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Shivraj Singh: खेती पर चर्चा अब गांव में होगी, दिल्ली में नहीं: शिवराज

Shivraj Singh
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Shivraj Singh: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खेती-किसानी से जुड़े निर्णयों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब कृषि से संबंधित बैठकें और चर्चाएं नई दिल्ली के बंद कमरों में नहीं, बल्कि सीधे गांवों में होंगी। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा में राष्ट्र स्तरीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत आयोजित परामर्श कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बात कही। कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इकॉर्डा परिसर में पौध-रोपण भी किया।

गांव में होगी खेती पर चर्चा, खेत से जुड़ा फैसला

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती को खेत से दूर बैठकर समझा नहीं जा सकता। इसी सोच के साथ पहली बार कृषि मंत्रालय की बैठकों को दिल्ली से बाहर निकालकर गांवों में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की वास्तविक समस्याओं और जरूरतों को समझने के लिए गांव में जाकर संवाद जरूरी है, ताकि नीतियां जमीनी स्तर पर प्रभावी बन सकें।

Shivraj Singh: दलहन उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का जोर

केंद्रीय मंत्री ने दलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि मसूर, चना, उड़द, बटरा और मूंग जैसी दालों के बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत बीज विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया कि अब कोई भी बीज दिल्ली में जारी नहीं होगा, बल्कि सीधे किसानों के बीच जाकर अलग-अलग राज्यों में बीज रिलीज किए जाएंगे।

क्लस्टर मॉडल से किसानों को मिलेगा पूरा लाभ

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि खेती को मजबूत बनाने के लिए क्लस्टर मॉडल अपनाया जाएगा। क्लस्टर से जुड़े किसानों को बीज किट दी जाएगी और आदर्श खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 10,000 रुपये की सहायता मिलेगी। इसके साथ ही बीज से लेकर बाजार तक पूरी व्यवस्था सरकार करेगी। उन्होंने बताया कि क्लस्टर स्तर पर दाल मिल लगाने को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसके तहत देशभर में 1,000 दाल मिलें स्थापित होंगी। इनमें से 55 दाल मिलें मध्य प्रदेश में लगाई जाएंगी, जिन पर 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी।