Breaking News
Home » एक्सप्लनेर » राहुल गांधी के साथ मार्च, पुलिस को चकमा; कौन हैं नेहा बोरा, कैसे बनीं आंदोलन का चेहरा?

राहुल गांधी के साथ मार्च, पुलिस को चकमा; कौन हैं नेहा बोरा, कैसे बनीं आंदोलन का चेहरा?

नेहा बोरा
नेहा बोरा

Neha Bora: 11 अक्टूबर को दोपहर करीब 1 बजे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली के आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया। इसके बाद सुरक्षाकर्मी सक्रिय हो गए। दोपहर करीब 2:15 बजे तक वहां तनाव का माहौल बन गया और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।इसी दौरान भीड़ में एक युवती दिखाई दी, जिसका पहनावा नेहा बोरा जैसा था। उसने गले में स्टॉल डाल रखा था, आंखों पर गोल काले फ्रेम का चश्मा पहना था और चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था। पुलिस ने उसे बाजू और कंधे से पकड़कर खींचना शुरू किया। मौके पर मौजूद मीडिया ने खबर चला दी कि नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया गया है।

Neha Bora: पुलिस को चकमा देकर चर्चा में आईं नेहा बोरा

जब कैमरों ने युवती के चेहरे को करीब से दिखाया, तो पता चला कि वह नेहा नहीं थीं। दरअसल, नेहा उस जगह मौजूद ही नहीं थीं। कुछ देर बाद उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह पुलिस को चकमा देकर कनॉट प्लेस पहुंच चुकी थीं और वहां पुलिसकर्मियों के आगे-आगे दौड़ती नजर आईं।पुलिस से बचने, हिरासत में लिए जाने के बाद भी नारे लगाने, बैरिकेड्स पर चढ़ने और राहुल गांधी के साथ मार्च करने जैसी गतिविधियों के चलते नेहा बोरा मौजूदा विरोध प्रदर्शनों में जेन-जी के चर्चित चेहरों में शामिल हो गई हैं। आखिर नेहा बोरा कौन हैं, उनकी राजनीतिक यात्रा कैसी रही है और उनकी प्रदर्शन करने की रणनीति CJP की रणनीति से किस तरह अलग है? इसे विस्तार से समझते हैं।

Neha Bora: खटीमा से दिल्ली तक का सफर

29 साल की नेहा बोरा उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। उनके पिता सेना में नौकरी करते थे, इसलिए बचपन में उन्हें कई शहरों में रहने का मौका मिला। उन्होंने दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई पश्चिम बंगाल से की। इसी दौरान उन्होंने चारु मजूमदार, पाब्लो नेरूदा और अरुंधति रॉय जैसे वामपंथी विचारकों और लेखकों को पढ़ना शुरू किया।लेखक और वामपंथी विचारक अरुंधति रॉय के साथ नेहा बोरा।

नेहा बोरा
नेहा बोरा

नेहा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और इसके बाद डॉ. बी. आर. आंबेडकर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान उनकी दिलचस्पी थिएटर में बढ़ी। वह संगवारी थिएटर ग्रुप से भी जुड़ीं।नेहा का कहना है कि जब शिक्षा व्यवस्था से वह ज्ञान नहीं मिल पाता, जो मिलना चाहिए, तो लोग उसे दूसरी जगह तलाशने लगते हैं। थिएटर के माध्यम से उन्हें रचनात्मक लोगों से मिलने और अलग-अलग तरह की चीजें सीखने का मौका मिला।

किताबों से निकलकर छात्र राजनीति तक पहुंचीं

थिएटर से जुड़ने के दौरान ही नेहा छात्र संगठन AISA के संपर्क में आईं। वर्ष 1990 में स्थापित यह संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी CPI (ML) से जुड़ा हुआ है।नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान नेहा ने अपने आसपास के कई छात्रों को सड़कों पर उतरते और भाषण देते देखा। उनके मुताबिक, जिन विचारों को वह पहले केवल किताबों, फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री के जरिए जानती थीं, छात्र अब उन्हें जमीनी आंदोलनों और राजनीति का हिस्सा बना रहे थे।

वर्ष 2021 में नेहा ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में दाखिला लिया। वह यहां स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज विषय से पीएचडी कर रही हैं। जेएनयू पहुंचने के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ीं और वह AISA के साथ मिलकर प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने लगीं।दिसंबर 2024 में उन्हें AISA का अध्यक्ष चुना गया।

Neha Bora: प्रदर्शन के बाद तिहाड़ जेल भी जाना पड़ा

26 फरवरी 2026 को जेएनयू के कुलपति के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस ने नेहा को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। 1 मार्च को उन्हें रिहा किया गया।तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद नेहा बोरा और जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारी।

नेहा अपने लिए अंग्रेजी के ‘शी’ की जगह ‘देय/देम’ (वे/उन्हें) सर्वनाम का इस्तेमाल करती हैं। लैंगिक समानता और एलजीबीटीक्यू अधिकारों का समर्थन करने वाले कुछ लोग अपनी पहचान व्यक्त करने के लिए ऐसे सर्वनाम चुनते हैं।नेहा के पिता अब रिटायर हो चुके हैं। बताया जाता है कि उन्हें अपनी बेटी का वामपंथी राजनीति से जुड़ना पसंद नहीं है। इसी वजह से वह करीब 10 साल से नेहा से बात नहीं कर रहे हैं।

एक इंटरव्यू में नेहा ने बताया था कि जब उनके पिता को पहली बार पता चला कि वह वामपंथी विचारधारा से जुड़ी हैं, तो उन्होंने कहा था कि उनके समुदाय के लोगों को मारा जाता है और ये लोग ही उन्हें मारते हैं। उन्होंने नेहा से सवाल किया था कि वह ऐसे लोगों के साथ कैसे जा सकती हैं।

नेहा बोरा
नेहा बोरा
23 दिन की भूख हड़ताल से भी चर्चा में आईं

बीते दिनों नेहा ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। अनशन के 22वें दिन उनकी मां लीला बोरा उनसे मिलने दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचीं।नेहा का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में उनकी मां को सरकार के पक्ष में पेश किए जाने वाले दावों में कमियां दिखाई देने लगी हैं। वह उनसे लगातार बातचीत करने की कोशिश करती हैं और उन्हें उम्मीद है कि समय के साथ उनकी मां की सोच में भी बदलाव आ सकता है।

Neha Bora: राष्ट्रीय स्तर पर कैसे बनी पहचान?

जेएनयू परिसर में नेहा पहले से सक्रिय थीं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान जून-जुलाई में नीट पेपर लीक के मुद्दे पर हुए प्रदर्शनों के दौरान मिली।28 जून को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने CJP के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की। इसके बाद नेहा और AISA के कुछ अन्य नेता भी उनके साथ आंदोलन में शामिल हो गए। हालांकि, उस समय आंदोलन का मुख्य ध्यान सोनम वांगचुक और CJP पर था, लेकिन नेहा अपने भाषणों और भूख हड़ताल के जरिए लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रहीं।18 जुलाई को दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को अस्पताल ले गई।

इसके दो दिन बाद, 20 जुलाई को अभिनेत्री शबाना आजमी, योगेंद्र यादव, सांसद मनोज झा और अभिनेता प्रकाश राज ने नेहा की भूख हड़ताल खत्म करवाई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ।20 जुलाई को शबाना आजमी, योगेंद्र यादव, मनोज झा और प्रकाश राज ने नेहा की भूख हड़ताल समाप्त करवाई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा।इसके बाद नेहा देश के अलग-अलग शहरों में पहुंचीं, जहां छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इन गतिविधियों के जरिए उन्होंने छात्र नेता और जेन-जी की प्रतिनिधि के रूप में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की।

रांची में स्याही फेंकने की घटना

अगस्त में नेहा झारखंड की राजधानी रांची पहुंचीं। वहां वह झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों में शामिल हुईं।इसी दौरान एक व्यक्ति ने कथित तौर पर उन पर स्याही फेंक दी। इसके बाद नेहा ने स्याही से सनी अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े लोगों ने उन पर स्याही फेंकी है।उन्होंने लिखा कि विरोधियों के लिए स्याही उन्हें शर्मिंदा करने का तरीका है, लेकिन वे इसी स्याही से अपना भविष्य लिखेंगी।

Neha Bora: योगी आदित्यनाथ पर बयान के बाद दर्ज हुईं FIR

14 सितंबर को नेहा जेन-जी महाजुटान में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर पहुंचीं। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गुंडा और दंगाई कहा।नेहा ने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ ने बुद्ध और कबीर से जुड़े गोरखपुर को दंगों की भूमि में बदल दिया है। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की गईं।

बैरिकेड पर चढ़कर नारे लगाने से फिर चर्चा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर AISA ने 2 अक्टूबर से दिल्ली में प्रदर्शन शुरू किया। 4 अक्टूबर को अशोक रोड पर प्रदर्शन के दौरान नेहा अचानक पुलिस के बैरिकेड पर चढ़ गईं। वहां उन्होंने मुट्ठी उठाकर नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।बैरिकेड पर चढ़कर नारे लगाने के बाद पुलिस ने नेहा को हिरासत में लिया।एक इंटरव्यू में नेहा ने कहा कि उन्होंने वामपंथी विचारधारा से जुड़े दूसरे छात्र कार्यकर्ताओं को भी इसी तरह विरोध करते देखा है। उनके मुताबिक, अंतर केवल इतना है कि इस बार कैमरे उन पर ज्यादा केंद्रित हैं, इसलिए लोगों को उनकी गतिविधियां अलग दिखाई दे रही हैं।

Neha Bora: राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ मार्च

12 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। इस दौरान नेहा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ बस में बैठकर मार्च में शामिल होने पहुंचीं और दोनों नेताओं के साथ प्रदर्शन किया।इस मार्च से पहले राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मामले पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से बात करना चाहते थे, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला।

नेहा बोरा की छवि पर क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक?

कॉलमिस्ट सुधीर जैन के मुताबिक, नेहा बोरा ने एक निडर छात्र नेता की छवि बनाई है। उनका मानना है कि नेहा ने पुलिस की कार्रवाई का सामना साहस और समझदारी से किया है, जिससे कई छात्र उनसे प्रभावित हो रहे हैं। जैन के अनुसार, नेहा के पास अब अपने प्रभाव और राजनीतिक दायरे को बढ़ाने का अवसर है।राजनीतिक कॉलमिस्ट उर्वीश कोठारी का मानना है कि नेहा में अलग तरह का उत्साह है और वह संघर्ष करने वाली नेता हैं। उनके अनुसार, नेहा ने अपने साहस, नेतृत्व और व्यक्तित्व के दम पर पार्टी की सीमाओं से आगे अपनी पहचान बनाई है। हालांकि, कोठारी का कहना है कि उनके समर्थकों को उन्हें नायक या मसीहा का दर्जा देने के बजाय एक साहसी महिला के रूप में देखना चाहिए।

Neha Bora: नेहा बोरा और CJP की प्रदर्शन रणनीति में क्या अंतर है?

नेहा बोरा और CJP से जुड़े दीपके तथा उनके साथियों के प्रदर्शनों के तरीके में इस बार तीन प्रमुख अंतर दिखाई दिए हैं।

1. CJP पहले बताता है कार्यक्रम, नेहा अपनाती हैं अचानक प्रदर्शन का तरीका

CJP अपने आंदोलन की तारीख, कार्यक्रम और प्रदर्शन के तरीके की जानकारी पहले ही सोशल मीडिया पर साझा कर देता है। इससे पुलिस को पहले से तैयारी करने और प्रदर्शनकारियों को रोकने का मौका मिल जाता है। 10 अक्टूबर को भी दीपके को फ्लाइट से हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई थी।इसके विपरीत, नेहा अपनी प्रदर्शन रणनीति की पूरी जानकारी पहले से सार्वजनिक नहीं करतीं। वह अचानक प्रदर्शन करने और परिस्थितियों के अनुसार अपनी योजना बदलने का तरीका अपनाती हैं।उदाहरण के तौर पर, 10 अक्टूबर को जब पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को रोका, तो नेहा और AISA ने तुरंत करीब 10 किलोमीटर दूर दिल्ली हाट पहुंचने की अपील कर दी।

Neha Bora
नेहा बोरा
2. नेहा पुलिस से बचने के लिए जगह बदलती हैं, जबकि दीपके का तरीका अलग है

नेहा कई बार भीड़ में शामिल होकर पुलिस की नजरों से बचने की कोशिश करती हैं। वह जरूरत पड़ने पर प्रदर्शन की जगह भी बदल देती हैं, जिससे पुलिस के लिए उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।11 अक्टूबर को आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर प्रदर्शन का ऐलान करने के बाद उनका कनॉट प्लेस पहुंच जाना इसका उदाहरण है।

हालांकि, नेहा ने बाद में उस प्रदर्शनकारी के साथ अपनी तस्वीर साझा की, जिसे पुलिस ने गलती से उनकी जगह हिरासत में ले लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह घटना किसी खास रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि संयोग थी।नेहा ने उस युवती के साथ तस्वीर साझा की, जिसे आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन पर गलती से उनकी जगह हिरासत में लिया गया था।दूसरी ओर, दीपके की रणनीति में पुलिस को चकमा देकर अचानक रास्ता बदलने जैसे तरीके प्रमुख रूप से दिखाई नहीं देते।

3. नेहा लगातार प्रदर्शन करती हैं, जबकि CJP अगली रणनीति पर ध्यान देता है

नेहा को पुलिस हिरासत में लेती है और कुछ घंटों बाद छोड़ देती है। इसके बाद वह फिर अगले दिन प्रदर्शन में शामिल हो जाती हैं। इस तरह वह आंदोलन को रोकने के बजाय लगातार अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाए रखने की कोशिश करती हैं।11 अक्टूबर को नेहा ने पुलिस की बस के अंदर से इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि जिन लोगों को पुलिस ने रोक दिया है, वे जहां हैं, वहीं से प्रदर्शन शुरू कर दें।

इसके उलट, दीपके और उनके साथी हिरासत से रिहा होने के बाद आगे के प्रदर्शन की तारीख और रणनीति तय करने पर ध्यान देते हैं। वे समर्थकों से दिल्ली में रुकने और आंदोलन के अगले ऐलान का इंतजार करने के लिए कहते हैं।CJP का आंदोलन कानूनी प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं पर भी केंद्रित रहता है। इसके साथ ही संगठन लगातार यह बात कहता रहा है कि विरोध प्रदर्शन को देश के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंचाया जाना चाहिए।

Neha Bora: नेहा और दीपके की तुलना पर क्या हुआ?

7 अक्टूबर को CJP के नेताओं और नेहा बोरा ने एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर नेहा को दीपके से ज्यादा परिपक्व बताने वाली प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। दीपके ने भी इस आकलन से सहमति जताई।हालांकि, नेहा ने इस तरह की तुलना पर जोर देने के बजाय दोनों पक्षों के बीच एकता बनाए रखने की बात कही। उनका कहना था कि आपसी तुलना करने के बजाय सभी को मिलकर काम करना चाहिए।