Rupee Record Low: भारतीय रुपया शुक्रवार को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। पहली बार 1 डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के स्तर से नीचे चला गया, जिससे बाजार में हलचल बढ़ गई है। डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकालने की वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है। इसका असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है।
क्यों लगातार कमजोर हो रहा है रुपया?
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बने रहने से निवेशक डॉलर को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। यही वजह है कि दुनियाभर में डॉलर की मांग बढ़ रही है। इसके अलावा वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के कारण भी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर में निवेश कर रहे हैं, जिससे भारतीय रुपया कमजोर हो रहा है।
Rupee Record Low: विदेशी निवेश और कच्चे तेल का असर
पिछले कुछ समय में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला है। जब निवेशक रुपये को डॉलर में बदलते हैं तो डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होने लगता है। वहीं भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ने पर ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिसका सीधा दबाव रुपये पर पड़ता है।
Rupee Record Low: आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर
रुपये की गिरावट का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिख सकता है। मोबाइल, लैपटॉप, पेट्रोल-डीजल और विदेश से आने वाले कई सामान महंगे हो सकते हैं। विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों का खर्च भी बढ़ सकता है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती हैं।
RBI क्या कदम उठा सकता है?
Rupee Record Low: बाजार जानकारों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। रुपये को ज्यादा कमजोर होने से रोकने के लिए RBI विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर बाजार में दखल दे सकता है। हालांकि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल रुपये पर दबाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
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