PM Kisan Eligibility: गांव से लेकर शहर तक हर किसान के मन में एक ही सवाल है। PM Kisan की 6000 रुपये सालाना वाली किस्त का लाभ असल में किसे मिलता है? खासकर वे लोग, जो दूसरे की जमीन पर खेती करते हैं या दिहाड़ी पर खेत में काम करते हैं।कई बटाईदार और भूमिहीन किसान सोचते हैं कि वे भी दिन-रात मेहनत करते हैं, तो उन्हें भी ये पैसा मिलना चाहिए। लेकिन सरकारी नियम क्या कहते हैं, चलिए आसान भाषा में समझते हैं।
पहली शर्त: जमीन आपके नाम होनी चाहिए
PM Kisan योजना का सबसे जरूरी नियम यही है। सरकारी रिकॉर्ड में खेती की जमीन आपके नाम पर दर्ज होनी चाहिए। यानी खसरा-खतौनी में आपका नाम होना जरूरी है।अगर आप किसी और की जमीन पर बटाई पर खेती कर रहे हैं, तो जब तक उस जमीन के कागज पर आपका नाम नहीं है, आप इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
तो क्या बटाईदार और खेत मजदूर बाहर हैं?
जी हां। सीधा जवाब यही है।बटाईदार किसान और दिहाड़ी मजदूर भले ही फसल उगाने में सबसे ज्यादा मेहनत करते हों, लेकिन उनके पास जमीन का मालिकाना हक नहीं होता। इसलिए उन्हें PM Kisan की सालाना 6000 रुपये की 3 किस्तें नहीं मिलतीं।
पिता-दादा की जमीन पर खेती कर रहे हैं तो?
ये भी एक आम मामला है। बहुत से युवा पिता या दादा की जमीन संभाल रहे हैं, लेकिन कागज अभी बुजुर्गों के नाम हैं।ऐसे में भी आपको लाभ नहीं मिलेगा। नियम साफ है। पहले उत्तराधिकार या नामांतरण कराकर जमीन अपने नाम करवानी होगी। उसके बाद ही आप आवेदन कर पाएंगे।
अगर PM Kisan नहीं, तो फिर क्या विकल्प हैं?
घबराने की जरूरत नहीं। सरकार ने भूमिहीन और बटाईदार किसानों के लिए भी योजनाएं बनाई हैं।सबसे बड़ा विकल्प है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)।इसमें बटाईदार किसान जमीन के मालिक से एक साधारण लिखित प्रमाण-पत्र लेकर जुड़ सकते हैं। अगर फसल खराब होती है या मौसम की मार पड़ती है, तो उन्हें भी मुआवजा मिलता है।
PM Kisan योजना सीधे जमीन के मालिक को आर्थिक मदद देने के लिए बनाई गई है। इसलिए पात्रता का आधार सिर्फ और सिर्फ जमीन का सरकारी रिकॉर्ड है, मेहनत नहीं।अगर आप पात्र हैं, तो http://pmkisan.gov.in पर जाकर अपना स्टेटस जरूर चेक करें। और अगर बटाईदार हैं, तो PMFBY जैसी योजनाओं का लाभ लेना न भूलें।
Written by – Mansi Sharma
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