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लगातार तीसरे दिन सड़क पर राहुल गांधी, कब तक जारी रहेगा प्रदर्शन? जानिए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की पूरी रणनीति

राहुल गांधी का लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन
राहुल गांधी का लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन

Rahul Gandhi Protest: 6 अक्टूबर 2026 की सुबह राहुल गांधी विपक्षी सांसदों के साथ चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया, जिसके बाद वे आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठ गए। करीब 8 घंटे बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और देर रात छोड़ दिया।

7 अक्टूबर की दोपहर राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस के एक रेस्टोरेंट में विपक्षी सांसदों के साथ लंच किया। इसके बाद वे जंतर-मंतर पर धरना देने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। राहुल गांधी और अन्य नेता सड़क पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और करीब 2 घंटे बाद रिहा कर दिया।

8 अक्टूबर की दोपहर भी विरोध प्रदर्शन का लगभग यही तरीका देखने को मिला। हालांकि, इस बार पुलिस ने राहुल गांधी को राजघाट जाने की अनुमति दे दी। राहुल गांधी ने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

Rahul Gandhi Protest: चुनाव आयोग पर धांधली और वोट चोरी के आरोप

राहुल गांधी पिछले 2 साल से चुनावों में धांधली और वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं। वे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने आयोग पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए कहा था, ‘पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब टीएमसी। हर बार एक ही पैटर्न देखने को मिलता है। बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर पार्टी तोड़ते हैं और फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है।’बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के विरोध में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ भी निकाली थी। हालांकि, यात्रा में जुटी भीड़ चुनावी नतीजों में विपक्ष के पक्ष में वोट में तब्दील नहीं हो सकी। दूसरी ओर, बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को चुनाव में हार के बाद पैदा हुई नाराजगी बताया।

Rahul Gandhi Protest: राहुल गांधी का लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन
राहुल गांधी का लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन
23 सितंबर के बाद विपक्ष को मिला नया मुद्दा

23 सितंबर 2026 को ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में चुनाव आयोग से संबंधित खुलासों की रिपोर्ट प्रकाशित हुई। इसके बाद विपक्ष को आयोग के खिलाफ अपना अभियान तेज करने का एक और मौका मिला। INDIA ब्लॉक में शामिल दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने का फैसला किया। विपक्षी दलों ने अगले 2 से 3 महीने तक धरने, प्रदर्शनों और रैलियों के आयोजन की तैयारी की है।

Rahul Gandhi Protest: ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ के तहत प्रदर्शन

INDIA ब्लॉक की पार्टियां 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकाल रही हैं। इसी अभियान के तहत 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला गया था, जिसे पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद से विपक्ष लगातार 3 दिनों तक दिल्ली में प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहा है।6 अक्टूबर को मार्च के दौरान राहुल गांधी के हाथ में एक स्लोगन बोर्ड था, जिस पर लिखा था, ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’। पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार को लगता है कि उनके घर जाने से मामला खत्म हो गया है, तो ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और अभी कुछ भी खत्म नहीं हुआ है। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी ने भी दोहराया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक उनका विरोध जारी रहेगा।

राष्ट्रपति से मिलने की तैयारी

INDIA ब्लॉक के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांगा था। 9 अक्टूबर के लिए 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल को मंजूरी मिल गई है। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसे नेताओं के शामिल होने की संभावना है।इसी बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने भी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

Rahul Gandhi Protest: 2029 के लोकसभा चुनाव पर भी नजर

कांग्रेस को लंबे समय से कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल का कहना है कि राहुल गांधी के इस अभियान का एक बड़ा लक्ष्य 2029 का लोकसभा चुनाव है। उनके मुताबिक, राहुल गांधी हर लोकसभा सीट पर INDIA ब्लॉक को एकजुट दिखाना चाहते हैं और बीजेपी के खिलाफ विपक्ष का एक साझा उम्मीदवार उतारने की कोशिश कर रहे हैं। इस अभियान के जरिए लोगों तक यह संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है कि बीजेपी की जीत केवल नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के कारण नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की भूमिका के कारण भी होती है।

चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?

चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर को एक प्रेस नोट जारी कर कहा था कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने मुलाकात के लिए समय नहीं मांगा था। बाद में पुलिस से जानकारी मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल संसद भवन एनेक्सी में मुलाकात करना चाहता था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसी मुलाकात आयोग के कार्यालय में होती है।आयोग ने ज्ञापन लेने के लिए अपने सबसे वरिष्ठ अधिकारी को भेजने की पेशकश भी की थी, लेकिन सांसदों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

Rahul Gandhi Protest: बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया अराजकता फैलाने का आरोप

बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी को दोबारा राजनीतिक रूप से स्थापित करने के लिए कांग्रेस और उसके कुछ सहयोगी दल देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से संबंधित 2 याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। इन याचिकाओं में मुख्य रूप से 3 मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं।

Rahul Gandhi Protest: राहुल गांधी
राहुल गांधी
फॉर्म-6 में कथित गैरकानूनी बदलाव

फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। आरोप है कि इस फॉर्म में बदलाव करके आवेदकों से यह जानकारी मांगी जा रही है कि उनका, उनके माता-पिता का या दादा-दादी का नाम पुरानी एसआईआर सूची में शामिल था या नहीं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फॉर्म-6 ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ से जुड़ा कानूनी फॉर्म है और इसमें बदलाव करने का अधिकार केवल केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय को है।

Rahul Gandhi Protest: आयोग में एकतरफा फैसले लेने का आरोप

23 सितंबर को प्रकाशित ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित रूप से अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने के आरोप लगे।’मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023′ की धारा 18 के अनुसार, आयोग को जहां तक संभव हो, अपने फैसले सर्वसम्मति से लेने चाहिए। यदि आयुक्तों के बीच मतभेद हो, तो फैसला बहुमत के आधार पर किया जाता है। तीनों आयुक्तों के पास मतदान का समान अधिकार होता है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी सुरक्षा पर सवाल

‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023’ की धारा 16 मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है। आरोप है कि यह प्रावधान मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके फैसलों के संबंध में कानूनी कार्रवाई से व्यापक सुरक्षा देता है, जबकि पहले इस तरह का कोई कानून नहीं था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी सुरक्षा तो न्यायाधीशों को भी नहीं मिलती।

Rahul Gandhi Protest: 5 अक्टूबर की सुनवाई में क्या हुआ?

5 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। वैकल्पिक रूप से, उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर काम करने से रोककर बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों को जिम्मेदारी सौंपने का सुझाव भी दिया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।इस दौरान मार्च 2023 में आए अनूप बरनवाल मामले के फैसले की व्यवस्था बहाल करने की मांग भी की गई। दरअसल, मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा था कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति में प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होने चाहिए।

ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर भी उठे थे सवाल

फरवरी 2025 में जब ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था, तब राहुल गांधी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उन्होंने नियमों के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी। 24 सितंबर 2026 को राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव आयोग पर आरोप लगाए और ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की।

Rahul Gandhi Protest: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और आयोग से मांगा जवाब

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। अदालत ने केंद्र सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई कर रहे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अगर कानून का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित फैसलों को रद्द किया जा सकता है।

चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज

चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को प्रेस नोट जारी कर कहा था कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग के मुताबिक, किसी मुद्दे पर असहमति होना चर्चा का सामान्य हिस्सा है और इससे यह साबित नहीं होता कि निर्णय गलत तरीके से लिया गया। आयोग ने फॉर्म-6 में गैरकानूनी बदलाव के आरोपों को भी खारिज किया। उसका कहना था कि फॉर्म में कोई गैरकानूनी परिवर्तन नहीं किया गया है और एसआईआर के दौरान नए आवेदकों से केवल एक घोषणा-पत्र मांगा गया था।

Rahul Gandhi Protest: बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर जनता को गुमराह कर रही है। पार्टी का कहना है कि अदालत ने फॉर्म-6 को अवैध घोषित नहीं किया है। बीजेपी के मुताबिक, चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया था और एसआईआर में फॉर्म-6 से संबंधित निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था।

राहुल गांधी
राहुल गांधी
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया क्या है?

मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। इसके लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाना होता है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल 2 आधारों पर पद से हटाया जा सकता है। पहला, सिद्ध कदाचार यानी भ्रष्टाचार या चुनाव में धांधली जैसी गड़बड़ी साबित होना। दूसरा, अक्षमता यानी मुख्य चुनाव आयुक्त के शारीरिक या मानसिक रूप से काम करने में अक्षम होने के ठोस प्रमाण मिलना।

Rahul Gandhi Protest: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पहले भी आया था महाभियोग प्रस्ताव

मार्च 2026 में तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए संसद में नोटिस सौंपा था। उस समय लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नोटिस खारिज कर दिए थे।अप्रैल 2026 में राज्यसभा में विपक्ष ने दोबारा ऐसा नोटिस पेश किया। इस बार 73 विपक्षी सांसदों ने उस पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन यह नोटिस अभी भी लंबित है। 9 मार्च को कोलकाता में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने ‘ज्ञानेश कुमार गो बैक’ के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया था।

शीतकालीन सत्र में फिर आ सकता है प्रस्ताव

अब चर्चा है कि INDIA ब्लॉक संसद के शीतकालीन सत्र में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस फिर से ला सकता है। अगर इस बार लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति नोटिस स्वीकार कर लेते हैं, तब भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लग सकता है। नोटिस स्वीकार होने के बाद एक समिति गठित की जाएगी। समिति की रिपोर्ट आने पर संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होगी और उसके बाद मतदान कराया जाएगा।

Rahul Gandhi Protest: महाभियोग प्रस्ताव के लिए विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या नहीं

महाभियोग प्रस्ताव पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। इसके लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम आधे सदस्यों की मौजूदगी जरूरी होती है और उपस्थित सांसदों में से दो-तिहाई को प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करना होता है।फिलहाल INDIA ब्लॉक के पास इसके लिए आवश्यक संख्या नहीं है। लोकसभा में INDIA ब्लॉक के 184 सांसद हैं, जबकि प्रस्ताव पारित कराने के लिए 362 सांसदों के समर्थन की जरूरत बताई गई है। वहीं, राज्यसभा में INDIA ब्लॉक के 64 सांसद हैं, जबकि आवश्यक संख्या 164 बताई गई है।

राहुल गांधी को मोदी के प्रमुख चुनौतीकर्ता के रूप में पेश करने की कोशिश

वोटवाइब के संस्थापक और चुनाव विश्लेषक अमिताभ तिवारी का कहना है कि अगर ज्ञानेश कुमार दबाव में आकर इस्तीफा देते हैं, तो पूरी एसआईआर प्रक्रिया और उसके बाद हुए चुनावों पर सवाल उठ सकते हैं। उनके मुताबिक, अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो कांग्रेस का सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। इस अभियान के जरिए राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के प्रमुख राजनीतिक चुनौतीकर्ता के रूप में स्थापित करने की कोशिश भी की जा रही है।