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₹1 का सिक्का आज भी नंबर-1! UPI के दौर में भी 5499 करोड़ सिक्कों के साथ सबसे ज्यादा चलन में, RBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

RBI Annual Report:

RBI Annual Report: देश में डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ा है। आज अधिकांश लोग UPI के जरिए छोटे-बड़े भुगतान कर रहे हैं। इसके बावजूद ₹1 के सिक्के की अहमियत कम नहीं हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, देश में सबसे ज्यादा चलन में आज भी ₹1 के सिक्के ही हैं। मार्च 2026 तक भारत में ₹1 के 5,499 करोड़ सिक्के प्रचलन में थे, जो कुल सिक्कों का 38.4 फीसदी हिस्सा हैं।

RBI Annual Report: RBI रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े-

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1 का सिक्का सबसे अधिक प्रचलित रहा। हालांकि, इसकी हिस्सेदारी पिछले वित्त वर्ष के 39.3 फीसदी से थोड़ी घटकर 38.4 फीसदी रह गई, लेकिन इसके बावजूद यह संख्या के लिहाज से देश का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला सिक्का बना हुआ है।

RBI Annual Report: 10 साल में लगातार बढ़ी ₹1 के सिक्कों की संख्या-

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 में देश में ₹1 के करीब 4,500 करोड़ सिक्के चलन में थे। मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 5,499 करोड़ हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ₹1 के सिक्के बहुत कम मात्रा में चलन से बाहर किए जाते हैं, इसलिए हर साल इनकी संख्या बढ़ती रहती है।

2014 से बना हुआ है दबदबा-

RBI के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 से 2016 के बीच कुल सिक्कों में ₹1 के सिक्कों की हिस्सेदारी करीब 42 फीसदी थी। समय के साथ इसमें मामूली गिरावट जरूर आई है, लेकिन आज भी यह देश का सबसे अधिक प्रचलित सिक्का बना हुआ है।

वैल्यू के मामले में 5 और 10 रुपये के सिक्के आगे-

हालांकि संख्या के मामले में ₹1 का सिक्का सबसे आगे है, लेकिन कुल मूल्य (Value) के लिहाज से ₹5 और ₹10 के सिक्कों का दबदबा है।19 जून 2026 तक चलन में मौजूद कुल सिक्कों में ₹5 और ₹10 के सिक्कों की संख्या केवल 23.5 फीसदी थी, लेकिन कुल वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी 53.5 फीसदी रही, जिसकी कीमत करीब 22,209 करोड़ रुपये है।

आज भी कहां सबसे ज्यादा चलता है ₹1 का सिक्का-

कैश मैनेजमेंट सेक्टर के विशेषज्ञों के अनुसार, ₹1 के सिक्के का इस्तेमाल आज भी मंदिरों में चढ़ावे, छोटे दुकानदारों, बस किराए, सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी वाले व्यापारियों और ग्रामीण बाजारों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में UPI ने नकदी पर निर्भरता कम जरूर की है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे लेन-देन में ₹1 का सिक्का अब भी बेहद जरूरी है।

UPI के बावजूद क्यों बनी हुई है जरूरत-

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद हर जगह ऑनलाइन भुगतान संभव नहीं है। किराना दुकानों, स्थानीय बाजारों, छोटे व्यापारियों और अनौपचारिक सेवाओं में आज भी सही छुट्टे पैसे की जरूरत पड़ती है। ऐसे में ₹1 का सिक्का रोजमर्रा के लेन-देन का अहम हिस्सा बना हुआ है।

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