Samosa Caucus: अमेरिका की राजनीति में इन दिनों ‘समोसा कॉकस’ शब्द की खूब चर्चा हो रही है। 2026 के मिडटर्म इलेक्शन के बीच यह राजनीतिक टर्म एक बार फिर सुर्खियों में है। खास बात यह है कि इस शब्द का जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जून 2023 में अपने अमेरिकी दौरे के दौरान अमेरिकी संसद में दिए गए भाषण में कर चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर समोसा कॉकस क्या है और इसका भारत से क्या कनेक्शन है? आइए समझते हैं।
Samosa Caucus: क्या है समोसा कॉकस?
‘समोसा कॉकस’ अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के सांसदों के एक अनौपचारिक समूह को कहा जाता है। इस शब्द को साल 2018 में भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने लोकप्रिय बनाया था। उस समय अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के नेताओं का प्रतिनिधित्व बढ़ रहा था। दरअसल, अमेरिकी राजनीति में ‘कॉकस’ का मतलब ऐसे समूह से होता है, जिसके सदस्य किसी विशेष राजनीतिक या नीतिगत मुद्दे पर मिलकर काम करते हैं। वहीं, ‘समोसा’ भारत का लोकप्रिय व्यंजन है, जिसे अक्सर चाय के साथ खाया जाता है। ऐसे में भारतीय मूल के सांसदों की पहचान को दर्शाने के लिए राजा कृष्णमूर्ति ने इस समूह को ‘समोसा कॉकस’ नाम दिया। यह कोई आधिकारिक या वैधानिक संगठन नहीं है, बल्कि अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के नेताओं के बीच एक अनौपचारिक पहचान है।
Samosa Caucus: अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के सांसदों की भूमिका
अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। ये नेता अलग-अलग राज्यों और निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव जीतकर अमेरिकी संसद तक पहुंचे हैं। इनमें अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, राजा कृष्णमूर्ति, श्री थानेदार और सुहास सुब्रमण्यम जैसे नाम शामिल रहे हैं। ये सांसद स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, तकनीक, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अमेरिकी राजनीति में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं।
समोसा कॉकस के सदस्य कौन-कौन हैं?
जनवरी 2025 में अमेरिका की 119वीं कांग्रेस के गठन के समय भारतीय मूल के छह डेमोक्रेटिक सांसदों की चर्चा समोसा कॉकस के तहत हुई थी।
– अमी बेरा: कैलिफोर्निया से सांसद अमी बेरा पेशे से डॉक्टर हैं। वह 2013 से लगातार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य रहे हैं।
– रो खन्ना: कैलिफोर्निया से सांसद रो खन्ना तकनीक, अर्थव्यवस्था और औद्योगिक नीति जैसे मुद्दों में रुचि रखते हैं।
– प्रमिला जयपाल: वॉशिंगटन से सांसद प्रमिला जयपाल अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली दक्षिण एशियाई मूल की पहली महिला हैं।
– राजा कृष्णमूर्ति: इलिनॉय से सांसद रहे राजा कृष्णमूर्ति शिक्षा, रोजगार, तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।
– श्री थानेदार: मिशिगन से सांसद रहे श्री थानेदार भी भारतीय मूल के अमेरिकी नेताओं में शामिल हैं।
– सुहास सुब्रमण्यम: वर्जीनिया से सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने भी अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के लोगों का प्रतिनिधित्व किया है।
2026 के मिडटर्म इलेक्शन में क्या है समोसा कॉकस का समीकरण?
अमेरिका में 2026 के मिडटर्म इलेक्शन के दौरान भारतीय मूल के कई नेता चुनावी मैदान में हैं। राजा कृष्णमूर्ति ने इलिनॉय की प्रतिनिधि सभा सीट छोड़कर अमेरिकी सीनेट का चुनाव लड़ने के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी में हिस्सा लिया था, लेकिन वह जूलियाना स्ट्रैटन से हार गए। वहीं, श्री थानेदार को मिशिगन के 13वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट के डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में डोनावन मैकिनी ने हरा दिया। दूसरी ओर, अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। इनके अलावा अमीश शाह एरिजोना और पिया दांडिया फ्लोरिडा से चुनावी मैदान में हैं।
कैलिफोर्निया में रो खन्ना के सामने रिपब्लिकन पार्टी के रितेश टंडन चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, वॉशिंगटन में प्रमिला जयपाल को रिपब्लिकन उम्मीदवार नीरव शेठ से चुनौती मिल रही है। इसके अलावा रिपब्लिकन नेता विवेक रामास्वामी ओहायो में गवर्नर पद के उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से है। अगर रामास्वामी चुनाव जीतते हैं तो वह बॉबी जिंदल और निक्की हेली के बाद भारतीय मूल के तीसरे अमेरिकी गवर्नर बन सकते हैं।
क्या समोसा कॉकस में फिर हो सकते हैं छह सांसद?
2026 के चुनाव में समोसा कॉकस की संख्या को लेकर भी दिलचस्प स्थिति बनी हुई है। राजा कृष्णमूर्ति और श्री थानेदार के चुनावी समीकरण बदलने के बाद अमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और सुहास सुब्रमण्यम के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती है। वहीं, अमीश शाह और पिया दांडिया की चुनावी जीत भी इस समूह के प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम होगी। अगर ये दोनों चुनाव जीतते हैं और बाकी चारों सांसद भी अपनी सीट बचाने में सफल रहते हैं तो अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के छह डेमोक्रेटिक सांसदों का प्रतिनिधित्व बना रह सकता है।
अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं का इतिहास
अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के नेताओं की मौजूदगी का इतिहास काफी पुराना है। साल 1957 में डेमोक्रेटिक पार्टी के दलीप सिंह सौंद अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय मूल के अमेरिकी बने थे। इसके बाद 2013 में अमी बेरा अमेरिकी प्रतिनिधि सभा पहुंचे। साल 2017 में रो खन्ना, प्रमिला जयपाल और राजा कृष्णमूर्ति ने संसद में जगह बनाई। वहीं, 2023 में श्री थानेदार और 2024 में सुहास सुब्रमण्यम अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य बने। अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती भागीदारी वहां रहने वाले भारतीय-अमेरिकी समुदाय के राजनीतिक प्रभाव और चुनावी सक्रियता को दर्शाती है। यही वजह है कि ‘समोसा कॉकस’ अब अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की पहचान से जुड़ा एक चर्चित शब्द बन चुका है।
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