NEET UG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के उस फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द कर देशभर में दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। याचिका में लगभग 22 लाख अभ्यर्थियों के हितों का हवाला देते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग ठुकराई
जब मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया, तो याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कथित पेपर लीक से असंबंधित लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि, सीजेआई ने कहा कि नीट-यूजी 2026 से जुड़ी याचिकाओं पर पहले से ही जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई कर रही है और यह याचिका भी जुलाई में उसी बेंच के समक्ष रखी जाएगी।
NEET UG 2026: याचिका में परीक्षा रद्द करने के फैसले को मनमाना
जनहित याचिका में एनटीए के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा को पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। याचिका में कहा गया है कि जांच और दोषियों पर कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन परीक्षा एजेंसी की प्रशासनिक विफलताओं का खामियाजा लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए।
कहा- गड़बड़ी सीमित क्षेत्रों तक थी
याचिका में दावा किया गया है कि सीबीआई की जांच से अब तक यह सामने आया है कि गड़बड़ियां कुछ विशेष संगठित नेटवर्क और सीमित क्षेत्रों तक ही थीं, न कि पूरी राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली प्रभावित हुई थी। ऐसे में पूरे देश में परीक्षा रद्द करना और दोबारा परीक्षा कराना उचित नहीं है।
NEET UG 2026: शैक्षणिक और आर्थिक बोझ का दावा
याचिकाकर्ता ने कहा कि परीक्षा रद्द करने के फैसले से लगभग 22 लाख छात्रों को दोबारा राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है। इससे विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव बढ़ा है, आर्थिक बोझ पड़ा है और मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।
राष्ट्रीय परीक्षाओं में तकनीकी और संस्थागत सुधारों की भी मांग
याचिका में केवल री-एग्जाम को चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की मांग भी की गई है। इसमें स्वतंत्र निगरानी तंत्र, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्न पत्र, बायोमेट्रिक सत्यापन और एआई आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने की मांग शामिल है।
NEET UG 2026: सीबीटी मोड में परीक्षा कराने से कर चुका है इनकार
इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में कराने की मांग भी ठुकरा दी थी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने कहा था कि परीक्षा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और अंतिम समय में प्रारूप बदलना उचित नहीं होगा।
एनटीए ने परीक्षार्थियों को भरोसा दिलाया
इस बीच एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कथित लीक पेपर बेचने वाले गिरोहों से सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि री-एग्जाम का कोई पेपर लीक नहीं हुआ है।
NEET UG 2026: सुरक्षित ढंग से पहुंचाए जाएंगे प्रश्नपत्र
एनटीए के अनुसार भारतीय वायुसेना परीक्षा सामग्री की सुरक्षित ढुलाई में सहयोग कर रही है, ताकि प्रश्नपत्रों को समय पर और सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जा सके। एजेंसी का दावा है कि 37 दिनों के भीतर पुनर्परीक्षा कराकर प्रवेश प्रक्रिया को जल्द सामान्य किया जाएगा।
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