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पीएम मोदी के आह्वान का ‘मर्म’, कैसे बेहतर समझ सकते हैं भाजपा कार्यकर्ता?

Opinion: पीएम मोदी के आह्वान का 'मर्म', कैसे बेहतर समझ सकते हैं भाजपा कार्यकर्ता?
Opinion: भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे वोट बैंक की राजनीति के बजाय सामाजिक सुधार और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए काम करें। ‘एकात्म मानववाद’ और ‘अंत्योदय’ जैसे सिद्धांतों के प्रतिपादक पंडित दीनयाल उपाध्याय की जयंती पर इस आह्वान के गहरे मायने हैं।पीएम का साफ संदेश है कि राजनीति में रचनात्मक भूमिका निभानी है, तो इसके लिए सिर्फ वोट की राजनीति पर्याप्त नहीं है, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बताए मार्ग का अनुसरण करना होता है।

भाजपा कार्यकर्ताओं को पीएम का साफ संदेश

पंडित दीनदयाल उपाध्याय बेशक 1963 का जौनपुर उपचुनाव स्थानीय समीकरणों के कारण हार गए थे, लेकिन उन्होंने अपने उसूलों के विरुद्ध जाकर चुनाव प्रचार करना स्वीकार नहीं किया। उन्हें सिर्फ राष्ट्रीय व सैद्धांतिक मुद्दों पर चुनाव लड़ना उचित लगा। उन्हें दृढ़ विश्वास था कि चुनाव जीतना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना कि देश के विकास की सोच रखना।उनके चिंतन ने राष्ट्र के सामाजिक, औद्योगिक और आर्थिक विकास की कल्पना करने वाले राजनेताओं के लिए भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया। उन्हें समाज की अंतिम पंक्ति में सबसे पीछे खड़े गरीब व्यक्ति के प्रति न्याय करने और उस तक विकास की किरणें पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यकर्ताओं से न सिर्फ पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सेवा, संतुलन, संयम, समन्वय, सकारात्मकता, संवेदनशीलता और संवाद के सात सिद्धांतों को अपनाने का आह्वान किया, बल्कि महात्मा गांधी का उदाहरण देकर कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को समाज की बुराइयों के खिलाफ लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।

Opinion: समाज सेवा के रास्ते भी सफलता

पीएम की इस बात में दम है कि कार्यकर्ता समाज के प्रति अपना दायित्व समझें।अपने देश में गांधी के अलावा लोकनायक जयप्रकाश नारायण और राममनोहर लोहिया जैसे तमाम ऐसे राजनेता हुए हैं, जो आजीवन समाज के प्रति समर्पित रहे और उन्होंने राजनीति में भी बड़े बदलाव किये।नानाजी देशमुख ने तो सक्रिय राजनीति छोड़कर दीनदयाल अनुसंधान संस्थान (DRI) के माध्यम से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में जल संरक्षण, जैविक खेती और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर सैकड़ों पिछड़े गांवों को आत्मनिर्भर बनाया।विश्व स्तर पर देखें तो तमाम ऐसे प्रसिद्ध राजनेता हुए जो समाज सेवा की पृष्ठभूमि से निकलकर आगे बढ़े।मसलन, नेल्सन मंडेला दशकों के संघर्ष और समाज सेवा के बाद दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने, तो बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से पहले गरीबों व वंचितों को उनके अधिकार दिलाने और उनका जीवन स्तर सुधारने के लिए समर्पित रहे। साफ है कि समाज सेवा के रास्ते भी से ऊंचे राजनीतिक मुकाम हासिल किये जा सकते हैं।

बुराइयों के खिलाफ व्यापक मुहिम

अब देखना है कि भाजपा कार्यकर्ता प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर कितना या किस स्तर पर अमल कर पाते हैं।हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर राजनीतिक कार्यकर्ता समाज सेवा से बहुत ऊंचे मुकाम हासिल कर ही ले, सबकी अलग-अलग क्षमताएं और परिस्थितियां होती हैं,  लेकिन कर्म का फल तो स्वत: मिलता है। समाज के प्रति समर्पण भाव से व्यक्ति कुछ न कुछ प्रतिष्ठा अवश्य हासिल करता है। प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं को सामाजिक बुराइयों से लड़ने के लिए प्रेरित किया है।भाजपा भी एक आदर्श समाज के निर्माण और सामाजिक समरसता की बात करती रही है।ऐसे में कार्यकर्ता समाज में व्याप्त भेदभाव, दहेज प्रथा, भाई-भतीजाबाद, भ्रष्टाचार, अंधविश्वास, नशा जैसी तमाम बुराइयों के खिलाफ व्यापक मुहिम छेड़ सकते हैं। ये बुराइयां खरपतवार की तरह उगती रही हैं। देश में कड़े कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद यदि आज भी कन्या भ्रूण हत्या और दहेज हत्या जैसी खबरें सुनने को मिल जाएं, तो आश्चर्यजनक है।भाजपा कार्यकर्ता इस बारे में समाज को जागरुक कर सकते हैं।वे युवा पीढ़ी को बता सकते हैं कि मां-बाप किसी पुराने फर्नीचर की तरह वृद्धाश्रम में एडजस्ट करने की वस्तु नहीं, बल्कि घर की शोभा होते हैं। 

Opinion: जनता को जागरूक करें

भाजपा कार्यकर्ता सुदूर ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों को केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की तमाम कल्याणकारी योजनाओं से अवगत करा सकते हैं। उन्हें बता सकते हैं कि वे कौन-कौन सी योजनाओं का लाभ कैसे उठा सकते हैं? इसके लिए उन्हें क्या औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी? आज भी बहुत से लोगों को अपने हित की योजनाओं की जानकारी नहीं होती। इसके लिए कार्यकर्ता गांवों और कस्बों में शिविरों का आयोजन कर लोगों से सीधा संवाद कर सकते हैं।इस संवाद के जरिये वे समझ सकेंगे कि लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से क्या समस्याएं हो रही हैं। वे इन समस्याओं के समाधान की दिशा में संबंधित प्रशानिक अधिकारियों या जनप्रतिनिधियों का ध्यान भी आकर्षित कर पाएंगे।’अंत्योदय’ की मूल भावना भी तो यही है।समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की हर कोशिश राष्ट्र के विकास में अहम साबित होती है।यही पीएम मोदी के आह्वान का ‘मर्म’ भी है।