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UP के पूर्व डिप्टी CM को उपराज्यपाल की कमान, जानें दिनेश शर्मा का सियासी सफर और 2027 से पहले BJP का ब्राह्मण दांव

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. दिनेश शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से 5 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना के मुताबिक उनकी नियुक्ति उस दिन से प्रभावी होगी, जिस दिन वह पदभार ग्रहण करेंगे।

दिनेश शर्मा फिलहाल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। वह 2017 से 2022 तक योगी आदित्यनाथ सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे। इससे पहले वह लंबे समय तक लखनऊ की राजनीति में सक्रिय रहे और दो बार शहर के मेयर भी चुने गए। ऐसे में उपराज्यपाल के पद पर उनकी नियुक्ति उनके लंबे राजनीतिक सफर में एक नया पड़ाव है।

कौन हैं डॉ. दिनेश शर्मा?

डॉ. दिनेश शर्मा का जन्म 12 जनवरी 1964 को हुआ था। राजनीति में आने से पहले वह शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे और लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर के तौर पर काम किया। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से कॉमर्स में उच्च शिक्षा हासिल की और पीएचडी भी की। राजनीति में उनका शुरुआती जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से रहा। इसके बाद वह भारतीय जनता युवा मोर्चा में सक्रिय हुए और उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। यही संगठनात्मक पृष्ठभूमि आगे चलकर उन्हें बीजेपी की मुख्यधारा की राजनीति में मजबूत जगह दिलाने में मददगार बनी।

UP Election 2027: 2006 में पहली बड़ी चुनावी कामयाबी

दिनेश शर्मा के राजनीतिक करियर में बड़ा मोड़ 2006 में आया, जब वह पहली बार लखनऊ के मेयर चुने गए। इसके बाद 2012 में उन्होंने दोबारा मेयर का चुनाव जीता। लखनऊ की राजनीति में उनकी पकड़ और संगठन के भीतर सक्रिय भूमिका ने उन्हें बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद उनका कद लगातार बढ़ता गया।

योगी सरकार में बने उपमुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद 19 मार्च 2017 को दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 2017 से 2022 तक सरकार में काम किया। सरकार में रहते हुए उनके पास शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रही। 2022 में बीजेपी की दोबारा सरकार बनने के बाद ब्रजेश पाठक को उपमुख्यमंत्री बनाया गया और दिनेश शर्मा योगी सरकार से बाहर हो गए।

UP Election 2027: 2023 में पहुंचे राज्यसभा

उपमुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी पार्टी में उनका महत्व कम नहीं हुआ। सितंबर 2023 में बीजेपी ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया और वह निर्विरोध निर्वाचित हुए। उनका राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 तक था। अब उपराज्यपाल की नियुक्ति के बाद उनके राजनीतिक करियर ने संवैधानिक पद की ओर नया मोड़ ले लिया है।

UP Election 2027
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2027 से पहले ब्राह्मणों पर BJP का फोकस क्यों?

दिनेश शर्मा की नियुक्ति को उत्तर प्रदेश की राजनीति से जोड़कर देखने की एक वजह उनकी ब्राह्मण नेता की पहचान भी है। यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ब्राह्मण मतदाताओं का रुख राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विभिन्न राजनीतिक आकलनों में राज्य के मतदाताओं में ब्राह्मणों की हिस्सेदारी करीब 10-12 प्रतिशत बताई जाती है और कई विधानसभा क्षेत्रों में उनका प्रभाव माना जाता है।

ऐसे समय में दिनेश शर्मा जैसे वरिष्ठ ब्राह्मण नेता को बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है। हालांकि, सिर्फ इस नियुक्ति के आधार पर यह कहना कि बीजेपी ने 2027 के लिए ब्राह्मणों को साधने की रणनीति बना ली है, जल्दबाजी होगी।

दरअसल, यूपी में बीजेपी का सामाजिक समीकरण सिर्फ ब्राह्मणों तक सीमित नहीं है। पार्टी को ब्राह्मणों के साथ-साथ ओबीसी, दलित और अन्य सामाजिक समूहों के बीच अपना आधार बनाए रखना है। यही वजह है कि 2027 के चुनाव से पहले पार्टी के संगठनात्मक फैसलों और नेताओं को दी जा रही जिम्मेदारियों को अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। दूसरी तरफ विपक्ष भी ब्राह्मण मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। समाजवादी पार्टी की ओर से भी ब्राह्मणों को अपने राजनीतिक गठजोड़ में जोड़ने की कोशिशों की चर्चा सामने आई है। यानी बीजेपी के लिए चुनौती केवल अपने पुराने सामाजिक आधार को बनाए रखने की नहीं, बल्कि विपक्ष की नई सोशल इंजीनियरिंग का जवाब देने की भी है।

UP Election 2027: दिनेश शर्मा की पहचान क्यों खास है?

दिनेश शर्मा की राजनीति की खासियत यह रही है कि उनका सफर केवल जातीय पहचान तक सीमित नहीं रहा। वह लखनऊ के मेयर रहे, संगठन में राष्ट्रीय पदों पर रहे, योगी सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे और फिर राज्यसभा पहुंचे। उनकी अकादमिक पृष्ठभूमि भी उन्हें दूसरे नेताओं से अलग पहचान देती है। यही वजह है कि पार्टी में उन्हें संगठन, सरकार और अब संवैधानिक जिम्मेदारी तीनों स्तरों का अनुभव रखने वाले नेता के तौर पर देखा जा सकता है। दिलचस्प बात यह भी है कि 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले दिनेश शर्मा ने ब्राह्मणों को लेकर बयान दिया था कि ब्राह्मण केवल जाति नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है और बीजेपी सभी वर्गों के लिए काम करती है। उस समय उनके बयान की राजनीतिक व्याख्या भी हुई थी।

अंडमान-निकोबार की नई जिम्मेदारी का क्या मतलब?

उपराज्यपाल का पद एक संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है। अब दिनेश शर्मा की भूमिका सक्रिय पार्टी राजनीति से अलग होगी और उनका काम केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासनिक-संवैधानिक दायित्वों से जुड़ जाएगा। इस लिहाज से यह उनके राजनीतिक करियर का एक अलग चरण है। लखनऊ के मेयर से शुरू हुआ सफर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री, राज्यसभा सांसद और अब अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल तक पहुंच गया है।

UP Election 2027: क्या यह 2027 के लिए BJP का संकेत है?

यही सवाल सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा में है। दिनेश शर्मा की नियुक्ति को एक तरफ उनकी लंबी राजनीतिक और संगठनात्मक यात्रा के बाद मिली संवैधानिक जिम्मेदारी के तौर पर देखा जाना चाहिए। दूसरी तरफ, यूपी में 2027 का चुनाव सामने होने के कारण इसके राजनीतिक संदेश पर भी चर्चा होगी। लेकिन फिलहाल इतना कहना ज्यादा उचित होगा कि बीजेपी के लिए यूपी में सामाजिक संतुलन महत्वपूर्ण है और दिनेश शर्मा की नियुक्ति उसी व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में चर्चा का विषय बनी है।

लखनऊ के मेयर से लेकर योगी सरकार के उपमुख्यमंत्री, राज्यसभा सांसद और अब अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल तक डॉ. दिनेश शर्मा का सियासी सफर बीजेपी में लगातार बदलती जिम्मेदारियों की कहानी है। अब उनकी नई भूमिका पार्टी की सक्रिय राजनीति से अलग संवैधानिक पद की है। लेकिन यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनकी नियुक्ति के राजनीतिक संकेतों पर चर्चा जारी रहना तय है।

खासकर ऐसे समय में जब बीजेपी और विपक्ष दोनों ही अलग-अलग सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं, दिनेश शर्मा का नया पद सिर्फ एक प्रशासनिक नियुक्ति है या इसके पीछे कोई व्यापक राजनीतिक संदेश भी है , इस पर आने वाले महीनों में तस्वीर और साफ हो सकती है।

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