Palani Temple Land Scam: तमिलनाडु के दिंडीगुल जिले में स्थित प्रसिद्ध पलनी मुरुगन मंदिर की जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश के मामले में जांच कर रही CB-CID ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए मंदिर की पार्किंग वाली जमीन को अपने नाम करा लिया।जांच एजेंसी के मुताबिक, इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब 100 करोड़ रुपये है, लेकिन आरोपियों ने इसे केवल 2 करोड़ रुपये में रजिस्टर करवाने की कोशिश की थी।
100 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में बढ़ी कार्रवाई
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान 60 वर्षीय वेल्लईथुरई के रूप में हुई है, जो तिरुपुर जिले के मडाथुकुलम तालुक के पप्पनकुलम निवासी हैं। दूसरे आरोपी 65 वर्षीय अनवरदीन दिंडीगुल जिले के पलनी तालुक के गौंडनकुलम, ACC रोड के रहने वाले हैं। वहीं तीसरे आरोपी 56 वर्षीय मुरुगदास विल्लुपुरम जिले के सलामेडु, कामराजर नगर 2nd क्रॉस स्ट्रीट के निवासी हैं।CB-CID ने तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 336(3), 340(2), 49 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है।
मंदिर की जमीन की रजिस्ट्री हुई रद्द
मामला सामने आने के बाद तमिलनाडु सरकार ने विवादित जमीन की रजिस्ट्री को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही उस समय ड्यूटी पर मौजूद सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंडन को निलंबित कर दिया गया।CB-CID की टीम ने बीते मंगलवार को जस्टिन मणिकंडन से भी कई घंटों तक पूछताछ की। फिलहाल 100 करोड़ रुपये के इस कथित जमीन घोटाले की जांच जारी है।
मदुरै के मीनाक्षी मंदिर मामले में भी FIR
वहीं, मदुरै के प्रसिद्ध अरुलमिगु मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर से जुड़े एक अन्य मामले में भी कार्रवाई की गई है। मदुरै सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने मंदिर के जॉइंट कमिश्नर की शिकायत के आधार पर 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने मदुरै के चोक्कीकुलम इलाके में स्थित मंदिर की एक कीमती संपत्ति के पट्टे को धोखाधड़ी से ट्रांसफर करने की साजिश रची।इसके अलावा, आरोपियों पर अवैध तरीके से मॉर्गेज डीड और पावर ऑफ अटॉर्नी के दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन कराने का भी आरोप है।
राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव का आरोप
जांच के अनुसार, यह संपत्ति साल 1930 में बनाई गई एक रजिस्टर्ड वसीयत के जरिए मंदिर को दान में दी गई थी। इसका उद्देश्य मंदिर की चैरिटी और धार्मिक सेवाओं के कार्यों को आगे बढ़ाना था।जांच अधिकारियों का आरोप है कि कुछ निजी लोगों ने राजस्व विभाग और सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के पूर्व अधिकारियों के साथ मिलकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया, ताकि अवैध लेन-देन को पूरा किया जा सके।
इससे पहले तमिलनाडु के मदुरै में हिंदू समुदाय ने उस समय बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया था, जब हिंदुओं की पवित्र पहाड़ी को कथित तौर पर वक्फ की संपत्ति बताया जा रहा था। इस मुद्दे को लेकर इलाके में काफी विरोध देखने को मिला था।
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