Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट की उच्च सदन तक पहुंचने की राह लगभग साफ होती नजर आ रही है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राज्यसभा चुनाव का पूरा समीकरण बदल गया है। खास बात यह है कि महेश केवट वही नेता हैं जिन्हें वर्ष 2022 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में भाजपा से चार वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया था। अब परिस्थितियां ऐसी बनी हैं कि वह निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बेहद करीब हैं।
चार दशक से अधिक का संगठनात्मक अनुभव
महेश केवट मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले के ओरछा क्षेत्र से आते हैं। उनका राजनीतिक और संगठनात्मक सफर चार दशक से अधिक पुराना माना जाता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपनी सक्रिय सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी और भारतीय जनता युवा मोर्चा में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते हुए संगठन में अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वह मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं।
Rajya Sabha Election: निष्कासन के बाद हुई वापसी
वर्ष 2022 के नगर निकाय चुनाव के दौरान महेश केवट पर भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ काम करने के आरोप लगे थे। इसके बाद पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें चार वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। हालांकि लगभग एक वर्ष बाद उनकी पार्टी में वापसी हुई। वापसी के बाद उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई और धीरे-धीरे शीर्ष नेतृत्व का विश्वास फिर से हासिल कर लिया। अब उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को उनकी राजनीतिक पुनर्स्थापना के रूप में देखा जा रहा है।
तीसरी उम्मीदवारी के पीछे राजनीतिक संदेश
मध्य प्रदेश विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भाजपा दो सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में थी। इसके बावजूद पार्टी ने महेश केवट को तीसरा उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक हलकों को चौंका दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं है। केवट समुदाय से आने वाले महेश के माध्यम से भाजपा ने पिछड़ा वर्ग, निषाद और मछुआरा समाज को राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है।
Rajya Sabha Election: नामांकन विवाद से बदला चुनावी समीकरण
कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था और उनकी जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन नामांकन रद्द होने के बाद पूरा चुनावी परिदृश्य बदल गया। कांग्रेस ने इस फैसले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए चुनाव आयोग और न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है। वहीं भाजपा इसे नियमों के अनुरूप लिया गया निर्णय बता रही है। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 11 जून दोपहर तीन बजे तक है। यदि कांग्रेस को इस अवधि के भीतर कोई राहत नहीं मिलती है तो भाजपा उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। फिलहाल राजनीतिक परिस्थितियां महेश केवट के पक्ष में दिखाई दे रही हैं और एक समय निष्कासित किए गए नेता अब संसद के उच्च सदन तक पहुंचने के बेहद करीब नजर आ रहे हैं।
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