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‘पेपर लीक बर्दाश्त नहीं’- राज्यसभा में बिल पेश, जितेंद्र सिंह ने दोहराई सरकार की नीति और कहा कि जीरो टॉलरेंस नीति

NEET PAPER LEAK: केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पेश किया। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संशोधन पेपर लीक जैसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए लाया गया है। उन्होंने दोहराया कि सरकार पेपर लीक के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।

2024 के कानून को और सख्त बनाया गया

राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2024 में लागू किया गया कानून स्वतंत्र भारत का अपनी तरह का पहला कानून था। अब उसमें संशोधन कर इसे और अधिक कठोर तथा प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

NEET PAPER LEAK: कड़ी होगी सजा और जुर्माना

मंत्री ने बताया कि संशोधन के तहत पेपर लीक के दोषियों के लिए सजा और आर्थिक दंड दोनों बढ़ाए गए हैं। पहले जहां तीन से पांच वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान था, वहीं अब इसे बढ़ाकर पांच से दस वर्ष की कैद और 50 लाख रुपये तक जुर्माना किया गया है।

परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं पर भी कार्रवाई सख्त होगी। अब उनके लिए पांच करोड़ रुपये तक जुर्माना और आठ वर्ष तक परीक्षा कराने पर प्रतिबंध लगाया जा सकेगा।

5 महीने में जांच और फैसला

जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधित कानून के तहत पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने में पूरी करनी होगी, जबकि मुकदमे का निपटारा तीन महीने के भीतर किया जाएगा। इसके लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रावधान किया गया है, ताकि वर्षों तक मामले लंबित न रहें।

NEET PAPER LEAK: पेपर लीक किसी एक राज्य की समस्या नहीं

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य या किसी एक राजनीतिक दल के शासन तक सीमित नहीं रही हैं। उन्होंने रेलवे भर्ती बोर्ड, एम्स, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा और अन्य कई परीक्षाओं में पूर्व में सामने आए मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ऐसी घटनाओं पर स्थायी रोक लगाने के लिए कानून को मजबूत कर रही है।

एनटीए पर भी दी सफाई

जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) बनाने का विचार वर्षों पहले आया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने इस व्यवस्था को लागू कर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि हालिया पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और मुकदमे की सुनवाई भी शुरू हो गई है। सरकार का उद्देश्य दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाना और छात्रों की मेहनत की रक्षा करना है।

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