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उमंग सिंघार का आरोप– मध्य प्रदेश का बजट झूठे आंकड़ों और खोखले दावों से भरा

MP Budget umang singhar:

MP Budget umang singhar: मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्ष 2026-27 का वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत किए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा  द्वारा प्रस्तुत किया गया बजट झूठे आंकड़ों और खोखले वादों पर आधारित है। उनके अनुसार यह बजट प्रदेश की जनता को भ्रमित करने वाला दस्तावेज है और वास्तविक स्थितियों से कटा हुआ है।

राजकोषीय घाटे और संसाधनों पर उठाए प्रश्न

सिंघार ने कहा कि स्वयं वित्त मंत्री ने स्वीकार किया है कि प्रदेश का राजकोषीय घाटा 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक होगा। जब सरकार के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, तो घोषित योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था कैसे की जाएगी? उन्होंने बजट को केवल घोषणाओं का संग्रह बताया।

MP Budget umang singhar: किसानों और युवाओं की अनदेखी का आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया था, किंतु बजट में इस संबंध में कोई स्पष्ट नीति, योजना अथवा समय-सीमा का उल्लेख नहीं है। उनके अनुसार किसान आज भी उत्पादन लागत और कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से जुड़े वादे पूरे नहीं हुए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं को नई नियुक्तियों और रोजगार सृजन के ठोस प्रावधानों की अपेक्षा थी, किंतु बजट में इस दिशा में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई। संविदा आधारित नियुक्तियों की बात कही गई है, जिससे रोजगार की स्थिरता पर प्रश्न खड़े होते हैं।

MP Budget umang singhar: कर्मचारियों, वृक्षारोपण और बिजली दरों पर भी सवाल

सिंघार ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि के संबंध में बजट में कोई प्रावधान नहीं है, जो कर्मचारियों के साथ अन्याय है। नर्मदा तट पर पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण की प्रस्तावित योजना पर प्रश्न उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब वित्तीय स्थिति कमजोर है, तो इतनी बड़ी योजना का क्रियान्वयन कैसे संभव होगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली दरों में कमी को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई है, जबकि आम नागरिक महंगे बिलों से परेशान हैं।

विधायक निधि बढ़ाने की मांग की अनदेखी

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की मांग थी कि विधायक निधि में दो करोड़ रुपये की वृद्धि की जाए, ताकि वे अपने क्षेत्रों में विकास कार्य कर सकें। इस मांग की उपेक्षा कर सरकार ने जनप्रतिनिधियों की भावना को आहत किया है। सिंघार ने निष्कर्ष में कहा कि यह बजट विकास का नहीं, बल्कि भ्रम का दस्तावेज है और प्रदेश की जनता समय आने पर इसका उत्तर देगी।

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