MP Bureaucracy Row: मध्य प्रदेश में नेताओं और अधिकारियों के बीच बढ़ते टकराव का मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र लिखकर अधिकारियों के व्यवहार पर चिंता जताई है। DoPT के डिप्टी सेक्रेटरी जीके रजनीश ने कहा है कि अधिकारियों को सांसदों और विधायकों के साथ व्यवहार का तरीका सिखाया जाए और तय प्रोटोकॉल का हर हाल में पालन सुनिश्चित किया जाए।
केंद्र ने जताई सख्ती
केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि जनप्रतिनिधियों के पत्रों का समय पर और विनम्र जवाब देना अनिवार्य है। लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से जवाब भी मांगा गया है।
MP Bureaucracy Row: चार महीने में दूसरी चेतावनी
DoPT ने 4 मई को चार महीने के भीतर दूसरी बार मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। इससे पहले 12 जनवरी 2026 को भी इसी मुद्दे पर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। केंद्र ने मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा था कि इन निर्देशों को जिला स्तर तक हर अधिकारी तक पहुंचाया जाए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने पर दोबारा हस्तक्षेप करना पड़ा।
MP Bureaucracy Row: विधानसभा में उठता रहा मुद्दा
मध्य प्रदेश विधानसभा में विधायक लगातार यह मुद्दा उठाते रहे हैं कि अधिकारियों द्वारा उन्हें उचित प्रोटोकॉल नहीं दिया जाता और उनके पत्रों का जवाब नहीं मिलता। हर सत्र में इस पर चर्चा होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार सीमित रहने के कारण मामला अब केंद्र तक पहुंच गया है।
IAS अधिकारी विवाद भी चर्चा में
हाल ही में जबलपुर में स्मार्ट सिटी के सीईओ और IAS अधिकारी अरविंद शाह से जुड़ा विवाद भी सामने आया था। आरोप है कि राकेश सिंह ने उन्हें अपने बंगले पर बुलाकर अपमानित किया और धमकी दी। हालांकि इस मामले में आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
खबर इण्डिया 360 डिग्री
मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बढ़ते विवाद ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र सरकार अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य से जवाब और सुधार की अपेक्षा कर रही है।
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