₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर MDR चार्ज, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-RBI से मांगा जवाब

 UPI MDR Charge:

UPI MDR Charge: डिजिटल पेमेंट से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) को नोटिस जारी कर इस शुल्क के कानूनी आधार और इससे होने वाले वित्तीय लाभ को लेकर जवाब मांगा है।

UPI MDR Charge: याचिका पर रोक से इनकार, सरकार से मांगा जवाब-

मामला केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है, जिसके तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI लेनदेन पर MDR लागू किया जाना है। याचिकाकर्ता ने नए शुल्क ढांचे पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार करते हुए संबंधित पक्षों से इस व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम में इस शुल्क को लागू करने का नियम क्या है और इससे मिलने वाला वित्तीय लाभ आखिर किसे प्राप्त होगा।

UPI MDR Charge: 15 अक्टूबर से लागू होना है नया नियम-

नए नियम के मुताबिक, 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR लागू किया जाना है। यह शुल्क बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और थर्ड पार्टी ऐप्स के संचालन तथा तकनीकी ढांचे के रखरखाव से जुड़ी लागत को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है।

आम ग्राहकों पर नहीं लगेगा यह चार्ज-

वित्त मंत्रालय और NPCI की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि सामान्य पर्सन-टू-पर्सन (P2P) UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। 0.4 फीसदी MDR केवल तय सीमा से अधिक के बड़े मर्चेंट पेमेंट पर लागू होगा और इसका भुगतान व्यापारियों से लिया जाना है। बैंकों और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस शुल्क का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डालें। इसके अलावा, ऐप प्रोवाइडर्स को किसी तरह का छिपा हुआ चार्ज या अतिरिक्त प्लेटफॉर्म फीस लगाने की अनुमति नहीं होगी।

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UPI में ₹2000 से ज्यादा के पेमेंट पर क्या बदलेगा? ग्राहक देगा या दुकानदार, MDR का पूरा गणित समझें

UPI MDR: 2000 से ज्यादा के पेमेंट पर MDR शुल्क ग्राहक देगा या दुकानदार

UPI MDR: यूपीआई से भुगतान करने वालों के लिए 15 अक्टूबर 2026 से एक नया बदलाव लागू होने जा रहा है। ₹2,000 से ज्यादा के कुछ व्यापारी भुगतान पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होगा। इस खबर के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका असर आम ग्राहक की जेब पर पड़ेगा या … Read more

UPI उपभोक्ताओं को लगा बड़ा झटका, ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर लग सकता है चार्ज

UPI MDR Charge:

UPI MDR Charge: आज के दौर में हर चार में से तीन व्यक्ति पेमेंट करने के लिए UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में जून 2026 तक UPI उपभोक्ताओं की संख्या 5.49 करोड़ से अधिक है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में UPI के जरिए बड़े पैमाने पर लेनदेन होता है। इसी वजह से भारत सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे UPI उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लग सकता है।

UPI MDR Charge: UPI से भुगतान करने पर लगेगा चार्ज-

भारत में बड़े पैमाने पर UPI से पेमेंट की जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने UPI से भुगतान करने वालों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी चार्ज लगाने का निर्णय लिया है। जानकारी के अनुसार, अभी इस प्रस्ताव पर गहन विचार किया जा रहा है।

UPI MDR Charge: ₹2,000 से अधिक का भुगतान करने पर लगेगा चार्ज-

भारत सरकार के अनुसार, यह चार्ज ₹2,000 से अधिक के बिजनेस भुगतान पर लगाया जाएगा। यह 0.25% से 0.4% तक हो सकता है।

रोजमर्रा के UPI भुगतान पर नहीं लगेगा यह चार्ज-

भारत सरकार के अनुसार, मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर पर लागू नहीं किया जाएगा। वहीं, रोजमर्रा की खरीदारी जैसे दूध, राशन, बिस्कुट आदि के UPI पेमेंट पर भी यह लागू नहीं होगा।

वित्त मंत्री ने रखा प्रस्ताव-

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में पेश किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स पर इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर MDR लगाने के प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव रखा। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इसे कब लागू किया जाएगा, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

95 फीसदी लेनदेन पर नहीं लगेगा MDR-

आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में 23.7 अरब UPI लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि करीब 95 फीसदी लेनदेन पर MDR लागू नहीं होगा।

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