Supreme Court on ST : शेड्यूल ट्राइब (ST) इनकम टैक्स में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सीधे-सीधे विधायी नीति का मामला है इसलिए हम इसमें दखल देने को इच्छुक नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि किसी ने किसी प्रावधान का दुरुपयोग किया है। इसका मतलब ये नहीं है कि सभी लोगों पर संदेह किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संसदीय पिटिशन कमेटी जाने की छूट दी।

अनुसूचित जनजाति (ST) में आयकर में क्रीमी लेयर व्यवस्था लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने दलील दी कि आर्थिक रूप से अत्यंत समृद्ध हो चुके लोगों को भी आरक्षण और अन्य विशेष लाभ मिलते रहना समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।
Supreme Court ने की सुनवाई
सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में आदिवासी समुदायों के लोग जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है, बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थान चलाते हैं, करोड़ों रुपये की आय अर्जित करते हैं, फिर भी विभिन्न लाभ प्राप्त करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि मामला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 19 और 27 की व्याख्या से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में कई आदिवासी 500-1000 करोड़ के मालिक हैं, उनके कॉलेज हैं, कोल्ड स्टोरेज हैं, फिर भी ऐसे लोगों को टैक्स में छूट दी जा रही है। हम चाहते हैं कि इसमें क्रीमी लेयर सिस्टम लागू किया जाएगा।
CJI ने कही ये बात
गरीब ट्राइबल को छूट दी जाए लेकिन वो आदिवासी जिन्हें ट्राइबल के नाम पर टैक्स में छूट दी जा रही है, जो कि ईसाई बन चुके हैं, किसी आदिवासी परंपरा का पालन भी नहीं करते हैं, उन्हें टैक्स में छूट आर्टिकल 27 का कंपलीट वॉयलेशन है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि केवल इसलिए कि किसी ने किसी प्रावधान का दुरुपयोग किया है, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों पर संदेह किया जाए।
जानें पूरा मामला
पूर्वोत्तर राज्यों में आदिवासी इलाके के आदिवासियों को ट्राइबल के नाम पर इनकम टैक्स में दी गई छूट के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सरकार के सामने अपनी बात रखने को कहा है. याचिका मे कहा गया है कि पूर्वोत्तर राज्यों के अधिकतर आदिवासी धर्म बदल चुके हैं, लेकिन इनकम टैक्स मे छूट का फायदा उठा रहे हैं, जो आदिवासी ईसाई बन गए और अब करोड़ों कमाते हैं, उनके पास इतने सारे एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन कैसे हो सकते हैं । कुछ हर साल 200 करोड़ रुपये कमाते हैं और फिर भी उन्हें टैक्स देने से छूट मिलती है।यह आर्टिकल 14, 19 और 27 का उल्लंघन करता है।
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Written By : Anushka








