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मुस्लिम-सिख समुदाय की राय से राहुल-अखिलेश के बयानों पर फिर उठे सवाल

योगी सरकार पर मुस्लिम समुदाय ने क्या कहा?
योगी सरकार पर मुस्लिम समुदाय ने क्या कहा?

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा, अल्पसंख्यकों के अधिकार और विपक्ष की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इन मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरते रहे हैं। वहीं, भाजपा समर्थकों का दावा है कि योगी आदित्यनाथ के शासन में मुस्लिम समुदाय को सुरक्षा के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिल रहा है। इसी बीच, मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर अखिलेश यादव के कथित बयान और 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी के दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई रैली को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इन सभी मुद्दों पर खबर इंडिया के एक मीडिया ग्राउंड रिपोर्ट वीडियो में अलग-अलग लोगों ने अपनी राय रखी। इसमें भाजपा समर्थकों, मुस्लिम समुदाय के लोगों और सिख समाज से जुड़े लोगों ने अपने विचार साझा किए।

Uttar Pradesh: योगी सरकार में मुस्लिम समुदाय कितना सुरक्षित?

वीडियो में शामिल कुछ मुस्लिम वक्ताओं ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुस्लिम समुदाय पहले से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहा है। उनका कहना था कि योगी आदित्यनाथ के शासन में मुसलमानों के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है और उन्हें भी दूसरी जातियों और समुदायों की तरह सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।एक मुस्लिम वक्ता ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद मुस्लिम समुदाय की स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में मुसलमानों का कोई उत्पीड़न नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, मुस्लिम परिवारों को राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी सरकारी सुविधाएं मिल रही हैं।उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके तहत पात्र लोगों को 5 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मिलती है। उनका सवाल था कि अगर सरकार मुसलमानों के खिलाफ होती तो क्या उन्हें भी इन योजनाओं का लाभ मिलता?एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग अब बिना किसी डर के अपनी जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार में मुसलमानों को मंत्री बनने तक के अवसर मिल रहे हैं।

मुस्लिम वोट बैंक को लेकर विपक्ष पर निशाना

वीडियो में शामिल लोगों ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर मुस्लिम समुदाय को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि विपक्षी दल मुसलमानों को भाजपा से डराने की कोशिश करते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।एक वक्ता ने कहा कि पहले मुस्लिम समुदाय को लेकर यह धारणा बनाई जाती थी कि भाजपा की सरकार आने पर उनके लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी। लेकिन पिछले 10 वर्षों में ऐसा कुछ नहीं हुआ। उनके मुताबिक, अब मुसलमान खुलकर भाजपा के समर्थन में सामने आ रहे हैं।वहीं, एक अन्य वक्ता ने समाजवादी पार्टी के पुराने चुनावी समीकरण ‘एमवाई’ यानी मुस्लिम-यादव का जिक्र करते हुए कहा कि अब इस समीकरण में बदलाव आ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष के पास अब केवल ‘वाई-वाई’ बचा है और वह अफवाहों के जरिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

Uttar Pradesh: क्या मुसलमानों को अब सपा में दरी बिछाने तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा?

समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पार्टी ने लंबे समय तक मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक इस्तेमाल किया, लेकिन उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया।एक वक्ता ने कहा कि पहले मुसलमानों को केवल पार्टी के कार्यक्रमों में दरी बिछाने और भीड़ जुटाने तक सीमित रखा जाता था। लेकिन अब मुस्लिम समुदाय शिक्षित हो रहा है और अपने राजनीतिक अधिकारों को समझने लगा है।उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव वास्तव में मुसलमानों के हितैषी हैं तो उन्हें घोषणा करनी चाहिए कि अगर प्रदेश में सपा की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री किसी मुस्लिम नेता को बनाया जाएगा।उन्होंने आजम खान का नाम लेते हुए कहा कि अखिलेश यादव खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहते हैं, जबकि मुस्लिम नेताओं को शीर्ष पदों पर पर्याप्त जगह नहीं दी जाती।वक्ताओं ने राज्यसभा के टिकटों के बंटवारे को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि सपा अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने का दावा तो करती है, लेकिन महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों पर अपने परिवार और करीबी लोगों को प्राथमिकता देती है।

आजम खान के मामले पर क्या बोले लोग?

वीडियो में आजम खान का मुद्दा भी उठा। उनसे जुड़े कानूनी मामले का जिक्र करते हुए सवाल किया गया कि क्या उन्हें मुस्लिम होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है?इस पर एक वक्ता ने कहा कि आजम खान को अपने कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के उत्पीड़न के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आज देश में मुसलमानों को बराबरी के अधिकार मिल रहे हैं।उनका दावा था कि मुस्लिम समुदाय की पुरानी छवि बदल रही है। पहले मुसलमानों को अक्सर बम धमाकों या पंचर बनाने जैसे कामों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब वे शिक्षा, राजनीति और विकास के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ा रहे हैं।

Uttar Pradesh: मदरसा शिक्षा और मुस्लिम बच्चों के भविष्य पर सवाल

शिक्षा के मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को निशाने पर लिया गया। एक सवाल में पूछा गया कि क्या मुस्लिम बच्चों की शिक्षा को केवल मदरसों तक सीमित रखना सही है, जबकि राजनीतिक नेताओं के अपने बच्चे विदेशों में पढ़ाई करते हैं।इस पर एक वक्ता ने कहा कि मदरसों में शिक्षा मिलना अच्छी बात है, क्योंकि वहां उर्दू और धार्मिक शिक्षा के साथ दूसरी भाषाएं भी सिखाई जाती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम बच्चों को आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा के अवसर भी मिलने चाहिए।उन्होंने दावा किया कि अब कई मदरसों में अंग्रेजी, हिंदी और इंजीनियरिंग जैसे विषयों की पढ़ाई भी कराई जा रही है।इसके बाद अखिलेश यादव और आजम खान के बच्चों की शिक्षा को लेकर सवाल उठाया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जो नेता मुस्लिम बच्चों के लिए मदरसा शिक्षा की वकालत करते हैं, वे अपने बच्चों को वहां नहीं पढ़ाते और उन्हें विदेशों में शिक्षा दिलाते हैं।उनका कहना था कि आम मुस्लिम परिवारों को केवल मदरसा शिक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें भी बेहतर और आधुनिक शिक्षा के अवसर मिलने चाहिए।

जिन्ना को लेकर अखिलेश यादव के बयान पर विवाद

वीडियो में मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर अखिलेश यादव के कथित बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ वक्ताओं ने दावा किया कि अखिलेश यादव ने आजादी का श्रेय जिन्ना को दिया है। इस पर उन्होंने सवाल उठाया कि देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है।एक वक्ता ने जिन्ना को आतंकवादी बताते हुए कहा कि उनका भारत की आजादी में कोई सकारात्मक योगदान नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के बयानों से पाकिस्तान और जिन्ना के प्रति उनका झुकाव दिखाई देता है।एक अन्य वक्ता ने कहा कि देश की आजादी में अनगिनत लोगों ने संघर्ष किया और बलिदान दिया। ऐसे में आजादी का श्रेय केवल जिन्ना को देना उचित नहीं है।उन्होंने अखिलेश यादव पर देशहित के मुद्दों के बजाय समाज को बांटने वाली राजनीति करने का आरोप लगाया। हालांकि, वीडियो में जिन्ना और देश के बंटवारे से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम को लेकर एक अन्य वक्ता ने अलग व्याख्या भी रखी। उनका कहना था कि बंटवारे के समय सभी मुसलमान पाकिस्तान नहीं गए और बड़ी संख्या में लोगों ने भारत में ही रहना चुना।

Uttar Pradesh: ‘मुसलमानों को भारत चाहिए’, देश के प्रति निष्ठा पर रखी राय

वीडियो में मुस्लिम समुदाय के लोगों से यह सवाल भी किया गया कि वे भारत और पाकिस्तान में से किसके साथ हैं। इस पर एक वक्ता ने कहा कि भारतीय मुसलमानों को भारत की जमीन और यहां की नागरिकता पर गर्व है।उन्होंने कहा कि मुसलमान भारत को अपना देश मानते हैं और देश की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ऐसा कानून बनाने की मांग भी की, जिसमें भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति और सेना के साथ खड़े होने की भावना को स्पष्ट रूप से सामने रखा जाए।उनका कहना था कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है तो भारतीय मुसलमान देश के साथ खड़े होकर लड़ेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय मुसलमानों की गोली दुश्मन के सामने से चलेगी, पीठ पीछे से नहीं।इस दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद और स्वतंत्रता सेनानी अशफाक उल्ला खान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का योगदान इस बात का प्रमाण है कि मुस्लिम समुदाय का देश के प्रति समर्पण नया नहीं, बल्कि लंबे समय से चला आ रहा है।उन्होंने महिला सैन्य अधिकारी सूफिया कुरैशी का भी जिक्र किया और कहा कि भारतीय मुसलमानों को कमजोर समझना गलत है।

वंदे मातरम और भारत माता की जय पर क्या बोले मुस्लिम वक्ता?

वीडियो में विपक्ष के उस आरोप पर भी सवाल किया गया, जिसमें कहा जाता है कि मुसलमान वंदे मातरम बोलने से बचते हैं।इस पर एक मुस्लिम वक्ता ने कहा कि वह खुद वंदे मातरम और भारत माता की जय बोलते हैं। उन्होंने मौके पर ये नारे भी लगाए। उनका कहना था कि देश के प्रति सम्मान जताने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है।उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भारत माता की जय बोलने से इनकार कर सकते हैं, लेकिन इससे पूरे मुस्लिम समुदाय की सोच तय नहीं की जा सकती।उन्होंने अशफाक उल्ला खान और वीर अब्दुल हमीद जैसे देश के लिए बलिदान देने वाले लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी देश की आजादी और सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।

Uttar Pradesh: 1984 के सिख विरोधी दंगों और 1 नवंबर की रैली पर नाराजगी

वीडियो में 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कुछ लोगों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तारीख का चुनाव सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।उनका कहना था कि 1984 में सिख समुदाय के साथ जो हिंसा हुई, उसके घाव आज भी भरे नहीं हैं। ऐसे में उसी तारीख को राजनीतिक रैली आयोजित करना उचित नहीं था।एक सिख वक्ता ने कहा कि उस समय हुई घटनाओं को सिख समाज कभी नहीं भूल सकता। उनके मुताबिक, यह समुदाय के लिए ऐसी क्षति थी, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।उन्होंने आरोप लगाया कि 1984 में सिख परिवारों को निशाना बनाया गया, हजारों लोगों की हत्या हुई और महिलाओं के साथ भी गंभीर अत्याचार किए गए। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने उस समय का दर्द झेला है, वे आज भी उन घटनाओं को याद करके भावुक हो जाते हैं।वक्ता ने राहुल गांधी से मांग की कि उन्हें अपने परिवार से जुड़े उस दौर की घटनाओं के लिए माफी मांगनी चाहिए। उनका कहना था कि उस दिन राजनीतिक कार्यक्रम करने के बजाय पीड़ित परिवारों के दर्द को समझने की जरूरत थी।एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि रैली 2 या 3 नवंबर को भी आयोजित की जा सकती थी, लेकिन 1 नवंबर का दिन चुनना गलत फैसला था।

ऑपरेशन ब्लू स्टार और इमरजेंसी का भी किया जिक्र

सिख समुदाय से जुड़े लोगों ने 1984 के दंगों के साथ ऑपरेशन ब्लू स्टार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय स्वर्ण मंदिर परिसर में हुई सैन्य कार्रवाई और उसके बाद की घटनाओं ने सिख समाज को गहरा नुकसान पहुंचाया था।एक वक्ता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वर्ण मंदिर परिसर में गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई थीं। उन्होंने जरनैल सिंह भिंडरांवाले का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व की नीतियों के कारण हालात बिगड़े।इसके अलावा इमरजेंसी का मुद्दा उठाते हुए वक्ताओं ने कांग्रेस पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब देश में इमरजेंसी लागू की गई और बड़ी संख्या में लोगों को जेल भेजा गया, तब लोकतंत्र की स्थिति पर सवाल उठने चाहिए थे।उन्होंने कहा कि आज विपक्ष लोकतंत्र बचाने की बात कर रहा है, लेकिन उसे अपने शासनकाल की घटनाओं का भी जवाब देना चाहिए।

Uttar Pradesh: भाजपा की पदयात्रा का उद्देश्य क्या बताया गया?

वीडियो में भाजपा की ओर से निकाली गई पदयात्रा के उद्देश्य पर भी सवाल किया गया। इसमें शामिल लोगों ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद जनता को जागरूक करना और विपक्ष की ओर से फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करना है।एक वक्ता ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत की छवि खराब करने और देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता ऐसी कोशिशों का विरोध करेंगे और देश के हित में सड़कों पर उतरेंगे।उनके मुताबिक, पार्टी का उद्देश्य लोगों तक अपनी बात पहुंचाना और उन्हें राजनीतिक मुद्दों की जानकारी देना है।

वोट चोरी के आरोपों पर भी उठाए सवाल

वीडियो में विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर भी लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ वक्ताओं ने कहा कि मतदाता मतदान केंद्र पर जाकर ईवीएम का बटन दबाता है और इस तरह उसका वोट दर्ज होता है। ऐसे में बिना ठोस सबूत के वोट चोरी का आरोप लगाना सही नहीं है।एक व्यक्ति ने दावा किया कि पिछले करीब 10 वर्षों से लोग भाजपा को वोट दे रहे हैं और उनके परिवार में किसी का वोट चोरी होने की घटना सामने नहीं आई है।उन्होंने कहा कि जनता अब पहले की तरह विपक्षी दलों को वोट नहीं दे रही है, इसलिए उन्हें चुनावी हार का कारण वोट चोरी दिखाई दे रहा है।

Uttar Pradesh: क्या मुसलमान भाजपा के साथ आ रहे हैं?

वीडियो में कई वक्ताओं ने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय का एक हिस्सा अब भाजपा की ओर आकर्षित हो रहा है। उनका कहना था कि पहले मुसलमानों के बीच भाजपा को लेकर डर का माहौल बनाया जाता था, लेकिन अब लोग सरकारी योजनाओं और सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार का समर्थन कर रहे हैं।एक वक्ता ने कहा कि पदयात्रा में शामिल मुस्लिम लोग किसी के बुलाने या पैसे देने पर नहीं आए हैं, बल्कि अपनी इच्छा से इसमें शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि यहां मौजूद लोग पार्टी के कार्यकर्ता हैं और अपनी राजनीतिक पसंद के आधार पर कार्यक्रम में पहुंचे हैं।उन्होंने विपक्ष के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि समाजवादी पार्टी इस नारे के जरिए इन वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती है, लेकिन उन्हें वास्तविक राजनीतिक भागीदारी नहीं देती।

राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर परिवारवाद का आरोप

कुछ वक्ताओं ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल उठाते हुए परिवारवाद का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप था कि विपक्षी दल देश और समाज के विकास से ज्यादा अपने परिवार के राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हैं।एक वक्ता ने कहा कि समाजवादी पार्टी में मुख्यमंत्री, सांसद और मंत्री जैसे पदों पर परिवार के सदस्यों को महत्व दिया जाता रहा है। उन्होंने सवाल किया कि अगर पार्टी वास्तव में मुस्लिम समुदाय को आगे बढ़ाना चाहती है तो उसे किसी मुस्लिम नेता को मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा करनी चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि केवल मुस्लिम हितों की बात करने से समुदाय का विश्वास नहीं जीता जा सकता, बल्कि उन्हें राजनीतिक नेतृत्व में भी उचित स्थान देना होगा।

Uttar Pradesh: क्या भाजपा सभी धर्मों को साथ लेकर चल रही है?

वीडियो में शामिल कुछ लोगों ने कहा कि भाजपा सरकार सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर चलने का दावा करती है। उनके मुताबिक, सरकारी योजनाओं का लाभ किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है और मुस्लिम समुदाय भी इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहा है।एक वक्ता ने कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और कानून-व्यवस्था पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही आयुष्मान कार्ड की सुविधा हर व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि भाजपा की नीतियों के कारण सिख समुदाय के लोग भी पार्टी के साथ जुड़ रहे हैं। उन्होंने 1984 की घटनाओं को इसकी एक बड़ी वजह बताया।कुल मिलाकर, खबर इंडिया के इस वीडियो में मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा, भाजपा सरकार की योजनाओं, सपा और कांग्रेस की राजनीति, जिन्ना को लेकर विवाद, मदरसा शिक्षा और 1984 के सिख विरोधी दंगों जैसे कई मुद्दे सामने आए। वीडियो में शामिल लोगों ने मुख्य रूप से भाजपा सरकार के समर्थन में अपनी राय रखी और विपक्षी दलों पर मुस्लिम समुदाय को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। हालांकि, ये सभी संबंधित वक्ताओं के व्यक्तिगत विचार और राजनीतिक दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।