में भी उमाशंकर सिंह उनसे मिलने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि यह उनके समर्पण और सम्मान का प्रमाण था। ऐसे नेताओं का पार्टी में होना किसी संपत्ति से कम नहीं होता और उनका जाना व्यक्तिगत रूप से भी उनके लिए बेहद दुखद है।उमाशंकर सिंह को बसपा का मजबूत और भरोसेमंद चेहरा माना जाता था। वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा के एकमात्र विधायक थे और अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार रखते थे। उनके निधन से न केवल रसड़ा विधानसभा क्षेत्र, बल्कि पूरी बसपा ने एक समर्पित नेता खो दिया है। मायावती ने कहा कि उनकी कमी को भर पाना आसान नहीं होगा, लेकिन पार्टी उनके सिद्धांतों और विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास करती रहेगी।

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