नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए भारत सरकार ने लिया अहम कदम

Nepal Flood Victims:

Nepal Flood Victims: नेपाल के उत्तरी हिस्से के सीमावर्ती जिलों में मुख्य रूप से रसुवा (Rasuwa), धाडिंग (Dhading), नुवाकोट (Nuwakot), गोरखा (Gorkha), चितवन (Chitwan), और नवलपरासी – बर्दघाट सुस्ता पूर्व (Nawalparasi – Bardaghat Susta East) क्षेत्र में भीषण बाढ़ ने तबाही मचाई है। इस तबाही को देखते हुए विदेशी राहत कार्य टीम ने नेपाल में राहत कार्य करने का प्रस्ताव नेपाल सरकार के सामने रखा था, जिसे नेपाल की काठमांडू सरकार ने मना कर दिया था। लेकिन अब बालेन शाह ने इस फैसले को पलट दिया है। नेपाल की सरकार सीमित विदेशी विशेषज्ञों और खुद की बचाव टीमों को अनुमति दे रही है। वहीं नेपाल में राहत कार्य के लिए भारत सरकार ने अहम कदम उठाया है।

Nepal Flood Victims: राहत कार्य के लिए भारत सरकार ने उठाया अहम कदम –

नेपाल में प्रतिदिन भीषण बाढ़ के कारण कई सारी दुर्घटनाएँ सामने आ रही हैं। नेपाल में भीषण बाढ़ की वजह से मौत का आँकड़ा 584 हो गया है। वहीं लापता लोगों की संख्या 2,482 हो गई है। नेपाल की स्थिति को देखकर भारत सरकार ने नेपाल में बचाव कार्य के लिए अहम कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल में बचाव कार्य के लिए टनल रेस्क्यू टीम भेजी जा रही है। साथ ही एक सर्वे टीम को भी भेजा जाएगा, जो स्थिति का आकलन करेगी और जरूरी उपकरणों की पहचान करेगी।

भारत ने बेली ब्रिज और तकनीकी टीमों का किया इंतजाम –

आगे विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल में बाढ़ पीड़ितों के लिए चिकित्सा टीम को भी भेजा जाएगा। इसके अलावा बेली ब्रिज और तकनीकी टीमों की भी नेपाल को पेशकश की जा रही है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी जल्द बहाल हो सके।

नेपाल ने क्यों लिया विदेशी राहत टीम का सहारा-

काठमांडू सरकार ने विदेशी राहत टीम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था, लेकिन फिर बालेन शाह की सरकार ने इस फैसले को अपनाकर काठमांडू की सरकार का फैसला खारिज कर दिया।

नेपाल की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह फैसला लेना जरूरी था। नेपाल के कुछ क्षेत्रों में विदेशी नागरिक भी रहते हैं। द काठमांडू पोस्ट के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लापता विदेशी नागरिकों वाले देशों के बचाव कार्य के कारण यह फैसला लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदायों से दबाव आ रहा है कि विदेशी नागरिकों के लिए बचाव टीमों और विशेषज्ञों को भेजने की अनुमति दी जाए। वहीं विदेशी सरकारों ने विषयों की संख्या को बढ़ाकर बड़ी टीम भेजने का फैसला किया है, क्योंकि नेपाल में डीएनए टेस्टिंग और फोरेंसिक पहचान की क्षमता सीमित है

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