MLC Election 2026: कितना बड़ा विरोधाभास है कि कांग्रेस को जिन राज्यों में चुनावी सफलता मिलती है, वहां पार्टी कार्यकर्ता बड़ी शान से विजय उत्सव मनाते हैं, लेकिन जहां हार जाते हैं, वहां तत्काल EVM पर ठीकरा फोड़ देते हैं। कांग्रेस निरंतर यह आरोप लगाती आ रही है कि भाजपा EVM के बूते चुनाव जीतती है।अभी हाल में 30 सितंबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि INDIA गठबंधन को ईवीएम के बजाय मत पत्र से मतदान की व्यवस्था बहाल करने की मांग करनी चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि इस बीच जहां कहीं EVM के बजाय बैलेट से मतदान हुए, वहाँ कांग्रेस क्यों बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई है, वहाँ क्यों जनता का विश्वास हासिल करने में असफल रही है?
कांग्रेस का हाथ खाली क्यों?
कांग्रेस खुद आत्म-मंथन करे कि इस बीच चार राज्यों में विधान परिषद की जिन 28 सीटों पर चुनाव हुए वहाँ पार्टी खाता क्यों नहीं खोल पाई है? आखिर वहाँ तो EVM मशीन जैसी कोई हराने वाली चीज नहीं थी, वहाँ तो बैलेट पेपर से मतदान हुए थे? कांग्रेस ने 28 में से 12 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली।क्या कांग्रेस नेतृत्व इस दिशा में विचार करेगा कि जिस कर्नाटक राज्य में पार्टी अभी सत्ता में है, वहाँ भी उसका हाथ खाली क्यों रहा? इसमें गौर करने वाली बात यह भी है कि विधान परिषद की जिन12 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ी उनमें से चार पर उसे पिछली बार जीत मिली थी, लेकिन इस बार वह इन चार सीटों को भी गंवा बैठी।इसका दोष अब किसे दिया जाएगा? सवाल सिर्फ एमएलसी चुनावों में मिली हार का नहीं है, बल्कि इससे पहले इसी अक्टूबर माह को असम के सिलचर नगर निगम का पहला चुनाव भी बैलेट पेपर (मत पत्र) से हुआ था, लेकिन यहाँ भी कांग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। वह कुल 42 वार्ड में से महज दो जगह ही जीत पाई।
EVM को कब तक दोष देते रहेंगे?
राजनीति में हार-जीत का सिलसिला लगा रहता है, लेकिन जनमत को स्वीकार करने के बजाय यदि EVM को ही दोष दिया जाता रहेगा, तो इससे कोई कैसे सहमत हो सकेगा? कांग्रेस नेतृत्व यदि वास्तव में आगामी चुनावों में सफलता हासिल करना चाहता है, तो उसे पार्टी संगठन की मजबूती के लिए काम करना होगा। राज्यों में कांग्रेस नेताओं की अंतर्कलह समय-समय पर समाचार माध्यमों की सुर्खियों में रहती है। कांग्रेस के प्रमुख नेता राहुल गांधी जो कि इंडिया ब्लॉक को मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं, उन्हें अपनी रणनीति पर मंथन की जरूरत है। ठीक है कि SIR आदि से संबंधित मुद्दों को लेकर वे मुखर रहे, लेकिन इसके लिए सर्वोच्च अदालत के सामने शक्ति प्रदर्शन की क्या जरूरत थी?
MLC Election 2026: जन भावनाओं को समझने की जरूरत
लोकतंत्र में मुद्दों पर सत्ता का विरोध करना विपक्ष के नेता का धर्म है, लेकिन इसमें जनभावनाओं का ध्यान भी रखना होता है।राहुल गांधी से व्यापारियों ने मांग की थी कि वे दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शन को भैयादूज तक स्थगित कर दें, तो इसमें उन्हें अड़ियल रवैया अपनाने की क्या जरूरत थी? व्यापारी तो किसी पार्टी विशेष के नहीं हैं? विपक्ष के नेता से उन्होंने कुछ अपेक्षा की थी, तो नेता को उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए था।आखिर लोकतंत्र में प्रधानमंत्री के बाद विपक्ष के नेता को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।यदि कांग्रेस अतीत की गलतियों से सबक लेते हुए आगे की दिशा तय करती है, तो तभी उसका भविष्य है।








