MP Love Jihad Cases: ‘लव जिहाद’ शब्द पिछले कई वर्षों से देश की राजनीति और सामाजिक बहस में चर्चा का विषय रहा है। अंतरधार्मिक विवाह, कथित धोखे से शादी और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, ‘लव जिहाद’ भारतीय कानून में अलग से परिभाषित अपराध नहीं है। जबरन, धोखे या लालच के जरिए धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में संबंधित राज्य के धर्मांतरण कानून और अन्य आपराधिक कानून लागू हो सकते हैं।
लव जिहाद क्या है?
‘लव जिहाद’ एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल उन आरोपों के लिए किया जाता है, जिनमें दावा किया जाता है कि किसी व्यक्ति ने प्रेम या शादी के जरिए दूसरे धर्म की महिला को कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया या धोखे से धर्म परिवर्तन कराया। हालांकि, किसी अंतरधार्मिक विवाह को सिर्फ अलग-अलग धर्म होने के आधार पर ‘लव जिहाद’ नहीं कहा जा सकता। किसी मामले में धोखा, दबाव, धमकी, लालच या जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप हैं तो उनकी जांच उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत होती है।
MP Love Jihad Cases: कहां से आया ‘लव जिहाद’ शब्द?
‘लव जिहाद’ शब्द करीब 2009 के आसपास केरल में सार्वजनिक बहस में प्रमुखता से सामने आया। उस समय कुछ संगठनों ने आरोप लगाया था कि मुस्लिम पुरुष प्रेम और शादी के जरिए हिंदू एवं ईसाई महिलाओं का धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। इसके बाद यह शब्द देश के दूसरे हिस्सों में भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बन गया। हालांकि, इसकी कोई सर्वमान्य कानूनी परिभाषा नहीं है।
मध्य प्रदेश में कितने ‘लव जिहाद’ के मामले दर्ज हुए?
मध्य प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर सरकार की ओर से विधानसभा में आंकड़े पेश किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी और कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 15 जुलाई 2025 तक राज्य में 283 मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में बड़ी संख्या अभी अदालतों में लंबित बताई गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 283 में से 197 मामले अदालतों में विचाराधीन थे, जबकि बाकी मामलों में जांच, दोषसिद्धि या बरी होने जैसी अलग-अलग स्थिति थी।
MP Love Jihad Cases: इंदौर में सबसे ज्यादा मामले
उपलब्ध विधानसभा आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में इन मामलों में इंदौर सबसे आगे रहा, जहां 73 मामले दर्ज बताए गए। भोपाल दूसरे स्थान पर था। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आंकड़े उस समय प्रशासन और सरकार द्वारा ‘लव जिहाद’ से जुड़े मामलों के रूप में बताए गए मामलों के हैं। इन्हें पूरे राज्य में अंतरधार्मिक विवाहों की संख्या नहीं माना जा सकता।
मध्य प्रदेश में क्या कहता है धर्मांतरण कानून?
मध्य प्रदेश में जबरन, धोखे, दबाव या अनुचित तरीके से धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए धर्मांतरण संबंधी कानून लागू है। कानून के तहत किसी व्यक्ति को बल, अनुचित प्रभाव, धोखे या अन्य प्रतिबंधित तरीकों से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करना या कराना दंडनीय हो सकता है। यानी कानून का मुख्य आधार किसी व्यक्ति का धर्म या अंतरधार्मिक संबंध नहीं, बल्कि धर्म परिवर्तन के लिए अपनाया गया गैरकानूनी तरीका है।
MP Love Jihad Cases: क्या अंतरधार्मिक शादी अपने आप ‘लव जिहाद’ है?
नहीं। केवल दो अलग धर्मों के लोगों का शादी करना अपने आप में ‘लव जिहाद’ का प्रमाण नहीं है। किसी मामले में यदि धोखे से पहचान छिपाने, जबरन धर्म परिवर्तन, धमकी या लालच जैसे आरोप हैं तो पुलिस और अदालत उपलब्ध सबूतों के आधार पर कार्रवाई करती हैं।
देश में ‘लव जिहाद’ के बढ़ा रहे है मामले ?
देशभर में ‘लव जिहाद’ काफी तेज के साथ फैला रहा है . इसलिए पूरे भारत के लव जिहाद के मामलों काफी तेजी के साथ बढ़ रही है . अलग-अलग राज्यों में धर्मांतरण कानूनों या अन्य आपराधिक कानूनों के तहत दर्ज मामलों के आंकड़े अलग हो सकते हैं।
MP Love Jihad Cases: क्यों विवादित रहा है यह शब्द?
‘लव जिहाद’ को लेकर दो अलग-अलग मत हैं। एक पक्ष का कहना है कि धोखे या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन के मामलों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि बिना ठोस प्रमाण के अंतरधार्मिक रिश्तों को ‘लव जिहाद’ कहना गलत हो सकता है। इसी वजह से इस तरह के मामलों की रिपोर्टिंग में आरोप और साबित तथ्य के बीच अंतर रखना जरूरी है। ‘लव जिहाद’ एक राजनीतिक और सामाजिक रूप से चर्चित शब्द है, लेकिन यह अपने आप में कोई अलग कानूनी अपराध नहीं है। मध्य प्रदेश में 2020 से 15 जुलाई 2025 तक 283 मामले दर्ज होने की जानकारी सरकार ने विधानसभा में दी थी।
सीएम ने दिया यह जवाब
मुख्यमंत्री ने जवाब में बताया कि मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021, 27 मार्च, 2021 को लागू हुआ था। यह कानून राज्य को जबरन या धोखे से किए गए धर्म परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देता है। खासकर उन मामलों में जहां महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं। इन मामलों की जांच के लिए पुलिस मुख्यालय ने 4 मई को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इसका मकसद है कि कानून को सख्ती से लागू किया जा सके।
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