MP NEWS: स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन वर्षीय अनिका शर्मा के इलाज के लिए 7.5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटने के बावजूद उपचार शुरू नहीं होने पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली को 23 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
इलाज में देरी पर अदालत नाराज
जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान एम्स की ओर से बार-बार जवाब दाखिल करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जीवन से जुड़े ऐसे मामलों में अब और इंतजार स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
MP NEWS: 9.5 करोड़ का इलाज, 7.5 करोड़ जनसहयोग से जुटे
याचिका के अनुसार अनिका के इलाज पर करीब 9.5 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। केंद्र सरकार ने 50 लाख रुपये की सहायता मंजूर की है, जबकि सामाजिक संस्थाओं और आम लोगों के सहयोग से 7.5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है। उपचार शुरू करने के लिए अब भी करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये की जरूरत है।
इनवॉइस के इंतजार में अटका इलाज
परिजनों का कहना है कि एम्स प्रशासन ने केंद्र से स्वीकृत सहायता राशि की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही जीवनरक्षक इंजेक्शन उपलब्ध कराने वाली कंपनी से इनवॉइस मंगाने की बात कही है। इनवॉइस नहीं मिलने से जनसहयोग से जुटाई गई राशि भी जारी नहीं हो पा रही, जिससे इलाज शुरू होने में लगातार देरी हो रही है।
MP NEWS: संवेदनशीलता से निर्णय लेने की नसीहत
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता चंचल गुप्ता और लखन शर्मा ने अदालत को बताया कि पिछली सुनवाइयों में भी केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एम्स की ओर से लगातार समय मांगा जाता रहा है। इस पर हाई कोर्ट ने एम्स को 23 जुलाई तक विस्तृत जवाब देने के निर्देश देते हुए कहा कि दुर्लभ बीमारियों से जुड़े मामलों में संबंधित संस्थानों को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
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