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दुर्गा बनो, काली बनो, बुर्के वाली मत बनो, धीरेंद्र शास्त्री की सनातन एकता यात्रा क्या है और क्यों चर्चा में है?

Sanatan Journey

Sanatan Journey: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथयात्रा इन दिनों मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। 11 अक्टूबर 2026 को छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम से शुरू हुई इस यात्रा का उद्देश्य हिंदू एकता, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति का संदेश देना है। यात्रा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने जातिगत भेदभाव, राष्ट्रवाद, नशामुक्ति और धार्मिक पहचान जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। इसी दौरान बेटियों को संबोधित करते हुए दिए गए उनके बयान, ‘दुर्गा बनो, काली बनो, लेकिन कभी बुर्के वाली मत बनना’, ने भी लोगों का ध्यान खींचा। आखिर यह यात्रा क्या है और धीरेंद्र शास्त्री के बयान क्यों चर्चा में हैं?

बागेश्वर धाम से शुरू हुई सनातन एकता यात्रा

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में सनातन हिंदू एकता रथयात्रा 11 अक्टूबर को छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम से शुरू हुई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, लगभग 500 किलोमीटर लंबी यह यात्रा पांच दिनों तक चलनी है। इसका मार्ग छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर और टीकमगढ़ जिलों से होकर गुजरता है। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर धार्मिक सभाओं, स्वागत कार्यक्रमों और जनसंबोधनों का आयोजन किया जा रहा है। इसके माध्यम से सनातन संस्कृति और हिंदू एकता का संदेश लोगों तक पहुंचाने की बात कही गई है।

Sanatan Journey: हिंदू एकता और जातिगत भेदभाव का मुद्दा

यात्रा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज में एकता बनाए रखने और जातिगत भेदभाव समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता को प्राथमिकता देने की अपील की। उनके संबोधनों में आपसी भाईचारे और समाज को एकजुट करने का मुद्दा भी शामिल रहा। इसके अलावा उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और अपने गांवों को नशामुक्त बनाने का आह्वान किया। यात्रा के प्रमुख संदेशों में धार्मिक एकता के साथ सामाजिक बुराइयों को दूर करने की बात भी शामिल है।

दुर्गा बनो, काली बनो, बुर्के वाली मत बनो

यात्रा के दौरान बेटियों को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, ‘दुर्गा बनो, काली बनो, लेकिन कभी बुर्के वाली मत बनना।’ यह बयान दमोह में यात्रा के दौरान दिए गए उनके संबोधन से जुड़ा है। इस टिप्पणी में उन्होंने हिंदू देवी दुर्गा और काली का उल्लेख करते हुए युवतियों को संबोधित किया। बयान सामने आने के बाद धार्मिक पहचान और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा शुरू हो गई। यात्रा के दौरान दिए गए अन्य बयानों के साथ इस टिप्पणी ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

Sanatan Journey: गरबा पंडालों में प्रवेश को लेकर भी चर्चा

धीरेंद्र शास्त्री ने गरबा आयोजनों और नवरात्र के दौरान धार्मिक आयोजनों में प्रवेश को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर गरबा पंडालों में प्रवेश कर सकते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने गरबा आयोजनों में प्रवेश से पहले गोमूत्र पिलाकर पहचान सुनिश्चित करने का सुझाव दिया। उनका यह बयान भी चर्चा में आया। गरबा पंडालों में प्रवेश, धार्मिक पहचान और आयोजनों की सुरक्षा जैसे मुद्दे इस टिप्पणी के बाद चर्चा का हिस्सा बने।

पांच जिलों से गुजर रही है रथयात्रा

सनातन हिंदू एकता रथयात्रा का निर्धारित मार्ग बुंदेलखंड के पांच जिलों को जोड़ता है। यात्रा की शुरुआत बागेश्वर धाम से हुई और इसके कार्यक्रम में पन्ना, दमोह, सागर तथा टीकमगढ़ को शामिल किया गया है। मार्ग में अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत, धार्मिक संबोधन और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यात्रा में श्रद्धालुओं और समर्थकों की भागीदारी भी देखने को मिल रही है। आयोजकों की ओर से लोगों से यात्रा में शामिल होकर सनातन हिंदू एकता के संदेश से जुड़ने की अपील की गई है।

Sanatan Journey: क्यों चर्चा में है धीरेंद्र शास्त्री की सनातन यात्रा?

धीरेंद्र शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथयात्रा धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर दिए जा रहे बयानों के कारण भी चर्चा में है। एक ओर यात्रा में जातिगत भेदभाव समाप्त करने, सामाजिक समरसता, राष्ट्रवाद और नशामुक्ति जैसे विषय उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर बुर्के और गरबा पंडालों को लेकर दिए गए उनके बयानों ने धार्मिक पहचान और सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है। इस तरह यात्रा का केंद्र धार्मिक एकता का संदेश होने के साथ-साथ इसके दौरान दिए गए बयान भी बने हुए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यात्रा का समापन 15 अक्टूबर 2026 को होना है।

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