UP News: समाजवादी पार्टी से चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी के आरोपों के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मांग की है कि राम मंदिर मामले की जांच हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जजों की निगरानी में कराई जाए तथा जांच पूरी होने के बाद श्वेत पत्र जारी किया जाए। साथ ही उन्होंने देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों को सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे में लाने की भी वकालत की।
सपा सांसद का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में आने वाले चढ़ावे और उसके उपयोग को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा।
चढ़ावा विवाद पर सियासत तेज
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर पहले ही राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) न्यायिक जांच की मांग कर चुके हैं। वहीं, मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने SIT गठित कर दी है, जो लगातार मंदिर परिसर में जांच और पूछताछ कर रही है।
UP News: ओवैसी पर भी साधा निशाना
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की उत्तर प्रदेश में सक्रियता को लेकर पूछे गए सवाल पर वीरेंद्र सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ओवैसी भाजपा की “बी टीम” की तरह काम करते हैं और कई राज्यों में उनकी राजनीति का फायदा भाजपा को मिलता है।
सपा सांसद ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समाज के कई प्रभावशाली नेता हैं और पार्टी को किसी बाहरी चेहरे की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी तालमेल को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में चल रही है और अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व करेगा।
RTI के दायरे में आएंगे धार्मिक स्थल?
वीरेंद्र सिंह के बयान के बाद एक बार फिर यह बहस शुरू हो गई है कि क्या बड़े धार्मिक ट्रस्टों और मंदिरों को RTI के दायरे में लाया जाना चाहिए। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक प्रस्ताव या कानूनी प्रक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT (एसआईटी) की जांच जारी है और सभी पक्षों की नजरें जांच रिपोर्ट तथा संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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