Supreme Court Judges: केंद्र सरकार ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का अहम फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस निर्णय को न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि यह कैबिनेट का एक बेहद अहम फैसला है, जो देश के न्यायिक ढांचे को सशक्त बनाने और लोगों को समय पर न्याय दिलाने से जुड़ा है। उन्होंने इसे जनता के हित में लिया गया निर्णय बताया।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे चार नए न्यायाधीश
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में “सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026” को मंजूरी दी गई। इस फैसले के तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या, मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव रखा गया है।

संसद में पेश होगा विधेयक
सरकार इस संशोधन विधेयक को संसद में पेश करेगी। इसका उद्देश्य 1956 के कानून में बदलाव करना है, ताकि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जा सके और अदालत में लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सके। इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुचारु बनेगी।
कैबिनेट बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से सर्वोच्च न्यायालय की कार्यक्षमता में सुधार होगा। इससे मामलों की सुनवाई तेजी से होगी और लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा। न्यायाधीशों और उनके सहयोगी कर्मचारियों के वेतन तथा अन्य खर्च भारत की संचित निधि से पूरे किए जाएंगे।
Supreme Court Judges: संविधान में क्या है प्रावधान
भारत के संविधान के अनुच्छेद 124(1) में सर्वोच्च न्यायालय की संरचना का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि देश में एक मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश होंगे, जिनकी संख्या संसद द्वारा तय की जाती है। इसी प्रावधान के तहत 1956 में “सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम” लागू किया गया था, जिसमें शुरुआत में अधिकतम 10 न्यायाधीशों का प्रावधान रखा गया था।
समय के साथ बढ़ती रही न्यायाधीशों की संख्या
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या समय-समय पर बढ़ाई जाती रही है। वर्ष 1960 में इसे 13 किया गया, 1977 में बढ़ाकर 17 कर दिया गया। 1979 के बाद कुछ समय तक संख्या सीमित रही, लेकिन बाद में इस सीमा को हटा दिया गया। इसके बाद 1986 में संख्या 25 की गई, 2008 में इसे 30 तक बढ़ाया गया और वर्ष 2019 में आखिरी बार इसे 33 किया गया था।
अब 37 तक पहुंचेगी संख्या
अब वर्ष 2026 के प्रस्तावित संशोधन के बाद सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 37 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) हो जाएगी। इससे उम्मीद है कि अदालत में लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा और देश की न्याय व्यवस्था और अधिक मजबूत बनेगी।








