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सलिम वास्तिक का पूरा सच: पहचान बदलकर 26 साल तक छिपा, आखिरकार पुलिस ने किया गिरफ्तार

सलिम वशिष्ठ का बड़ा खुलासा

Salim Wastik: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रहने वाला सलीम वास्तिक, जिसे पहले सलीम खान के नाम से जाना जाता था, बाहर से एक सामान्य इंसान लगता था, लेकिन उसकी सच्चाई बहुत डरावनी है। हाल ही में दिल्ली पुलिस की गिरफ्तारी के बाद उसका पूरा पुराना अपराधी चेहरा सामने आ गया।

1995 का अपहरण और हत्या का मामला

साल 1995 में दिल्ली के दरियागंज स्थित रामजस स्कूल में पढ़ने वाला 13 साल का छात्र संदीप 20 जनवरी को स्कूल गया था, लेकिन वापस घर नहीं लौटा। उसके पिता सीताराम, जो सीमेंट कारोबारी थे, बहुत परेशान हो गए।

21 जनवरी को संदीप के पिता को फोन आया कि उनका बेटा अपहरण कर लिया गया है। कुछ देर बाद फिर कॉल आया और 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी गई। धमकी दी गई कि अगर पुलिस को बताया तो बच्चे को मार दिया जाएगा। पैसे गाजियाबाद के लोनी फ्लाईओवर के पास बस में रखने को कहा गया।

Salim Wastik: सलिम वशिष्ठ का बड़ा खुलासा
संदीप बंसल

जांच और सच्चाई का खुलासा

जांच में शक रामजस स्कूल के मार्शल आर्ट्स ट्रेनर सलीम खान पर गया। एक पड़ोसी ने भी बताया कि उसने बच्चे को “मास्टरजी” के साथ रिक्शा में देखा था।

पुलिस ने सलीम को हिरासत में लिया तो उसने कबूल किया कि उसने अपने साथी अनिल के साथ मिलकर संदीप का अपहरण किया और फिर मुस्तफाबाद के पास एक नाले के पास उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने बच्चे का शव बरामद कर लिया और पिता ने उसकी पहचान की।

बाद में अनिल ने खुद कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस ने उसकी झुग्गी से खुदाई कर बच्चे की घड़ी, टिफिन बॉक्स और स्कूल बैग भी बरामद किए। जांच में पता चला कि फिरौती की कॉल अनिल ने की थी और हत्या सलीम ने की थी।

सलिम वास्तिक का बड़ा खुलासा
सलिम वास्तिक का बड़ा खुलासा

Salim Wastik: कोर्ट का फैसला और फरारी

5 अगस्त 1997 को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने सलीम और अनिल दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।दोनों ने हाईकोर्ट में अपील की। सलीम ने पैरोल पर बाहर आने की अर्जी दी। जैसे ही वह तिहाड़ जेल से बाहर आया, वह फरार हो गया और वापस नहीं लौटा।

26 साल तक छिपकर नई पहचान

सलीम ने अपने नाम से “खान” हटाकर “वास्तिक” जोड़ लिया और अपनी पहचान बदल ली ताकि कोई उसे पहचान न सके।फरारी के दौरान वह हरियाणा के करनाल में जाकर कारपेंटर बना और अलमारी बनाने का काम सीखा। कुछ समय बाद अंबाला चला गया और वहीं काम करता रहा।

गाजियाबाद में नई जिंदगी

साल 2010 में वह गाजियाबाद के लोनी में किराए के कमरे में रहने लगा। यहां उसने महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोली। उसने अपने परिवार पत्नी अफसाना, बेटा और बेटी को भी अलग रखा ताकि किसी को शक न हो। पत्नी दूसरे घर में रहती थी।धीरे-धीरे वह यूट्यूब पर भी एक्टिव हो गया और खुद को एक सामान्य व्यक्ति की तरह दिखाने लगा।

27 फरवरी को उसके ऑफिस में दिनदहाड़े हमला हुआ। बिना नंबर प्लेट की बाइक पर आए नकाबपोश हमलावरों ने उस पर चाकू से हमला किया और उसका गला रेतने की कोशिश की।

सलीम वास्तिक का घर
सलीम वास्तिक का घर

14 बार चाकू मारे गए

उसके शरीर पर 14 बार चाकू से वार किए गए। वह गंभीर हालत में चीखते हुए गिर पड़ा। पड़ोसियों ने उसे अस्पताल पहुंचाया।उसे जीटीबी अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां वह लगभग एक महीने तक रहा और उसके दो ऑपरेशन हुए।पुलिस ने हमले में शामिल दो सगे भाइयों गुलफाम और जीशान को एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस का कहना था कि सलीम इस्लाम धर्म पर वीडियो बनाता था और धर्म की कमियां दिखाता था, इसी वजह से उस पर हमला हुआ।

गिरफ्तारी कैसे हुई

दिल्ली क्राइम ब्रांच को हेड कांस्टेबल मिंटू यादव से सूचना मिली कि यूट्यूबर सलीम वास्तिक वही पुराना उम्रकैद का फरार अपराधी है। इसके बाद पुलिस ने कोर्ट रिकॉर्ड, फिंगरप्रिंट और पुराने फोटो से जांच की। गाजियाबाद के लोनी में उसकी गुप्त रेकी की गई।इसके बाद इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी की 8 सदस्यीय टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ शुरू की।

सलीम वास्तिक की कहानी दिखाती है कि कैसे एक अपराधी सालों तक पहचान बदलकर छिपा रहा, अलग-अलग शहरों में काम करता रहा और सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश करता रहा, लेकिन आखिर में कानून से ज्यादा समय तक कोई भी नहीं बच सकता।

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