Home » राष्ट्रीय » 5 दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में बढ़े नए रेट

5 दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में बढ़े नए रेट

Petrol Diesel Price Hike: देश में मंगलवार से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। यह बढ़ोतरी एक हफ्ते से भी कम समय में दूसरी बार हुई है। इससे पहले 15 मई को पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी, जिससे आम लोगों पर पहले ही महंगाई का दबाव बढ़ चुका था।

अलग-अलग शहरों में नए दाम

नई कीमतों के अनुसार भोपाल में अब पेट्रोल 110.75 रुपए प्रति लीटर और डीजल 95.91 रुपए प्रति लीटर हो गया है। वहीं इंदौर और जबलपुर में पेट्रोल 110.79 रुपए प्रति लीटर, ग्वालियर में 110.69 रुपए और उज्जैन में 111.27 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। डीजल की बात करें तो उज्जैन में इसकी कीमत 96.40 रुपए प्रति लीटर है, जबकि भोपाल में 95.91 रुपए, इंदौर में 95.97 रुपए, जबलपुर में 95.98 रुपए और ग्वालियर में 95.86 रुपए प्रति लीटर हो गई है।

Petrol Diesel Price Hike

अन्य चीजों पर भी पड़ेगा असर

पेट्रोल और डीजल महंगे होने का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजमर्रा की कई चीजें भी महंगी हो सकती हैं। ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां और राशन की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा किसानों को ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने में ज्यादा खर्च करना पड़ेगा, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और इसका असर अनाज की कीमतों पर भी पड़ेगा। साथ ही बस, ऑटो और स्कूल बसों के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Petrol Diesel Price Hike: कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इससे तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया और नुकसान की भरपाई के लिए उन्होंने कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह तेजी बनी रहती है, तो आगे भी कीमतें बढ़ सकती हैं।

कैसे तय होती है ईंधन की कीमत

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई चरणों से गुजरकर तय होती हैं, जिससे इसकी अंतिम कीमत बेस प्राइस से काफी ज्यादा हो जाती है। सबसे पहले कच्चे तेल की कीमत तय होती है, जिसे भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% विदेशों से आयात करता है। इसके बाद रिफाइनरी में तेल को साफ कर पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है, जिसमें प्रोसेसिंग लागत और कंपनियों का मुनाफा जुड़ता है। फिर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस लगाती है, जो पूरे देश में समान होता है। इसके बाद डीलर का कमीशन जोड़ा जाता है और अंत में राज्य सरकार अपने हिसाब से वैट (VAT) लगाती है। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग होती हैं।

पड़ोसी देशों में पहले ही बढ़े दाम

सरकार पहले यह कहती रही थी कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसके चलते पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 15% से 20% तक बढ़ चुकी थीं, लेकिन भारत में अब तक इनका असर सीधे तौर पर नहीं डाला गया था।

2024 से कीमतें थीं स्थिर

मार्च 2024 से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ था। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सरकार ने 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर लोगों को राहत दी थी। हालांकि तकनीकी रूप से तेल कंपनियां हर दिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक कारणों की वजह से लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखी गई थीं।

तेल कंपनियों को हो रहा था भारी नुकसान

सरकार के अनुसार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से घाटे में चल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि इन कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने लगभग 30,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था।

सरकार ने पहले टैक्स में दी थी राहत

कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने पहले एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपए से घटाकर 3 रुपए प्रति लीटर कर दी गई थी, जबकि डीजल पर यह 10 रुपए से घटाकर शून्य कर दी गई थी। इससे पहले पेट्रोल पर कुल एक्साइज ड्यूटी 21.90 रुपए थी, जो घटकर 11.90 रुपए रह गई थी। वहीं डीजल पर यह 17.8 रुपए से घटकर 7.8 रुपए प्रति लीटर हो गई थी। सरकार का यह कदम कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए उठाया गया था।

पीएम मोदी की सलाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों से पेट्रोलियम उत्पादों का सोच-समझकर उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी और अंतरराष्ट्रीय तनाव के नकारात्मक प्रभाव भी कम होंगे।

ये भी पढ़े: बंगाल में ‘डबल इंजन सरकार’ का बड़ा ऐलान, भ्रष्टाचार और महिला सुरक्षा पर बनेगी दो कमेटियां

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments