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भाजपा और संघ चाहें या न चाहें, चुनाव में उठेगा मथुरा का मुद्दा; जानिए क्यों और कैसे ?

Politics: भाजपा और संघ चाहें या न चाहें, चुनाव में उठेगा मथुरा का मुद्दा; जानिए क्यों और कैसे ?
Politics: आगामी लोकसभा चुनाव और उससे पहले 2027 में होने जा रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा जोर-शोर से उठ सकता है।हालांंकि भाजपा और संघ की ओर से अभी इस बारे में कोई संकेत नहीं दिये गए हैं।वे इस मुद्दे को उठाना चाहें या नहीं, लेकिन साधु-संत और हिंदू संगठन श्रीकृष्ण जन्मभूमि में भव्य मंदिर बनाने के लिए जो तेवर दिखा रहे हैं, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस तरह मथुरा के विकास को गति दे रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में मथुरा का मुद्दा चर्चा का विषय बना रहेगा। 

Politics: साधु-संत क्या चाहते हैं?

भाजपा और संघ परिवार मथुरा के मुद्दे पर अयोध्या की तरह खुलकर आंदोलन चलाने के पक्ष में नहीं दिखाई देते हैं, शायद उन्हें लगता है कि मामला अदालत में विचाराधीन है, लेकिन साधु-संत और कुछ हिंदू संगठन इस मुद्दे को बेहद जोर-शोर से उठाने के मूड में हैं। वे चाहते हैं कि राम जन्मभूमि की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए भी आंदोलन चलाया जाए। अभी 4 सितंबर को महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने एक साक्षात्कार में कहा कि ‘अयोध्या की तर्ज पर मथुरा में भी भव्य मंदिर बनेगा। 
इससे पहले राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास भी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से मांग कर चुके हैं कि भगवान कृष्ण की जन्मभूमि को भी राम मंदिर जैसा भव्य और दिव्य बनाकर आस्थावान श्रद्धालुओं को समर्पित किया जाए। जाहिर है कि संतों ने मुद्दे को जोर-शोर से उठाया तो यह चुनावों को अवश्य प्रभावित करेगा। चुनावों के दौरान आम लोगों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा होगी, तो वे यह भी तय करेंगे की इसके लिए वोट किसे दिया जाए?

Politics: मुख्यमंत्री योगी  का बड़ा दांव

 राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी पर मथुरा का दौरा कर वहां के लिए करोड़ों के विकास की सौगात देकर साफ संदेश दिया है कि उनकी सरकार अयोध्या और काशी की तर्ज पर मथुरा-वृंदावन में भी एक भव्य मंदिर परिसर विकसित करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। राजनीतिक हलकों में मथुरा के विकास के प्रति मुख्यमंत्री की दिलचस्पी को “अयोध्या 2.0” के रूप में देखा जा रहा है।इसे चुनाव से विपक्ष को घेरने के दांव के तौर पर भी देखा जा रहा है।  

Politics: राजभर का अखिलेश पर तंज

इस बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर राजभर ने अखिलेश यादव के एक कथित साक्षात्कार का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि वह खुद को यदुवंशी कहते हैं, लेकिन भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण का नाम लेने से क्यों बचते हैं। उन्होंने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा, “कम से कम भगवान कृष्ण के तो बनकर रहिए भाई।” क्या गारांटी है कि राजभर जो भाषा बोल रहे हैं, कल चुनावों में वही भाषा भाजपा कार्यकर्ता नहीं दोहरायेंगे?
 

Politics: भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रम

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक भाजपा बेशक मथुरा के मुद्दे पर अयोध्या की तरह आंदोलित नहीं है, पार्टी के नेता विकास पर चुनाव मैदान में जाएंगे, लेकिन फिर भी कई बार भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रम बता देते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब पार्टी का अगला बड़ा सांस्कृतिक और राजनैतिक एजेंडा मथुरा-वृंदावन का विकास और श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा है।