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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन उच्च न्यायालयों के लिए नए न्यायाधीशों के नामों को दी मंजूरी

Supreme Court

Supreme Court: भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कई नामों की सिफारिश की है। दो जून को हुई बैठक में कॉलेजियम ने विभिन्न प्रस्तावों पर विचार करते हुए इन नियुक्तियों को मंजूरी प्रदान की। अब इन सिफारिशों को आगे की प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

कर्नाटक उच्च न्यायालय के लिए छह नामों की सिफारिश

कॉलेजियम ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के लिए छह अधिवक्ताओं के नामों को मंजूरी दी है। इनमें राघवेंद्र सीताराम श्रीवत्स, हेमा कुलकर्णी, सुब्रमण्य रंगाराव, थडागवाडी प्रकाश विवेकानंद, बक्केश्वर प्रमोद और होम्बे गौड़ा शांति भूषण शामिल हैं। इन सभी नामों को न्यायाधीश पद के लिए उपयुक्त मानते हुए कॉलेजियम ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

Supreme Court: मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के लिए भी सिफारिश

कॉलेजियम ने अधिवक्ता अमित लाहोटी को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के लिए न्यायिक अधिकारियों चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल के नामों की सिफारिश की गई है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी बयानों में इन प्रस्तावों को स्वीकृति मिलने की जानकारी दी गई है।

न्यायाधीश नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है?

उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है। सबसे पहले संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अपने दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों से परामर्श कर नामों की सिफारिश करते हैं। इसके बाद यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री के माध्यम से राज्यपाल और फिर केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय को भेजा जाता है। केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के समक्ष रखा जाता है। कॉलेजियम की मंजूरी मिलने पर सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी जाती है। अंततः राष्ट्रपति नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर करते हैं और न्याय विभाग राजपत्र अधिसूचना जारी करता है, जिसके बाद नियुक्ति प्रभावी हो जाती है।

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