Siddhivinayak Temple Controversy: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट का मामला भी चर्चा में आ गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) के आरोपों का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के कार्यकाल में सिद्धिविनायक ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। इसके बाद ट्रस्ट के तत्कालीन अध्यक्ष और मराठी अभिनेता आदेश बांदेकर ने सामने आकर आरोपों का सख्त खंडन किया।
Siddhivinayak Temple Controversy: आदेश बांदेकर बोले- दोषी मिला तो मंदिर के सामने फांसी दे देना-
आदेश बांदेकर ने कहा कि उनके कार्यकाल में यदि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या घोटाले का एक भी प्रमाण मिलता है, तो उन्हें सिद्धिविनायक मंदिर के सामने ही फांसी पर लटका दिया जाए। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि उन्होंने ट्रस्ट का संचालन पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार किया है तथा उन्हें किसी भी जांच से कोई डर नहीं है।
Siddhivinayak Temple Controversy: राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद तेज हुई सियासत-
दरअसल, अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) लगातार राज्य सरकार और संबंधित पक्षों पर सवाल उठा रही है। इसी के जवाब में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पलटवार करते हुए उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्रित्वकाल के दौरान सिद्धिविनायक ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र किया। इसके बाद यह मामला राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया।
2019 के पुराने आरोप फिर आए चर्चा में-
वर्ष 2019 में महाविकास आघाड़ी सरकार बनने के बाद उद्धव ठाकरे ने अभिनेता आदेश बांदेकर को श्री सिद्धिविनायक ट्रस्ट का अध्यक्ष नियुक्त किया था। उनके कार्यकाल के दौरान महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने ट्रस्ट में कथित घोटाले के आरोप लगाए थे। हाल ही में राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच एकनाथ शिंदे ने इन्हीं पुराने आरोपों का हवाला देते हुए शिवसेना (यूबीटी) पर निशाना साधा।
दस्तावेजों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई-
आदेश बांदेकर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट का प्रशासन उनके हाथ में नहीं है। ऐसे में उनके कार्यकाल से जुड़े सभी दस्तावेज अब अन्य लोगों के नियंत्रण में हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इस दौरान रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ भी हो सकती है। इसलिए यदि जांच होती है तो इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच जांच पर टिकी निगाहें-
बांदेकर की खुली चुनौती के बाद यह विवाद और गहरा गया है। एक ओर सत्तापक्ष विपक्ष पर पुराने मामलों को लेकर हमला बोल रहा है, वहीं विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सरकार से जवाब मांग रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों की औपचारिक जांच कराती है या मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रहता है।
यह भी पढ़े- राजस्थान में रेड बुल-स्टिंग समेत 8 एनर्जी ड्रिंक्स पर रोक, बिक्री और प्रचार पर बैन








