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कांग्रेस ने हरीश रावत को किया दरकिनार! राहुल गांधी और खड़गे संग हुई बैठक में क्यों शामिल नहीं किए गए?

Politics: कांग्रेस ने हरीश रावत को किया दरकिनार! राहुल गांधी और खड़गे संग हुई बैठक में क्यों शामिल नहीं किए गए?
Politics: कांग्रेस ने हरीश रावत को किया दरकिनार! राहुल गांधी और खड़गे संग हुई बैठक में क्यों शामिल नहीं किए गए?
Politics: उत्तराखंड में कांग्रेस सत्ता में आने की सोच रही है, लेकिन पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी उसके लिए भारी पड़ सकती है। विचित्र बात है कि पिछले दिनों जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पार्टी में नई जान फूँक रहे थे, कार्यक्रम देकर कार्यकर्ताओं को गोलबंद कर रहे थे, तो उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने उन्हें यह चेतावनी देकर चुप करा दिया कि वे पार्टी के समानांतर कार्यक्रम न दें। अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड के वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ बैठक की तो उसमें भी हरीश रावत को दरकिनार कर दिया गया।2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा के उद्देश्य से बुलाई गई इस बैठक में हरीश रावत की अनुपस्थिति सवाल खड़े कर रही है। 

हरीश रावत उत्तराखंड में कांग्रेस के बड़े नेता

बैठक में मौजूद प्रमुख नेताओं में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता यशपाल आर्य और पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख हरक सिंह रावत शामिल थे, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बैठक में मौजूद नहीं थे। यह बैठक अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले हिमालयी राज्य में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा थी।राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को समझना चाहिए था कि हरीश रावत राज्य में कांग्रेस के एक बड़े नेता हैं। उत्तराखंड के हर क्षेत्र में जनता उन्हें भलीभांति जानती और पहचानती है। राज्य आंदोलनकारियों से भी उनका सीधा संवाद है।लिहाजा चुनावी तैयारियों पर कोई भी बैठक करने से पहले कांग्रेस आलाकमान यदि  उन्हें बैठक में शामिल नहीं करता है, तो यह पार्टी की बड़ी चूक मानी जाएगी।

क्या शैलजा और रावत में नहीं बनती?

हालांकि बैठक में हरीश रावत की गैर-मौजूदगी के बारे में उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा कि “बैठक के लिए कुछ तय मानदंड होते हैं। उदाहरण के लिए, मैं प्रभारी हूं; हमारे दो सचिव हमारे साथ मौजूद हैं, साथ ही पीसीसी अध्यक्ष, सीएलपी नेता और हमारे दो चेयरमैन भी हैं। जैसा कि मैंने आपको बताया, अभियान समिति के चेयरमैन और चुनाव प्रबंधन समिति के चेयरमैन मौजूद हैं। चूंकि यह मामला चुनावों से जुड़ा है, इसलिए पूरा ध्यान उसी पर था। वैसे भी, सभी नेताओं के साथ पहले भी चर्चा होती रही है और आगे भी होती रहेगी। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें अन्य नेता भी शामिल होते रहेंगे।” इसके बावजूद बैठक में हरीश रावत की गैर-मौजूदगी को लेकर सवाल उठने स्वाभाविक हैं, क्योंकि वे उत्तराखंड में कांग्रेस के बड़े नेता हैं। ऐसा माना जाता है कि उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा की हरीश रावत के साथ बनती नहीं है, इसीलिए उन्हें  बैठक से दूर रखा गया।

रावत को पहले भी नोटिस दे चुकीं हैं शैलजा

गौरतलब है कि पिछले दिनों जब हरीश रावत कार्यक्रम पर कार्यक्रम देकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा रहे थे,  उनके कार्यक्रमों में लोगों की भीड़ उमड़ रही थी, तो कुमारी शैलजा ने रावत को उस समय भी नोटिस देकर चेतावनी दी थी कि वे पार्टी के समानांतर कार्यक्रम न दें। नोटिस की प्रति सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। कुमारी शैलजा ने हरीश रावत द्वारा निकाली जा रही ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को पार्टी के समानांतर चलाया जा रहा कार्यक्रम बताया और इस पर कड़ी आपत्ति जताई। आगामी विधानसभा चुनावों के नजदीक होने का हवाला देते हुए शैलजा ने कहा था कि ऐसे समय में अलग या व्यक्तिगत कार्यक्रम चलाने से पार्टी कमजोर होती है और सभी को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक कुछ कांग्रेसी नेताओं के गठजोड़ ने राज्य में हरीश रावत को दरकिनार करने की ठान ली है।ये लोग हरीश रावत को ठिकाने लगाने के चक्कर में कांग्रेस का नुकसान कर बैठेंगे। 

कैसे कामयाब हो पाएगा चुनावी अभियान?

बहरहाल, बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कुमारी शैलजा ने बताया कि पार्टी के चुनाव अभियान के एजेंडे को लेकर विस्तृत चर्चा और रणनीति बनाई गई है। उन्होंने कहा, “चूंकि यह एक चुनावी राज्य है, इसलिए वहां की स्थिति की समीक्षा की गई। हमने चर्चा की कि वहां क्या हो रहा है और हम सब मिलकर आगे कैसे बढ़ेंगे। रणनीति के बारे में हम आपको सही समय पर बता देंगे। पूरी तैयारी हो चुकी है; हमारे कार्यक्रम पहले से ही चल रहे हैं।” सवाल फिर वहीं है कि क्या गुटबाजी के चलते यह पार्टी का चुनावी अभियान कामयाब हो पाएगा?