RBI MASTER STROKE: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-यूएस के बीच जारी संघर्ष का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, जबकि भारतीय रुपया दबाव में आ गया है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में लगातार गिरावट ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दोनों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे हालात में अब RBI एक बार फिर 2013 में इस्तेमाल किए गए अपने पुराने लेकिन असरदार फॉर्मूले को लागू करने की तैयारी में है।
RBI ने दिया बड़ा संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि अगर रुपये पर दबाव और बढ़ता है तो केंद्रीय बैंक कई बड़े कदम उठा सकता है। ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि RBI बाजार को स्थिर रखने और रुपये को संभालने के लिए हर जरूरी विकल्प पर विचार कर रहा है। इसमें ब्याज दरों में बदलाव, अतिरिक्त करेंसी स्वैप और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।RBI का मकसद साफ है बाजार में डॉलर की उपलब्धता बनाए रखना और रुपये में ज्यादा गिरावट को रोकना। क्योंकि अगर रुपया लगातार कमजोर होता है तो इसका सीधा असर महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
RBI MASTER STROKE: आखिर क्या है टैपर टैंट्रम प्लेबुक ?
दरअसल साल 2013 में भी भारत इसी तरह के आर्थिक दबाव से गुजर रहा था। उस समय अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने बाजार में डाले जा रहे पैसों को कम करने का फैसला किया था। इसके बाद विदेशी निवेशकों ने भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि रुपया तेजी से टूटने लगा और शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली।उस दौर में RBI ने जो रणनीति अपनाई थी, उसे ही टैपर टैंट्रम प्लेबुक कहा गया। इस नीति के तहत RBI ने बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को सहारा दिया था। साथ ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर विदेशी निवेशकों का भरोसा वापस जीतने की कोशिश की गई थी। उस समय यह रणनीति काफी हद तक सफल साबित हुई थी और भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़े संकट से बचा लिया गया था।
RBI MASTER STROKE: फिर वही रणनीति अपनाने की तैयारी
अब एक बार फिर हालात कुछ वैसे ही बनते दिखाई दे रहे हैं। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की सतर्कता ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में RBI दोबारा अपने विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर सकता है। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को स्थिर करने की कोशिश करेगा ताकि डॉलर की कमी ना हो और निवेशकों में घबराहट न फैले।आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते RBI ने हस्तक्षेप नहीं किया तो आयात महंगा हो सकता है और महंगाई पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार और RBI दोनों फिलहाल हर कदम बेहद सावधानी से उठा रहे हैं।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता है। अगर डॉलर महंगा होता है तो पेट्रोल-डीजल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक सामान और विदेश से आने वाले कई उत्पाद महंगे हो जाते हैं। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और अंतरराष्ट्रीय कारोबार करने वाली कंपनियों पर भी दबाव बढ़ता है।हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी पूरी तरह संकट में नहीं है, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत जरूर है। यही वजह है कि RBI पहले से ही अपने पुराने और भरोसेमंद फॉर्मूले को फिर से लागू करने की तैयारी में जुट गया है।








