अखिलेश के ‘चवन्नी’ बयान से गरमाई पश्चिमी यूपी की सियासत, चारू ने उठाया स्वाभिमान का मुद्दा

Akhilesh Chavanni Remark:

Akhilesh Chavanni Remark: सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में आयोजित रालोद की स्वाभिमान रैली में जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी ने मंच संभाला। उन्होंने जयंत चौधरी के सम्मान को सामाजिक गौरव और स्वाभिमान से जोड़ते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। चारू चौधरी ने कहा कि किसी व्यक्ति या समाज का अपमान करने या उसे सीख देने का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक टिप्पणियों से किसी नेता की अंतिम पहचान तय नहीं होती, बल्कि जनता का वोट ही फैसला करता है।

Akhilesh Chavanni Remark: ‘जयंत का सम्मान’ बना राजनीतिक नैरेटिव-

रालोद के लिए चारू चौधरी का बयान सिर्फ व्यक्तिगत राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं है। पार्टी इस मुद्दे को पश्चिमी यूपी के सामाजिक सम्मान और स्वाभिमान से जोड़ने की कोशिश करती दिखाई दे रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय की राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण रही है और रालोद की पहचान लंबे समय से किसान राजनीति और जाट नेतृत्व से जुड़ी रही है। ऐसे में जयंत चौधरी के सम्मान को सामाजिक स्वाभिमान से जोड़ना पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

Akhilesh Chavanni Remark: सपा और रालोद के रास्ते हुए अलग-

सपा और रालोद पहले एक राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा रह चुके हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने पश्चिमी यूपी में साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। हालांकि बाद में राजनीतिक समीकरण बदले और रालोद एनडीए के साथ चला गया। अब 2027 में दोनों दल अलग-अलग राजनीतिक खेमों में हैं। ऐसे में पश्चिमी यूपी की कई विधानसभा सीटों पर सपा और रालोद के बीच सीधी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।

जाट वोट पर रहेगी सबकी नजर-

2027 के चुनाव में पश्चिमी यूपी के जाट मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। रालोद के सामने अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत रखने के साथ-साथ दूसरे वर्गों के बीच भी अपनी पकड़ बढ़ाने की चुनौती है। वहीं सपा अपने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों की रणनीति का असर पश्चिमी यूपी के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

सिर्फ स्वाभिमान नहीं, किसान और गन्ना भी अहम-

रालोद की राजनीति में किसान और गन्ने से जुड़े मुद्दों की अहम भूमिका रही है। गन्ने का मूल्य, चीनी मिलों से जुड़े सवाल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे पश्चिमी यूपी में लंबे समय से चुनावी चर्चा का हिस्सा रहे हैं। इसलिए पार्टी के सामने चुनौती केवल ‘स्वाभिमान’ के मुद्दे को उठाने की नहीं, बल्कि इसे किसान और स्थानीय मुद्दों के साथ जोड़ने की भी होगी।

पोस्टर और रैली तक पहुंचा विवाद-

‘चवन्नी’ विवाद अब नेताओं के बयानों तक सीमित नहीं रहा। पश्चिमी यूपी में इस मुद्दे को लेकर पोस्टर और होर्डिंग भी सामने आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि सपा और रालोद के बीच राजनीतिक खींचतान धीरे-धीरे जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगी है।

2027 में क्या पड़ेगा असर-

इस पूरे घटनाक्रम का असर मुख्य रूप से तीन स्तरों पर देखा जा सकता है। पहला, रालोद अगर जयंत चौधरी के सम्मान को सामाजिक स्वाभिमान के मुद्दे से जोड़कर अपने समर्थकों को एकजुट करता है तो उसे फायदा मिल सकता है। दूसरा, सपा के सामने अपने PDA समीकरण को मजबूत करने के साथ पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती होगी। तीसरा, रालोद के एनडीए में होने के कारण उसका सामाजिक आधार गठबंधन के चुनावी समीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

असली फैसला 2027 के चुनाव में-

फिलहाल ‘चवन्नी’ विवाद ने रालोद को एक ऐसा राजनीतिक मुद्दा दे दिया है, जिसे पार्टी सम्मान और स्वाभिमान के नैरेटिव में बदलने की कोशिश कर रही है। चारू चौधरी का मंच संभालना और जयंत चौधरी के सम्मान को सामाजिक गौरव से जोड़ना इसी रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है। हालांकि इसका वास्तविक चुनावी असर 2027 में ही साफ होगा। पश्चिमी यूपी में किसान, गन्ना, रोजगार, कानून-व्यवस्था, स्थानीय उम्मीदवार और गठबंधन जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के फैसले में अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि ‘स्वाभिमान’ का यह नैरेटिव 2027 में कितना बड़ा चुनावी मुद्दा बनता है और रालोद इसे कितने वोटों में बदल पाता है।

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SAIL Employee Transfer:

SAIL Employee Transfer: सेल प्रबंधन ने बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) में कार्यरत 22 कर्मचारियों का अंतर विभागीय तबादला किया है। इनमें 20 कर्मचारियों को संयंत्र के अलग-अलग विभागों में भेजा गया है, जबकि दो कर्मचारियों का स्थानांतरण नगर सेवा के जवाहर लाल नेहरू पार्क में किया गया है। प्रबंधन ने सभी स्थानांतरित कर्मचारियों को अपने वर्तमान विभाग से तत्काल विरमित होकर नए विभाग में योगदान देने का निर्देश दिया है। बताया गया है कि विभागीय कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है।

SAIL Employee Transfer: किन कर्मचारियों का हुआ तबादला-

स्थानांतरित कर्मचारियों में टेक्निकल एसोसिएट, इंजीनियरिंग एसोसिएट, एडमिनिस्ट्रेशन एसोसिएट और जूनियर इंजीनियर ग्रेड के कर्मचारी शामिल हैं। प्रताप मंडल को ब्लास्ट फर्नेस से SMS-2 CCS, नरेश कुमार शर्मा को ब्लास्ट फर्नेस मैकेनिकल से कोक ओवन और डी. राम को ब्लास्ट फर्नेस ऑपरेशन से कोक ओवन भेजा गया है। सुजल कुमार का कोक ओवन इलेक्ट्रिकल से हॉट स्ट्रिप मिल, राजेश कुमार का कोक ओवन ऑपरेशन से ब्लास्ट फर्नेस और डॉ. अजय कुमार का कोक ओवन मैकेनिकल से SMS-1 विभाग में तबादला किया गया है।

SAIL Employee Transfer: इन कर्मचारियों को भी मिली नई जिम्मेदारी-

सतीश चंद्र मंडल को अधिशासी निदेशक संकार्य सचिवालय से MRD, नीरज कुमार को HRCAF ऑपरेशन से हॉट स्ट्रिप मिल, मो. फारूक अंसारी को HRCF ऑपरेशन से कोक ओवन और अमर कुमार को हॉट स्ट्रिप मिल से CRM भेजा गया है। अभिषेक कुमार को हॉट स्ट्रिप मिल इलेक्ट्रिकल से अधिशासी निदेशक संकार्य सचिवालय, वी. रोबिन को MRD से SMS-2 CCS और सुरेश प्रसाद गुप्ता को ऑपरेशन गैरेज से ब्लास्ट फर्नेस में स्थानांतरित किया गया है। इसके अलावा कुलदीप कुमार को RGBS से ब्लास्ट फर्नेस और संजीत कुमार को RGBS से SMS-1 विभाग में भेजा गया है।

इन कर्मचारियों का भी हुआ स्थानांतरण-

शुभम लाहा को SMS-2 CCS से हॉट स्ट्रिप मिल, पंकज कुमार सिंह और मनोज कुमार गुप्ता को शॉप एंड फाउंड्री से सिंटर प्लांट भेजा गया है। जयकांत सिंह को SMS-2 CCL से PPC विभाग में स्थानांतरित किया गया है।

दो कर्मचारियों को जवाहर लाल नेहरू पार्क भेजा गया-

ओम प्रकाश शर्मा को ब्लास्ट फर्नेस से नगर सेवा के जवाहर लाल नेहरू पार्क और रंजीत कुमार सिंह को हॉट स्ट्रिप मिल से जवाहर लाल नेहरू पार्क भेजा गया है। दोनों कर्मचारियों को नए स्थान पर योगदान देने का आदेश जारी किया गया है। प्रबंधन ने सभी कर्मचारियों को नए विभाग में तत्काल कार्यभार संभालने के निर्देश दिए हैं।

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NSE Pre-Open Session Changes:

NSE Pre-Open Session Changes: शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए 7 सितंबर 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने रेगुलर प्री-ओपन सेशन के नियमों में बदलाव लागू करेगा। हालांकि प्री-ओपन सेशन सुबह 9:00 बजे से 9:15 बजे तक पहले की तरह जारी रहेगा, लेकिन इस दौरान ऑर्डर एंट्री और मैचिंग की प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा। नए नियमों के तहत सबसे अहम बदलाव यह है कि मार्केट ऑर्डर सिर्फ सुबह 9:00 बजे से 9:05 बजे तक ही स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद ऑर्डर एंट्री फेज में केवल लिमिट ऑर्डर देने, बदलने या कैंसिल करने की अनुमति होगी।

NSE Pre-Open Session Changes: NSE प्री-ओपन सेशन में क्या बदलेगा-

NSE के नए सिस्टम में 15 मिनट के प्री-ओपन सेशन को अलग-अलग चरणों में बांटा गया है। पहले पांच मिनट यानी सुबह 9:00 से 9:05 बजे तक ट्रेडर्स मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर दे सकेंगे। सुबह 9:05 बजे के बाद मार्केट ऑर्डर स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इस चरण में केवल लिमिट ऑर्डर ही लगाए, बदले या कैंसिल किए जा सकेंगे। दूसरे चरण की सबसे खास बात इसका रैंडम क्लोजर सिस्टम है। यानी ऑर्डर कलेक्शन किसी तय सेकंड पर बंद नहीं होगा। इससे ट्रेडर्स के लिए आखिरी समय देखकर ऑर्डर लगाने की रणनीति मुश्किल हो जाएगी।

NSE Pre-Open Session Changes: 7 सितंबर से लागू होंगे ये 6 बदलाव-

1. सुबह 9:00 से 9:05 बजे तक: मार्केट और लिमिट दोनों ऑर्डर स्वीकार होंगे।

2. सुबह 9:05 बजे के बाद: केवल लिमिट ऑर्डर की अनुमति होगी। नए मार्केट ऑर्डर स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

3. सुबह 9:08 से 9:10 बजे के बीच: ऑर्डर कलेक्शन फेज सिस्टम के जरिए रैंडम तरीके से बंद होगा।

4. सुबह 9:10 से 9:12 बजे तक: ऑर्डर मैचिंग होगी और ओपनिंग प्राइस तय किया जाएगा।

5. सुबह 9:12 से 9:15 बजे तक: नॉर्मल ट्रेडिंग शुरू होने से पहले बफर पीरियड रहेगा।

6. सुबह 9:15 बजे: शेयर बाजार में सामान्य ट्रेडिंग शुरू होगी।

NSE Pre-Open Session Changes: ऑर्डर मैचिंग का तरीका भी बदलेगा-

नए सिस्टम में योग्य ऑर्डर्स को मैच करने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। NSE के मुताबिक, योग्य मार्केट ऑर्डर्स को पहले दूसरे योग्य मार्केट ऑर्डर्स के साथ समय की प्राथमिकता के आधार पर मैच किया जाएगा। इसके बाद बचे हुए मार्केट ऑर्डर्स को लिमिट ऑर्डर्स के साथ मैच किया जाएगा। अंत में बचे हुए लिमिट ऑर्डर्स को कीमत और समय की प्राथमिकता के आधार पर मैच किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद डिमांड और सप्लाई के आधार पर एक इक्विलिब्रियम प्राइस तय होगा, जिसे शेयर की ओपनिंग कीमत के तौर पर माना जाएगा।

क्यों बदला जा रहा है प्री-ओपन सिस्टम-

NSE का यह बदलाव ओपनिंग प्राइस तय करने की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाने और तय समय के आसपास ऑर्डर लगाने की रणनीति को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। रैंडम क्लोजर की वजह से ट्रेडर्स किसी निश्चित आखिरी समय का इंतजार नहीं कर पाएंगे। इसलिए प्री-ओपन ऑक्शन में हिस्सा लेने वाले ट्रेडर्स को अपनी लिमिट प्राइस और ऑर्डर स्ट्रैटेजी पहले से तय रखनी होगी।

ट्रेडर्स को किन बातों का ध्यान रखना होगा-

ट्रेडर्स को 7 सितंबर से अपने ब्रोकर के ऑर्डर इंटरफेस और नए टाइमिंग सिस्टम को ध्यान से चेक करना चाहिए। अगर किसी को प्री-ओपन सेशन में मार्केट ऑर्डर देना है तो उसे सुबह 9:05 बजे से पहले ऑर्डर करना होगा। 9:05 बजे के बाद भेजे गए मार्केट ऑर्डर को NSE के सिस्टम द्वारा रिजेक्ट कर दिया जाएगा। वहीं, दूसरे चरण में रैंडम क्लोजर होने के कारण आखिरी समय में ऑर्डर लगाने पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

स्पेशल प्री-ओपन सेशन अलग है-

इन बदलावों को IPO या रिलिस्टेड सिक्योरिटीज जैसी कुछ प्रतिभूतियों के लिए लागू स्पेशल प्री-ओपन सेशन से अलग समझना चाहिए। स्पेशल प्री-ओपन सेशन के नियम और टाइमिंग अलग हैं। इसलिए ट्रेडर्स को रेगुलर प्री-ओपन सेशन और स्पेशल प्री-ओपन सेशन के नियमों को आपस में नहीं मिलाना चाहिए।

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China Type 100 Tank:

China Type 100 Tank: चीन के अत्याधुनिक टाइप 100 मेन बैटल टैंक की नई तस्वीरें सामने आई हैं। चीनी शहर में नजर आए इस टैंक पर नया छलावरण पैटर्न दिखाई दे रहा है। इसे चीन की अगली पीढ़ी के बख्तरबंद युद्धक वाहनों में अहम माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, टाइप 100 का इस्तेमाल अब केवल परेड या प्रशिक्षण तक सीमित रहने के बजाय बड़े पैमाने पर सेना में शामिल किए जाने की दिशा में बढ़ सकता है। चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, टैंक को पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है।

China Type 100 Tank: अत्याधुनिक तकनीक से लैस है टाइप 100-

टाइप 100 को नई पीढ़ी के टैंक के तौर पर डिजाइन किया गया है। इसमें सुरक्षा, मारक क्षमता और डिजिटल तकनीक को एक साथ जोड़ा गया है। टैंक में 105mm की मुख्य तोप लगी है। इसकी एक खासियत चालक दल की स्थिति भी है। टैंक के तीनों क्रू सदस्य बुर्ज के बजाय मुख्य बॉडी के अंदर बैठते हैं। इससे गोला-बारूद में विस्फोट जैसी स्थिति पैदा होने पर चालक दल को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकती है।

China Type 100 Tank: रडार और सेंसर से खतरों पर नजर-

टैंक के चारों तरफ लगे फेज्ड-एरे रडार और सेंसर इसे आसपास के खतरे पहचानने में मदद करते हैं। इनमें ड्रोन, मिसाइल, रॉकेट और अन्य सटीक निशाना लगाने वाले हथियार शामिल हैं। इसकी सेंसर प्रणाली को पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए टैंक में आधुनिक पावर सिस्टम दिया गया है। यह पूरी तरह या आंशिक रूप से इलेक्ट्रिक मोड में भी काम कर सकता है। इससे इसकी आवाज और इन्फ्रारेड सिग्नेचर को कम करने में मदद मिल सकती है।

360 डिग्री निगरानी की सुविधा-

टैंक के चारों ओर लगे कैमरे और ऑगमेंटेड रियलिटी तकनीक चालक दल को आसपास के इलाके की 360 डिग्री जानकारी उपलब्ध कराती है। इससे बिना सीधे बाहर देखे भी चालक दल को युद्धक्षेत्र की स्थिति समझने में मदद मिल सकती है।

डिजिटल कॉम्बैट नेटवर्क का हिस्सा-

टाइप 100 को सिर्फ एक फायरिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसे आधुनिक डिजिटल कॉम्बैट नेटवर्क का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। यह टैंक उपग्रहों, लड़ाकू ड्रोन और कमांड सेंटर से युद्धक्षेत्र से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकता है। इस डेटा के आधार पर टैंक उन लक्ष्यों को भी निशाना बनाने में मदद कर सकता है, जो चालक दल की सीधी नजर में नहीं हैं।

बदलते युद्ध के हिसाब से तैयार किया गया टैंक-

आधुनिक युद्ध में टैंकों के सामने खतरे भी तेजी से बदल रहे हैं। अब उन्हें पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ एंटी-टैंक मिसाइलों और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे हथियारों से भी चुनौती मिलती है। ऐसे माहौल में केवल भारी कवच पर्याप्त नहीं माना जाता। किसी भी आधुनिक टैंक के लिए खतरे को पहले पहचानना, अपनी मौजूदगी को कम करना और दूसरे सैन्य प्लेटफॉर्म से लगातार जुड़े रहना बेहद अहम हो गया है। इसी वजह से टाइप 100 को चीन की बदलती बख्तरबंद युद्ध रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसकी मारक क्षमता, सेंसर, इलेक्ट्रिक तकनीक और डिजिटल नेटवर्किंग इसे पारंपरिक टैंकों से अलग पहचान देते हैं।

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लखनऊ NRHM घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, पूर्व विधायक से जुड़ी कंपनियों का रिकॉर्ड तलब

Lucknow NRHM scam:

Lucknow NRHM scam: राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई तेज कर दी है। ईडी ने उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPMSCL) से पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव से जुड़ी सात से अधिक कंपनियों का रिकॉर्ड मांगा है। इन कंपनियों ने वर्ष 2014 से 2019 के बीच देवीपाटन समेत विभिन्न मंडलों के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की थी।

Lucknow NRHM scam: चार जिलों के अस्पतालों से जुड़े दस्तावेज मांगे-

ईडी ने UPMSCL से श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा और बहराइच के सरकारी अस्पतालों में की गई सामग्री की आपूर्ति से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। इससे पहले जांच एजेंसी ने स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण को पत्र भेजकर अस्पतालों को जारी फंड, चिकित्सा प्रतिपूर्ति और दवाओं से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगा था।

Lucknow NRHM scam: कंपनियों को सप्लाई का काम मिलने की जांच-

जांच के अनुसार, 2014 से 2019 के बीच पूर्व विधायक से जुड़ी कई कंपनियों को सरकारी अस्पतालों में दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति का काम मिला था। आरोप है कि पूर्व विधायक और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर कमीशनखोरी के जरिए इन कंपनियों के भुगतान कराए।

काली कमाई को ठिकाने लगाने का आरोप-

NRHM घोटाले में UPMSCL की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की है। अब तक की जांच में एजेंसी को कथित तौर पर ऐसे तथ्य मिले हैं, जिनसे पूर्व विधायक और उनके सहयोगियों पर संबंधित कंपनियों के जरिए काली कमाई को ठिकाने लगाने का संदेह है।

पूर्व विधायक की विजिलेंस जांच भी जारी-

पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव अपने कार्यकाल 2012 से 2017 के दौरान वैध आय और ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में विजिलेंस जांच का सामना कर रहे हैं। NRHM घोटाले में पूर्व विधायक के अलावा तत्कालीन सीएमओ समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस ने पिछले 10 जून को पूर्व विधायक को लखनऊ के वेब मॉल से गिरफ्तार किया था। इसके बाद ईडी ने भी मामले की जांच शुरू की और अब संबंधित कंपनियों व सरकारी अस्पतालों की आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

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लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर को जान से मारने की धमकी, वीडियो वायरल होने पर केस दर्ज

Nandkishor Gurjar death threat:

Nandkishor Gurjar death threat: लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर को अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए जान से मारने की धमकी देने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोनी बॉर्डर थाना पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Nandkishor Gurjar death threat: सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, विधायक को धमकी देने का आरोप-

परमहंस विहार कॉलोनी निवासी लिखित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि लोनी निवासी हाजी सलमान नाम के युवक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया है। आरोप है कि वीडियो में विधायक नंदकिशोर गुर्जर के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई है। वीडियो में विधायक पर कुछ आरोप भी लगाए गए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद विधायक के समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है।

Nandkishor Gurjar death threat: भड़काऊ भाषा के इस्तेमाल का आरोप-

पुलिस के मुताबिक, वायरल वीडियो में कथित तौर पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका है। प्रभारी एसीपी अंकुर विहार राम किशन ने बताया कि मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस वीडियो और उससे जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

राशीद अली गेट पर हनुमान चालीसा पाठ का ऐलान-

वहीं, लोनी थाना क्षेत्र के राशीद अली गेट इलाके में सड़क से कार हटाने को लेकर दो पक्षों के बीच हुई मारपीट का मामला भी तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में हिंदू संगठन के पदाधिकारी की ओर से आरोपी पक्ष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसके बाद आरोपी पक्ष की ओर से सोशल मीडिया पर लोनी विधायक और हिंदू संगठन के पदाधिकारी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने का मामला सामने आया।

पुलिस ने माहौल खराब करने वालों पर कार्रवाई की बात कही-

घटना के बाद हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया पर राशीद अली गेट के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ करने की घोषणा की है। मामले को देखते हुए पुलिस प्रशासन सतर्क है। अधिकारियों ने लोनी का माहौल खराब करने या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।

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Jharkhand CBI Probes:

Jharkhand CBI Probes: झारखंड में संवेदनशील और चर्चित मामलों की जांच सीबीआई से कराने की मांग लगातार उठती रही है। हाल में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित भर्ती घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर विपक्ष मुखर है। ऐसे में झारखंड में पहले सीबीआई के पास पहुंचे मामलों और उनके नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं।राज्य में सीबीआई कई बड़े और सनसनीखेज मामलों की जांच कर चुकी है। कुछ मामलों में एजेंसी को सफलता मिली, जबकि कुछ मामलों में जांच के नतीजों से पीड़ित परिवार या मृतकों के स्वजन संतुष्ट नहीं हुए।

Jharkhand CBI Probes: बकोरिया मुठभेड़ में पुलिस की जांच पर लगाई मुहर-

पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया गांव में 8 जून 2015 को हुई मुठभेड़ काफी विवादित रही थी। झारखंड पुलिस ने 12 माओवादियों को मार गिराने का दावा किया था, जबकि मृतकों के स्वजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताया था। हाई कोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने भी अपनी जांच में इसे मुठभेड़ का मामला माना और झारखंड पुलिस की जांच पर मुहर लगा दी। हालांकि, मृतकों के स्वजन सीबीआई के निष्कर्ष से संतुष्ट नहीं हुए।

Jharkhand CBI Probes: विनय महतो मौत मामले में क्लोजर रिपोर्ट-

रांची के तुपुदाना स्थित सफायर इंटरनेशनल स्कूल में 5 फरवरी 2016 को छात्र विनय महतो की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। रांची पुलिस ने इसे हत्या का मामला माना था और स्कूल की शिक्षिका समेत उनके बच्चों को जेल भेजा था। बाद में वैज्ञानिक जांच के आधार पर उन्हें जमानत मिल गई। विनय के पिता के आग्रह और झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद जुलाई 2022 में सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली। जून 2026 में सीबीआई ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए मौत को दुर्घटना माना। इसके बाद विनय महतो के स्वजनों ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाए हैं।

अंतरिक्ष शनिग्रही की मौत का मामला अब भी लंबित-

रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र में 25 जुलाई 2016 को डीपीएस के छात्र अंतरिक्ष शनिग्रही की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। स्थानीय पुलिस ने इसे दुर्घटना बताया था। छात्र की मां के आग्रह पर हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। सीबीआई ने फरवरी 2021 में प्राथमिकी दर्ज की, लेकिन अब तक जांच किसी अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंची है।

बीटेक छात्रा हत्याकांड में मिली बड़ी सफलता-

रांची के सदर थाना क्षेत्र की बूटी बस्ती में 15 दिसंबर 2016 की रात बीटेक की एक छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर शव जलाने का मामला सामने आया था। रांची पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद मामले का खुलासा नहीं हो सका, जिसके बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई। एजेंसी ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया। यह मामला सीबीआई के झारखंड में सबसे सफल अनुसंधानों में गिना जाता है। निचली अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया।

साढ़े पांच साल से लापता छात्रा की तलाश भी सीबीआई के पास-

बोकारो के पिंडराजोरा का मामला भी अब सीबीआई के पास पहुंच गया है। करीब साढ़े पांच साल पहले लापता हुई छात्रा की तलाश की जिम्मेदारी सीबीआई को दी गई है। सीबीआई की रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि एजेंसी इस मामले में लापता छात्रा तक पहुंच पाती है या नहीं।

ईडी अधिकारियों से जुड़े दो मामलों की भी जांच-

ईडी अधिकारियों पर कथित मारपीट से जुड़े दो मामलों की जांच भी सीबीआई कर रही है। इनमें एक मामला साहिबगंज में अवैध पत्थर खनन मामले के गवाह के मुकरने और ईडी अधिकारियों पर मारपीट के आरोप से जुड़ा है। दूसरा मामला सरकारी खाते से करोड़ों रुपये की कथित अवैध निकासी के आरोपी के साथ ईडी कार्यालय में मारपीट के आरोप से संबंधित है। दोनों मामलों में सीबीआई की जांच जारी है।

सफलता और सवाल, दोनों का रिकॉर्ड-

झारखंड में सीबीआई के पास पहुंचे मामलों को देखें तो एजेंसी ने कुछ मामलों में अहम सफलता हासिल की है, लेकिन कई मामलों में जांच लंबी चली या उसके निष्कर्ष पर पीड़ित परिवारों ने सवाल उठाए। ऐसे में राज्य में संवेदनशील मामलों की सीबीआई जांच की मांग के बीच एजेंसी के पुराने मामलों का रिकॉर्ड भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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नेपाल में फ्लैश फ्लड से भीषण तबाही, मृतकों का आंकड़ा 1,344 पहुंचा

Nepal Flash Floods:

Nepal Flash Floods: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,344 हो गई है, जबकि 5 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं और मलबे से शव बरामद किए जा रहे हैं।

Nepal Flash Floods: 5 हजार लोगों की तलाश में जुटे बचाव दल-

नेपाल पुलिस के मुताबिक, बचाव दल करीब 5 हजार लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। इनमें कम से कम 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। अब तक 13,100 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।

Nepal Flash Floods: 26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़-

यह त्रासदी 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद अचानक आई बाढ़ से शुरू हुई। हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी में बाढ़ का पानी बढ़ने से निचले इलाकों में भारी नुकसान हुआ। बाढ़ की चपेट में आने से कई घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। इसके अलावा कई पनबिजली परियोजनाओं को भी गंभीर नुकसान पहुंचा।

दो और श्रमिकों की मौत-

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कास्की जिले में निर्माणाधीन 24 मेगावाट सुपर सेती पनबिजली परियोजना की पहुंच सड़क पर भूस्खलन हुआ था। इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए दो श्रमिकों की शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई।

तिब्बत में भी 500 से ज्यादा लोग लापता-

चीनी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आपदा में चीन की तरफ कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में 500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल में अब तक बरामद शवों में 85 बच्चे भी शामिल हैं। वहीं, 501 शवों के कुछ अंग गायब होने की जानकारी सामने आई है, जिससे उनकी पहचान करना और मुश्किल हो गया है।

चितवन में मिले सबसे ज्यादा शव-

अकेले चितवन जिले में 360 शव बरामद किए गए हैं, जो सभी प्रभावित जिलों में सबसे ज्यादा हैं। अधिकारियों के अनुसार, पहचान की प्रक्रिया के बाद अब तक सिर्फ 98 शव परिवारों को सौंपे जा सके हैं।

बिना पहचान वाले शवों से बढ़ी परेशानी-

अस्पतालों और मेडिकल सेंटरों में बिना पहचान वाले शवों की संख्या बढ़ने से प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। अपने लापता परिजनों की तलाश में बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। लोग अपने साथ लापता रिश्तेदारों की तस्वीरें लेकर पहुंच रहे हैं और मेडिकल सेंटरों की दीवारों पर लगाए गए मृतकों के फोटो देखकर उनकी पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। राहत और बचाव दल अब भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

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