Supreme Court action: देश में कानूनी पेशे में फर्जी वकीलों की बढ़ती संख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) के अनुसार, देश में हर तीन में से एक वकील फर्जी है। इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत ने वकीलों के लिए आधार जैसी राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया है।
Supreme Court action: केंद्र सरकार और बीसीआई से मांगा जवाब-
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर प्रतिक्रिया मांगी है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
Supreme Court action: हर वकील को मिलेगा यूनिक नेशनल लॉयर आईडी-
याचिका में मांग की गई है कि देशभर के सभी नामांकित वकीलों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री बनाई जाए। इसमें प्रत्येक वकील को एक विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान संख्या (National Lawyer Identifier) दी जाए, जिससे फर्जी वकीलों की पहचान कर उन पर अंकुश लगाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया नवोन्मेषी विचार-
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह एक नवोन्मेषी और उपयोगी विचार प्रतीत होता है, जिसे तकनीक की मदद से लागू किया जा सकता है। अदालत ने माना कि इससे कानूनी पेशे में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी प्रैक्टिशनर्स की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
डिजिटल आचार संहिता की भी मांग-
बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा दायर याचिका में बीसीआई को अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 49 के तहत इंटरनेट मीडिया और डिजिटल आचार संहिता बनाने का निर्देश देने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कानूनी पेशे से जुड़े मानकों को भी स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए।
कानून विश्वविद्यालयों को भी बनाया जाएगा पक्षकार-
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कानून विश्वविद्यालयों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए उन्हें भी पक्षकार बनाया जाना चाहिए। बीएआई की ओर से पेश अधिवक्ता विपिन नायर और प्रशांत कुमार ने बताया कि यूजीसी को पहले ही याचिका में पक्षकार बनाया जा चुका है।
Written by – ADARSH KATHANE
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