Pralhad Joshi: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। पहले से दो महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय दी गई है, जब शिक्षा मंत्रालय नीट पेपर लीक विवाद और परीक्षा प्रणाली को लेकर लगातार दबाव में है।
अनुभव और भरोसे पर दांव
प्रह्लाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का दायित्व संभाल रहे हैं। उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का भरोसेमंद और अनुभवी मंत्री माना जाता है। 2019 से 2024 तक संसदीय कार्य मंत्री के रूप में उन्होंने संसद संचालन और विभिन्न दलों के बीच समन्वय का व्यापक अनुभव हासिल किया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के लगातार हमलों और शिक्षा मंत्रालय से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को देखते हुए सरकार ने किसी अनुभवी चेहरे को जिम्मेदारी देकर प्रशासनिक स्थिरता का संदेश दिया है।
Pralhad Joshi: सबसे बड़ी चुनौती- छात्रों का भरोसा लौटाना
नीट पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठे हैं। ऐसे में नए नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना, पेपर लीक रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करना और छात्रों व अभिभावकों का विश्वास दोबारा कायम करना होगा। इसके साथ ही सरकार द्वारा प्रस्तावित एंटी पेपर लीक कानून और परीक्षा सुधारों को प्रभावी तरीके से लागू करना भी शिक्षा मंत्रालय की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
सरकार का स्पष्ट संदेश
प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार सौंपने के फैसले को सरकार की संकट प्रबंधन रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यह संकेत भी माना जा रहा है कि सरकार फिलहाल मंत्रालय में बड़े राजनीतिक बदलाव के बजाय प्रशासनिक निरंतरता और अनुभवी नेतृत्व को प्राथमिकता देना चाहती है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि प्रह्लाद जोशी शिक्षा मंत्रालय की चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सरकार की घोषणाओं को किस गति से जमीन पर उतारते हैं।
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