Shashi Tharoor: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने देश में जारी प्रदर्शनों, विपक्षी एकता और रिजीम चेंज की मांग को लेकर अपनी बात रखी है। NDTV वर्ल्ड समिट 2026 में उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देता है, लेकिन हिंसा की नहीं। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने और चुनाव आयोग से गंभीरता दिखाने की अपील भी की। थरूर ने कहा कि वह रिजीम चेंज के बजाय गवर्नमेंट चेंज की बात करेंगे, क्योंकि लोकतंत्र में जनता के वोट से सरकार तय होनी चाहिए।
Shashi Tharoor: रिजीम चेंज नहीं, गवर्नमेंट चेंज की बात करेंगे शशि थरूर-
शशि थरूर से जब प्रशांत भूषण और नेहा बोरा जैसे लोगों की ओर से रिजीम चेंज की बात करने और कांग्रेस के रुख को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सरकार बदलने का फैसला चुनाव के जरिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार है कि वह अपना वोट डाल सके। थरूर के मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हर नागरिक को मतदान का अधिकार मिले। इसके बाद निष्पक्ष चुनाव के जरिए यह तय होना चाहिए कि किसकी सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि वह रिजीम चेंज के बजाय गवर्नमेंट चेंज की बात करना पसंद करेंगे।
Shashi Tharoor: शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का समर्थन, हिंसा के खिलाफ बोले थरूर-
कांग्रेस सांसद ने देश में चल रहे प्रदर्शनों पर कहा कि भारतीय संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार देता है, लेकिन हिंसा की अनुमति नहीं देता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के पक्ष में हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए। इसके साथ ही चुनाव आयोग को भी गंभीरता दिखानी होगी, ताकि प्रत्येक भारतीय का मतदान का अधिकार सुरक्षित रह सके।
कांग्रेस को लेफ्ट की जरूरत क्यों? थरूर ने बताया-
NDTV वर्ल्ड समिट 2026 के दौरान शशि थरूर से विपक्षी दलों के बीच एकजुटता और कांग्रेस को वामपंथी दलों की जरूरत को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि कई बार ऐसे हालात पैदा होते हैं, जब विपक्ष को एकजुट होने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने 1977 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और सोशलिस्ट दलों के बीच भी एकता देखने को मिली थी। थरूर के मुताबिक, जब राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी होती हैं, तो अलग-अलग विचारधाराओं वाले दल भी एक मंच पर आ सकते हैं।
चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर जताई चिंता-
शशि थरूर ने भारत की विदेश नीति और चीन के साथ व्यापारिक संबंधों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने चीन से भारत के बढ़ते आयात पर चिंता जताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार का संतुलन भारत के पक्ष में नहीं है। थरूर के मुताबिक, भारत चीन से लगभग 118 अरब डॉलर का आयात करता है, जबकि चीन को भारत का निर्यात करीब 12 अरब डॉलर है। उन्होंने कहा कि यह अंतर चिंता का विषय है। कांग्रेस सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि भारत का व्यापार ऐसे देश के साथ लगातार बढ़ रहा है, जिसके साथ उसके हितों को लेकर गंभीर चुनौतियां रही हैं। उनके मुताबिक, चीन पर भारत की बढ़ती व्यापारिक निर्भरता पर ध्यान देने की जरूरत है।
बदल रहा है वर्ल्ड ऑर्डर, रूस और चीन की बढ़ी ताकत-
शशि थरूर ने वैश्विक व्यवस्था यानी वर्ल्ड ऑर्डर में हो रहे बदलावों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक की परिस्थितियां अब पहले जैसी नहीं हैं। दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे में देशों को भविष्य की चुनौतियों के लिए नए विकल्पों पर विचार करना होगा। थरूर ने कहा कि अमेरिका की ताकत को चुनौती मिली है। रूस मजबूती से उभरा है और यूरोप को चुनौती दे रहा है। वहीं, चीन भी वैश्विक राजनीति में एक अहम शक्ति के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में भारत को भी बदलती वैश्विक परिस्थितियों, अपनी विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार करनी होगी।
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