Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति में इस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आ रहा है। AIADMK के अंदर गंभीर हलचल देखने को मिल रही है। आज होने वाली विधायक दल की बैठक अचानक टाल दी गई है, जिससे सियासी माहौल और गर्म हो गया है। जानकारी के अनुसार, पार्टी के 47 विधायकों में से अधिकतर टीवीके को समर्थन देने की मांग कर रहे हैं। इसे नेतृत्व के लिए एक तरह की चेतावनी माना जा रहा है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो 30 से ज्यादा विधायक पार्टी छोड़कर थलपति विजय का समर्थन कर सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सी.वी. शनमुगम की अहम भूमिका बताई जा रही है और खबर है कि उनके निवास पर कई विधायक एकत्र हो सकते हैं।
सात मई को शपथ ग्रहण की तैयारी
सरकार गठन की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। राज्य सचिवालय में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक चल रही है, जिसमें शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों पर चर्चा हो रही है। यह कार्यक्रम जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक यदि सभी परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो सात मई को नई सरकार शपथ ले सकती है।

चुनाव परिणामों में नई पार्टी का दबदबा
तमिलनाडु में तेईस अप्रैल को विधानसभा चुनाव हुए थे और चार मई को इसके नतीजे घोषित किए गए। इस चुनाव में TVK ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जगह बनाई। पार्टी को एक सौ आठ सीटें मिलीं। वहीं DMK को उनसठ सीटें, अन्नाद्रमुक को सैंतालीस सीटें, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को पांच सीटें और पट्टाली मक्कल कच्ची को चार सीटें हासिल हुईं। इस परिणाम ने राज्य की पारंपरिक राजनीति को बड़ा झटका दिया है।
Tamil Nadu Politics: बहुमत से दूर, सहयोगियों की तलाश
हालांकि नई पार्टी सबसे बड़ी बनकर उभरी है, लेकिन उसके पास पूर्ण बहुमत नहीं है। सरकार बनाने के लिए एक सौ अठारह सीटों की आवश्यकता होती है, जबकि उसके पास वर्तमान में एक सौ आठ सीटें हैं। यानी उसे अभी दस और विधायकों का समर्थन चाहिए। ऐसे में राजनीतिक जोड़तोड़ तेज हो गई है। कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के साथ समर्थन देने की इच्छा जताई है, जबकि अन्नाद्रमुक के कई विधायक भी उसके पक्ष में झुकते दिखाई दे रहे हैं।
टूट की आशंका के बीच मजबूत होती स्थिति
अन्नाद्रमुक के अंदर बढ़ती नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है। पार्टी के कई नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि नेतृत्व ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो बड़ी संख्या में विधायक अलग रास्ता अपना सकते हैं। कुल मिलाकर मौजूदा हालात में थलपति विजय की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है और अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आगे सरकार किसके समर्थन से बनेगी।
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